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शंकर घोष का दावा: बंगाल से टीएमसी की विदाई तय

पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा नेता शंकर घोष ने दावा किया कि बंगाल की जनता ने मन बना लिया है कि इस बार बंगाल से टीएमसी की विदाई और सरकार का विसर्जन होना तय है।

शंकर घोष का दावा: बंगाल से टीएमसी की विदाई तय
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विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा का संकल्प- ‘टीएमसी मुक्त बंगाल’

  • एसआईआर विवाद पर गरमाई राजनीति, भाजपा-टीएमसी आमने-सामने
  • बीएसएफ को जमीन न देने पर भाजपा का हमला, घुसपैठ को बताया बड़ी चुनौती
  • ममता बनर्जी का आरोप: चुनाव आयोग वोट काटकर भाजपा को फायदा पहुंचा रहा है

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा नेता शंकर घोष ने दावा किया कि बंगाल की जनता ने मन बना लिया है कि इस बार बंगाल से टीएमसी की विदाई और सरकार का विसर्जन होना तय है।

एसआईआर को लेकर टीएमसी के विरोध पर भाजपा नेता शंकर घोष ने कोलकाता में आईएएनएस से बातचीत में कहा कि बंगाल की जनता का मिजाज बदला हुआ है और टीएमसी के खिलाफ जनता में भारी गुस्सा है। यह बात प्रदेश की सीएम को भी पता है, तभी तो वे कोलकाता से दिल्ली पहुंचीं और मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलीं। सच्चाई यह है कि टीएमसी के साथ बंगाल की जनता नहीं रहना चाहती है। इसीलिए तो वे बार-बार कह रही हैं कि वे एसआईआर के मुद्दे पर अकेले ही लड़ेंगी। भाजपा ने ठान लिया है कि इस बार विधानसभा चुनाव में टीएमसी मुक्त बंगाल बनाना ही हमारा संकल्प है।

भाजपा नेता शंकर घोष ने कहा कि यह टीएमसी की समस्या है कि वह आधी-अधूरी बातों को झूठ के साथ मिलाती है। बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) का काम सुरक्षा देना है, जबकि बीएसएफ को फेंसिंग के लिए जमीन उपलब्ध कराना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। दुख की बात यह है कि इस सरकार ने बीएसएफ को जमीन देने या फेंसिंग के काम में कभी सहयोग नहीं किया। इसका कारण बहुत सीधा है-घुसपैठिए पश्चिम बंगाल में घुस आए हैं, जो देश की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन गए हैं।

बता दें कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग की ओर से कराए जा रहे एसआईआर पर टीएमसी लगातार भाजपा और चुनाव आयोग को निशाना बना रही है। सीएम ममता बनर्जी ने दावा किया है कि चुनाव आयोग एसआईआर के माध्यम से उन विधानसभाओं में ज्यादा मतदाताओं को वोट काटे जा रहे हैं जहां टीएमसी के विधायक हैं, वहीं भाजपा के विधायकों वाली विधानसभा में बहुत कम संख्या में वोटरों के नाम कटे हैं।

टीएमसी नेताओं का भी दावा है कि भाजपा सीधे तौर पर मुकाबला नहीं कर सकती है, इसीलिए चुनाव आयोग के सहारे वोट काटने का खेल किया जा रहा है।


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