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'1971 में दो भागों में बांटा, भूले तो नहीं?', ख्वाजा आसिफ को राजनाथ का जवाब- टुकड़े-टुकड़े होगा पाकिस्तान
पश्चिम बंगाल के बैरकपुर में एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को सीधी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “अगर पाकिस्तान इस बार बंगाल पर बुरी नजर डालने की कोशिश करता है, तो भगवान ही जाने कि इस बार वह कितने हिस्सों में बंट जाएगा।”

नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच बयानबाजी का दौर एक बार फिर तेज हो गया है। हाल ही में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ द्वारा कोलकाता पर हमले की धमकी दिए जाने के बाद भारत की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि अगर पाकिस्तान ने बंगाल की ओर बुरी नजर डाली, तो उसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं।
क्या है पूरा मामलादरअसल, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक बयान में कहा था कि यदि भारत की ओर से कोई “फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन” किया जाता है, तो पाकिस्तान कोलकाता पर हमला कर सकता है। उनके इस बयान को भारत में गंभीरता से लिया गया और इसे उकसाने वाली टिप्पणी माना गया। ख्वाजा आसिफ के इस बयान के बाद भारतीय राजनीतिक और सैन्य हलकों में प्रतिक्रिया देखने को मिली, लेकिन सबसे तीखा जवाब खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से आया।राजनाथ सिंह का करारा पलटवारपश्चिम बंगाल के बैरकपुर में एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को सीधी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “अगर पाकिस्तान इस बार बंगाल पर बुरी नजर डालने की कोशिश करता है, तो भगवान ही जाने कि इस बार वह कितने हिस्सों में बंट जाएगा।” राजनाथ सिंह ने अपने बयान में 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि करीब 55 साल पहले पाकिस्तान को अपने आक्रामक रवैये की भारी कीमत चुकानी पड़ी थी, जब वह दो हिस्सों में बंट गया था और बांग्लादेश का निर्माण हुआ था।1971 का संदर्भ क्यों अहम1971 का युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच एक निर्णायक सैन्य संघर्ष था। इस युद्ध के परिणामस्वरूप पूर्वी पाकिस्तान अलग होकर बांग्लादेश बना। यह घटना पाकिस्तान के इतिहास की सबसे बड़ी सैन्य और राजनीतिक हार मानी जाती है। राजनाथ सिंह ने इसी ऐतिहासिक संदर्भ को जोड़ते हुए पाकिस्तान को यह संदेश देने की कोशिश की कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगा।‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद बढ़ा तनावहाल के दिनों में भारत द्वारा किए गए सैन्य अभियान “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। भारत के सख्त रुख के चलते पाकिस्तान की ओर से लगातार बयानबाजी देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी घरेलू राजनीति और अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश भी हो सकती है।राजनीतिक मंच से कड़ा संदेशराजनाथ सिंह ने यह बयान एक चुनावी मंच से दिया, लेकिन इसके रणनीतिक मायने भी हैं। पश्चिम बंगाल जैसे संवेदनशील और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में इस तरह का संदेश देना, राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को सीधे जनता से जोड़ने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। उनका यह बयान केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक स्पष्ट चेतावनी के रूप में सामने आया है।भारत का स्पष्ट रुखभारत ने हमेशा से यह कहा है कि वह अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। रक्षा मंत्री का यह बयान भी उसी नीति को दोहराता है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की यह रणनीति है कि वह किसी भी उकसावे का जवाब मजबूत शब्दों और जरूरत पड़ने पर ठोस कार्रवाई से दे।क्षेत्रीय स्थिरता पर असरभारत और पाकिस्तान के बीच इस तरह की बयानबाजी का असर पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता पर पड़ सकता है। दोनों देश परमाणु शक्ति संपन्न हैं, इसलिए किसी भी तरह का तनाव अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बन जाता है। हालांकि, अब तक दोनों देशों के बीच यह टकराव केवल बयानबाजी तक ही सीमित है।
पश्चिम बंगाल के बैरकपुर में एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को सीधी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “अगर पाकिस्तान इस बार बंगाल पर बुरी नजर डालने की कोशिश करता है, तो भगवान ही जाने कि इस बार वह कितने हिस्सों में बंट जाएगा।” राजनाथ सिंह ने अपने बयान में 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि करीब 55 साल पहले पाकिस्तान को अपने आक्रामक रवैये की भारी कीमत चुकानी पड़ी थी, जब वह दो हिस्सों में बंट गया था और बांग्लादेश का निर्माण हुआ था।
1971 का संदर्भ क्यों अहम1971 का युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच एक निर्णायक सैन्य संघर्ष था। इस युद्ध के परिणामस्वरूप पूर्वी पाकिस्तान अलग होकर बांग्लादेश बना। यह घटना पाकिस्तान के इतिहास की सबसे बड़ी सैन्य और राजनीतिक हार मानी जाती है। राजनाथ सिंह ने इसी ऐतिहासिक संदर्भ को जोड़ते हुए पाकिस्तान को यह संदेश देने की कोशिश की कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगा।‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद बढ़ा तनावहाल के दिनों में भारत द्वारा किए गए सैन्य अभियान “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। भारत के सख्त रुख के चलते पाकिस्तान की ओर से लगातार बयानबाजी देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी घरेलू राजनीति और अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश भी हो सकती है।राजनीतिक मंच से कड़ा संदेशराजनाथ सिंह ने यह बयान एक चुनावी मंच से दिया, लेकिन इसके रणनीतिक मायने भी हैं। पश्चिम बंगाल जैसे संवेदनशील और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में इस तरह का संदेश देना, राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को सीधे जनता से जोड़ने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। उनका यह बयान केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक स्पष्ट चेतावनी के रूप में सामने आया है।भारत का स्पष्ट रुखभारत ने हमेशा से यह कहा है कि वह अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। रक्षा मंत्री का यह बयान भी उसी नीति को दोहराता है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की यह रणनीति है कि वह किसी भी उकसावे का जवाब मजबूत शब्दों और जरूरत पड़ने पर ठोस कार्रवाई से दे।क्षेत्रीय स्थिरता पर असरभारत और पाकिस्तान के बीच इस तरह की बयानबाजी का असर पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता पर पड़ सकता है। दोनों देश परमाणु शक्ति संपन्न हैं, इसलिए किसी भी तरह का तनाव अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बन जाता है। हालांकि, अब तक दोनों देशों के बीच यह टकराव केवल बयानबाजी तक ही सीमित है।
हाल के दिनों में भारत द्वारा किए गए सैन्य अभियान “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। भारत के सख्त रुख के चलते पाकिस्तान की ओर से लगातार बयानबाजी देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी घरेलू राजनीति और अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश भी हो सकती है।
राजनीतिक मंच से कड़ा संदेशराजनाथ सिंह ने यह बयान एक चुनावी मंच से दिया, लेकिन इसके रणनीतिक मायने भी हैं। पश्चिम बंगाल जैसे संवेदनशील और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में इस तरह का संदेश देना, राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को सीधे जनता से जोड़ने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। उनका यह बयान केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक स्पष्ट चेतावनी के रूप में सामने आया है।भारत का स्पष्ट रुखभारत ने हमेशा से यह कहा है कि वह अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। रक्षा मंत्री का यह बयान भी उसी नीति को दोहराता है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की यह रणनीति है कि वह किसी भी उकसावे का जवाब मजबूत शब्दों और जरूरत पड़ने पर ठोस कार्रवाई से दे।क्षेत्रीय स्थिरता पर असरभारत और पाकिस्तान के बीच इस तरह की बयानबाजी का असर पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता पर पड़ सकता है। दोनों देश परमाणु शक्ति संपन्न हैं, इसलिए किसी भी तरह का तनाव अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बन जाता है। हालांकि, अब तक दोनों देशों के बीच यह टकराव केवल बयानबाजी तक ही सीमित है।
भारत ने हमेशा से यह कहा है कि वह अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। रक्षा मंत्री का यह बयान भी उसी नीति को दोहराता है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की यह रणनीति है कि वह किसी भी उकसावे का जवाब मजबूत शब्दों और जरूरत पड़ने पर ठोस कार्रवाई से दे।
क्षेत्रीय स्थिरता पर असरभारत और पाकिस्तान के बीच इस तरह की बयानबाजी का असर पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता पर पड़ सकता है। दोनों देश परमाणु शक्ति संपन्न हैं, इसलिए किसी भी तरह का तनाव अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बन जाता है। हालांकि, अब तक दोनों देशों के बीच यह टकराव केवल बयानबाजी तक ही सीमित है।
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