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पश्चिम बंगाल में इमामों और पुरोहितों का वजीफा बंद करने पर सियासत तेज, कांग्रेस का भाजपा पर हमला

भाजपा के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने घोषणा की है कि इस साल जून से धार्मिक नेताओं के लिए सहायता-उन्मुख योजनाएं बंद कर दी जाएंगी

पश्चिम बंगाल में इमामों और पुरोहितों का वजीफा बंद करने पर सियासत तेज, कांग्रेस का भाजपा पर हमला
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नई दिल्ली। भाजपा के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने घोषणा की है कि इस साल जून से धार्मिक नेताओं के लिए सहायता-उन्मुख योजनाएं बंद कर दी जाएंगी। इस घोषणा के एक दिन बाद कांग्रेस ने भाजपा पर चुनावी जीत के बाद राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए अपना रुख बदलने का आरोप लगाया।

यह फैसला राज्य में भाजपा सरकार की दूसरी कैबिनेट बैठक के दौरान लिया गया। इसमें कहा गया कि इमामों और पुरोहितों के लिए धर्म आधारित वजीफा योजनाएं बंद कर दी जाएंगी।

भाजपा सरकार के इस रवैये पर कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा-मोना ने कहा कि मुद्दा यह है कि चुनावों के दौरान केवल राजनीतिक लाभ के लिए बयान देना और फिर चुनावों के बाद उन बयानों या कार्यों को बदलना, राजनीतिक महत्वाकांक्षा का एक स्पष्ट उदाहरण है।

हालांकि उन्होंने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के इस बयान का समर्थन किया कि वह पूरे पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री हैं न कि किसी विशेष वर्ग या समुदाय के। कांग्रेस विधायक ने कहा कि 'इमामों' और 'पुरोहितों' दोनों के लिए वजीफा बंद कर दिया गया है। जब नए मुख्यमंत्री ने शपथ ली तो उन्होंने कहा कि वह पूरे राज्य के मुख्यमंत्री हैं, जो एक अच्छी बात है।

बंगाल कैबिनेट के फैसले का बचाव करते हुए भाजपा नेता टीआर श्रीनिवास ने इसे मुख्यमंत्री अधिकारी द्वारा बहुत ही सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर विज्ञान और प्रौद्योगिकी की तुलना में राज्य के अल्पसंख्यकों के लिए अधिक आवंटन करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि मैं पिछली सरकार के अंतरिम बजट से एक आंकड़ा पेश करना चाहूंगा। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए उन्होंने केवल 155 करोड़ रुपए आवंटित किए थे, जबकि अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के लिए 5,700 करोड़ रुपए। क्या आप इस पर विश्वास कर सकते हैं। अब हमें संदेह हो रहा है कि वह क्या करना चाहती थीं।

टीआर श्रीनिवास ने कहा कि यह नए मुख्यमंत्री द्वारा एक अच्छा कदम है, क्योंकि हम राष्ट्र प्रथम में विश्वास करते हैं।

कोलकाता में जमीयत उलेमा के जिला सचिव मोहम्मद अशरफ अली कासमी ने कहा कि पिछली सरकार ने धार्मिक नेताओं को उनके समुदायों के लिए दी गई सेवाओं का सम्मान करते हुए भत्ते आवंटित किए थे।उन्होंने स्पष्ट किया कि नई भाजपा सरकार द्वारा भत्ता रोकने का फैसला इमामों और पुरोहितों पर कोई असर नहीं डालेगा, क्योंकि वे इस पर निर्भर नहीं थे।

उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने यह फैसला धर्मों के बीच कोई भेदभाव न हो, इस उद्देश्य से लिया है तो मैं इसका समर्थन करता हूं। सरकार का यह फर्ज है कि वह सभी लोगों के लिए काम करे, चाहे उनका धर्म कोई भी हो और मंदिरों या मस्जिदों में क्या हो रहा है, इसकी चिंता करने के बजाय शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा आदि पर काम करे।


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