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लाइसेंस के बिना जानवरों की बिक्री नहीं, कलकत्ता हाई कोर्ट का सख्त निर्देश

कलकत्ता हाई कोर्ट ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल में जरूरी लाइसेंस के बिना जानवरों की बिक्री नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा कि कोलकाता की गैलिफ स्ट्रीट मार्केट और राज्य की दूसरी जगहों पर जानवरों का व्यापार किया जा सकता है, बशर्ते यह वाइल्ड लाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1972 और दूसरे लागू नियमों का पालन करे।

लाइसेंस के बिना जानवरों की बिक्री नहीं, कलकत्ता हाई कोर्ट का सख्त निर्देश
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कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल में जरूरी लाइसेंस के बिना जानवरों की बिक्री नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा कि कोलकाता की गैलिफ स्ट्रीट मार्केट और राज्य की दूसरी जगहों पर जानवरों का व्यापार किया जा सकता है, बशर्ते यह वाइल्ड लाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1972 और दूसरे लागू नियमों का पालन करे।

एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रवींद्र वी. घुगे और जस्टिस ओम नारायण राय की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह यह जांचे कि क्या व्यापारियों के पास जानवरों की बिक्री के लिए वैध लाइसेंस हैं और नियमों का पालन सुनिश्चित होने के बाद ही ऐसे व्यापार की अनुमति दे।

कोर्ट ने सभी पक्षों को इस मामले में 14 अक्टूबर तक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

गैलिफ स्ट्रीट में कारोबार करने वाले व्यापारियों की ओर से पेश वकील ने कहा कि वहां किए जाने वाले कारोबार के लिए लाइसेंस की जरूरत नहीं है और 600 से ज्यादा व्यापारी कई सालों से यह कारोबार कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि जानवरों की किसी भी दुर्लभ प्रजाति को नहीं बेचा जा रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि यह देखने के लिए कि क्या जानवरों का कोई अवैध व्यापार हो रहा है, पुलिसकर्मियों के साथ वन विभाग के अधिकारियों को भी तैनात किया जाए।

राज्य प्रशासन की ओर से वकील सैकत बनर्जी ने कोर्ट को बताया कि किसी भी व्यापारी के पास राज्य पशु कल्याण बोर्ड द्वारा जारी लाइसेंस नहीं है। राज्य के अनुसार, अभी बाजार में काम कर रहे किसी भी व्यापारी के पास ऐसा लाइसेंस नहीं है।

इसके बाद व्यापारियों के वकील ने अगले रविवार को भी व्यापारिक गतिविधियां जारी रखने के लिए अंतरिम अनुमति मांगी। उन्होंने तर्क दिया कि पुलिस की जांच-पड़ताल के कारण व्यापारी अपना कारोबार नहीं कर पा रहे थे और कहा कि सजावटी मछलियों, कुत्तों और पौधों की बिक्री संबंधित कानूनी प्रतिबंधों के दायरे में नहीं आती है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई से बाजार में सभी व्यावसायिक गतिविधियां लगभग ठप हो गई थीं।

दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद हाई कोर्ट ने पाया कि व्यापारियों ने पैदल चलने वालों के रास्तों (फुटपाथ) पर कब्जा कर लिया है, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है। बेंच ने यह भी देखा कि व्यापारी बिना लाइसेंस के काम कर रहे थे और इस बात पर सवाल उठाया कि उन पर कोई रेगुलेटरी निगरानी क्यों नहीं थी।

चीफ जस्टिस रवींद्र वी. घुगे ने इन बातों को ध्यान में रखते हुए आदेश दिया कि सभी व्यापारी जरूरी लाइसेंस लें। उन्होंने यह भी साफ किया कि जरूरी लाइसेंस मिलने के बाद ही पुलिस जानवरों की बिक्री की इजाजत देगी।

इससे पहले, 16 सितंबर को चीफ जस्टिस रवींद्र वी. घुगे और जस्टिस अरिजीत बनर्जी की बेंच ने जानवरों की गैर-कानूनी बिक्री रोकने के लिए राज्य भर में (गैलिफ स्ट्रीट समेत) जानवरों के बाजारों पर कड़ी निगरानी रखने का आदेश दिया था।

कोर्ट ने सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों और राज्य के तय अधिकारियों को मिलकर निगरानी और नियम लागू करने का काम करने का निर्देश दिया था।


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