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पश्चिम बंगाल में एनआईए का राजनीतिक इस्तेमाल न हो, निष्पक्ष जांच जरूरी: नौशाद सिद्दीकी

इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के विधायक नौशाद सिद्दीकी ने पश्चिम बंगाल में खुले पहले एनआईए पुलिस स्टेशन, तृणमूल कांग्रेस से जुड़े विवादों, बारुईपुर मुठभेड़ मामले से लेकर अभिषेक बनर्जी को मिली अंतरिम सुरक्षा समेत कई अहम मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी

पश्चिम बंगाल में एनआईए का राजनीतिक इस्तेमाल न हो, निष्पक्ष जांच जरूरी: नौशाद सिद्दीकी
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कोलकाता। इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के विधायक नौशाद सिद्दीकी ने पश्चिम बंगाल में खुले पहले एनआईए पुलिस स्टेशन, तृणमूल कांग्रेस से जुड़े विवादों, बारुईपुर मुठभेड़ मामले से लेकर अभिषेक बनर्जी को मिली अंतरिम सुरक्षा समेत कई अहम मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि देश की प्रमुख जांच एजेंसी एनआईए का राजनीतिक इस्तेमाल नहीं होना चाहिए और शिक्षा सुधार केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे को मजबूत करने से संभव होंगे।

पश्चिम बंगाल के न्यू टाउन में राज्य का पहला एनआईए पुलिस स्टेशन शुरू होने पर नौशाद सिद्दीकी ने कहा कि पूरे देश में अब एनआईए के थानों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी देश की सबसे महत्वपूर्ण जांच एजेंसियों में से एक है और नए थाने के खुलने से घबराने की कोई जरूरत नहीं है। हालांकि, उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि एनआईए का इस्तेमाल किसी भी राजनीतिक उद्देश्य के लिए नहीं होना चाहिए। यदि इतनी बड़ी एजेंसी राजनीतिक प्रेरणा से कार्रवाई करेगी तो उसकी विश्वसनीयता प्रभावित होगी। पहले भी सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप लगते रहे हैं, जिससे उनकी साख और सफलता दर पर सवाल उठे हैं। एनआईए को निष्पक्ष और पेशेवर तरीके से काम करना चाहिए ताकि उसकी विश्वसनीयता बनी रहे।

पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा चुनाव आयोग को पत्र लिखकर असली तृणमूल से जुड़े मामले की जांच जल्द पूरी करने की मांग पर नौशाद सिद्दीकी ने कहा कि इस मुद्दे पर काफी चर्चा हो रही है। जो नेता कभी ममता बनर्जी की तस्वीर और उनके नाम के सहारे चुनाव जीतकर आए थे, वही आज उनके खिलाफ बयान दे रहे हैं। उन्होंने ममता बनर्जी की नीतियों की पहले भी आलोचना की है और आगे भी करेंगे, लेकिन उनका मानना है कि पूरे बंगाल और देश के लोग जानते हैं कि टीएमसी के साथ वास्तव में कौन लोग जुड़े हैं। जो लोग पार्टी छोड़कर इधर-उधर जा रहे हैं, उनमें से कई भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोपों से बचने की कोशिश कर रहे हैं।

बारुईपुर मुठभेड़ मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाने और हलफनामा व रिपोर्ट तलब किए जाने पर नौशाद सिद्दीकी ने कहा कि यदि अदालत ने घटना के पुनर्निर्माण और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं तो इसकी जांच होनी ही चाहिए। उनका दल कानून-व्यवस्था का सम्मान करता है, लेकिन पश्चिम बंगाल को पुलिस स्टेट बनाने की किसी भी कोशिश का विरोध करेगा। पुलिस बल का सम्मान किया जाना चाहिए और उनकी कार्य परिस्थितियों में सुधार की आवश्यकता है।

सिद्दीकी ने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में पुलिस पद खाली हैं, जिन्हें जल्द भरा जाना चाहिए। उन्होंने पुलिसकर्मियों से 14 से 16 घंटे तक ड्यूटी कराए जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने महिला पुलिसकर्मियों के लिए बैरक और थानों में बेहतर आवासीय सुविधाओं की मांग की। साथ ही, दावा किया कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल पुलिस के पास आधुनिक हथियारों की लगभग 71 प्रतिशत कमी है। इन मूलभूत समस्याओं को दूर किए बिना पुलिस व्यवस्था को मजबूत नहीं किया जा सकता। अब यह मामला अदालत में है और न्यायालय के निर्देशों का पालन सभी को करना होगा।

टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को तीन मामलों में मिली अंतरिम सुरक्षा पर नौशाद सिद्दीकी ने कहा कि उन्होंने पहले भी कहा था कि चाहे अभिषेक बनर्जी हों या ममता बनर्जी, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप लगातार चलते रहते हैं। चुनाव के बाद कई मामलों में फर्जी हस्ताक्षरों और सीआईडी जांच की बातें उठाई गईं, लेकिन बाद में उन मामलों पर चर्चा बंद हो गई। समय-समय पर नए राजनीतिक मुद्दे सामने लाए जाते हैं और पुराने मामलों को भुला दिया जाता है। उन्होंने विपक्ष द्वारा अभिषेक बनर्जी की गिरफ्तारी को लेकर किए गए दावों पर भी तंज कसते हुए कहा कि लगातार गिरफ्तारी की बातें कही गईं, लेकिन अब तक ऐसा कुछ नहीं हुआ।

नई शिक्षा नीति (एनईपी) पर आधारित पाठ्यक्रम में प्रस्तावित बदलावों पर नौशाद सिद्दीकी ने कहा कि उनकी पार्टी एनईपी के कई प्रावधानों का पहले से विरोध करती रही है। केवल एनईपी लागू करने की घोषणा कर देने से शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं होगा। इसके लिए सरकार को पहले नीति में निर्धारित सभी आवश्यक मानकों को पूरा करना चाहिए। स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति, शिक्षक-छात्र अनुपात में सुधार, स्कूलों के बुनियादी ढांचे का विकास, डिजिटल क्लासरूम की व्यवस्था और छात्रों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। इन तैयारियों के बिना नई शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करना संभव नहीं है।


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