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ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र, एसआईआर में गंभीर अनियमितताओं का आरोप

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखा है और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान गंभीर अनियमितताओं, प्रक्रिया के उल्लंघन और प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाते हुए चिंता व्यक्त की है

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र, एसआईआर में गंभीर अनियमितताओं का आरोप
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लोकतंत्र की नींव पर खतरा, प्रक्रिया को बताया जल्दबाजी और त्रुटिपूर्ण

  • आईटी सिस्टम के दुरुपयोग से मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप
  • व्हाट्सएप संदेशों से निर्देश जारी करने पर सीएम ने उठाए सवाल
  • पात्र मतदाताओं के अधिकार छिनने की आशंका, प्रक्रिया रोकने की मांग

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखा है और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान गंभीर अनियमितताओं, प्रक्रिया के उल्लंघन और प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाते हुए चिंता व्यक्त की है।

उन्होंने पत्र में कहा कि मैंने पहले भी पत्र लिखकर बताया था कि यह अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया हमारे लोकतंत्र की नींव है। इसे बिना किसी ठोस योजना, तैयारी और स्पष्ट दिशा के जल्दबाजी में किया जा रहा है। दुर्भाग्य से, हालात सुधरने के बजाय और अधिक खराब हो गए हैं।

उन्होंने कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चुनाव आयोग इस बात को लेकर स्पष्ट नहीं दिखता कि एसआईआर का उद्देश्य क्या है, इसे कैसे लागू किया जाना है, और इसका अंतिम लक्ष्य क्या है। अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नियम अपनाए जा रहे हैं और समय-सीमाएं मनमाने ढंग से बदली जा रही हैं। यह तैयारी और समझ की भारी कमी को दर्शाता है।

सीएम ममता ने लिखा कि हैरानी की बात यह है कि महत्वपूर्ण निर्देश लगभग रोजाना, वह भी व्हाट्सएप और टेक्स्ट मैसेज जैसे अनौपचारिक माध्यमों से दिए जा रहे हैं। इतनी बड़ी और संवैधानिक रूप से महत्वपूर्ण प्रक्रिया के लिए जरूरी लिखित आदेश, अधिसूचना या परिपत्र जारी ही नहीं किए जा रहे हैं। इस तरह की मनमानी और अनौपचारिकता से न तो पारदर्शिता रह जाती है और न ही जवाबदेही। इस प्रक्रिया में कोई भी गलती या अस्पष्टता वास्तविक मतदाताओं के नाम हटने का कारण बन सकती है, जो किसी भी संवैधानिक लोकतंत्र में पूरी तरह अस्वीकार्य है।

उन्होंने यह भी लिखा है कि आईटी सिस्टम के दुरुपयोग के जरिए बैकएंड से मतदाताओं के नाम हटाए जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। यह गंभीर सवाल उठाता है कि ऐसे कदम किसके आदेश पर और किस कानूनी अधिकार के तहत उठाए गए हैं। यह भी जानकारी मिली है कि फैमिली रजिस्टर को पश्चिम बंगाल में व्हाट्सएप संदेश के जरिए अमान्य बताया जा रहा है। पहले मान्य दस्तावेज को इस तरह अचानक और बिना कारण के खारिज करना भेदभाव और मनमानी को दर्शाता है।

सीएम ममता का कहना है कि जिला निर्वाचन अधिकारियों को अनौपचारिक रूप से बताया गया है कि राज्य सरकार द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाण पत्र या डोमिसाइल सर्टिफिकेट को पहचान के प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। दूसरे राज्यों में गए प्रवासी मजदूरों को भी उपस्थित होने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इस तरह की कार्यप्रणाली न केवल गलत है, बल्कि लोकतंत्र और कानून के शासन की मूल भावना के भी खिलाफ है। यह प्रक्रिया बिहार और अन्य राज्यों में वर्तमान एसआईआर के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया से पूरी तरह अलग है।

उन्होंने कहा कि इस तरह की अंतर-जिला या अंतर-राज्य जांच तय समय-सीमा में पूरी हो पाना कई मामलों में संभव नहीं होगा। इसका नतीजा यह होगा कि असली और पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे और वे मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं।

सीएम ने आरोप लगाया कि लोगों में बेवजह डर और तनाव पैदा हो रहा है। बुजुर्ग, अस्वस्थ और गंभीर रूप से बीमार नागरिकों को भी नहीं छोड़ा जा रहा है। इससे आम लोगों को भारी परेशानी हो रही है। आयोग जमीनी हकीकतों के प्रति पूरी तरह असंवेदनशील दिखाई दे रहा है। पर्यवेक्षकों (ऑब्जर्वर) की नियुक्ति भी राज्य सरकार द्वारा भेजे गए अधिकारियों की सूची की पूरी तरह अनदेखी करके की जा रही है।

सीएम ने मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखे पत्र में कहा है कि ये मामले केवल उदाहरण हैं, पूरी सूची नहीं हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि जिस तरह से एसआईआर प्रक्रिया इस समय चलाई जा रही है, वह गंभीर रूप से प्रभावित और त्रुटिपूर्ण है। यह हमारे लोकतंत्र की बुनियादी संरचना और संविधान की भावना पर सीधा प्रहार करती है।

सीएम ने आग्रह किया है कि खामियों को तुरंत दूर किया जाए, त्रुटियों को सुधारा जाए, और आवश्यक सुधार किए जाएं। यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो इस अव्यवस्थित, मनमानी, और बिना योजना वाली प्रक्रिया को तुरंत रोका जाना चाहिए। वर्तमान स्वरूप में यदि यह प्रक्रिया जारी रहती है, तो इससे अपूरणीय क्षति होगी, बड़ी संख्या में पात्र मतदाता अपने अधिकार से वंचित हो जाएंगे, और यह लोकतांत्रिक शासन की मूलभूत अवधारणाओं पर सीधा हमला होगा।


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