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TMC के 'पुष्पा' पर कसा शिकंजा... जहांगीर खान को बंगाल STF ने किया गिरफ्तार

जहांगीर खान को तृणमूल कांग्रेस के प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता रहा है। राजनीतिक गलियारों में उन्हें टीएमसी सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता है। दक्षिण 24 परगना जिले और विशेष रूप से फाल्टा क्षेत्र में उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ मानी जाती थी।

TMC के पुष्पा पर कसा शिकंजा... जहांगीर खान को बंगाल STF ने किया गिरफ्तार
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चर्चित नेता जहांगीर खान को नेपाल से गिरफ्तार कर लिया। लंबे समय से फरार चल रहे जहांगीर की तलाश में सुरक्षा एजेंसियां लगातार जुटी हुई थीं। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह पश्चिम बंगाल-नेपाल सीमा पार कर नेपाल पहुंच गया था और वहीं छिपकर रह रहा था। सूत्रों के मुताबिक, जहांगीर खान ने नेपाल में अपनी पहचान छिपाने की कोशिश की थी और पशुपतिनाथ मार्केट के रास्ते सीमा पार कर फरार हुआ था। STF को एक विश्वसनीय सूचना मिली, जिसके आधार पर कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार किया गया। अब उसे पश्चिम बंगाल लाने और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी की जा रही है।

टीएमसी में प्रभावशाली नेता के रूप में पहचान

जहांगीर खान को तृणमूल कांग्रेस के प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता रहा है। राजनीतिक गलियारों में उन्हें टीएमसी सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता है। दक्षिण 24 परगना जिले और विशेष रूप से फाल्टा क्षेत्र में उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ मानी जाती थी। पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण जहांगीर खान कई बार सुर्खियों में रहे। हालांकि हाल के वर्षों में उनका नाम कई विवादों से भी जुड़ा, जिससे उनकी राजनीतिक छवि पर असर पड़ा।

फाल्टा विधानसभा चुनाव से मिली थी बड़ी पहचान

जहांगीर खान उस समय राज्यभर में चर्चा का विषय बने थे जब उन्हें फाल्टा विधानसभा सीट से टीएमसी का उम्मीदवार बनाया गया था। चुनाव के दौरान यह सीट काफी विवादों में रही। मतदान प्रक्रिया को लेकर शिकायतों और कथित गड़बड़ियों के बाद यहां पुनर्मतदान कराया गया था। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, चुनावी माहौल में बढ़ते विवाद और प्रशासनिक सख्ती के बीच जहांगीर खान ने दोबारा हुए मतदान में सक्रिय भूमिका नहीं निभाई और अंततः चुनावी मुकाबले से दूरी बना ली। इसके बावजूद उनका नाम लगातार चर्चा में बना रहा।

‘पुष्पा’ स्टाइल ने बनाया था राजनीतिक ब्रांड

जहांगीर खान की सबसे बड़ी पहचान उनकी बनाई गई ‘पुष्पा’ छवि रही। उन्होंने दक्षिण भारतीय सुपरहिट फिल्म पुष्पा के मुख्य किरदार से प्रेरित होकर खुद को एक ऐसे नेता के रूप में पेश करने की कोशिश की, जो किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। चुनावी सभाओं और सार्वजनिक कार्यक्रमों में वह अक्सर फिल्म का लोकप्रिय संवाद “पुष्पा झुकेगा नहीं” दोहराते थे। समर्थकों के बीच भी उनकी यही छवि प्रचारित की गई। यही कारण था कि राजनीतिक और मीडिया जगत में उन्हें धीरे-धीरे “टीएमसी का पुष्पा” कहा जाने लगा।

IPS अजयपाल शर्मा से जुड़ी बयानबाजी बनी थी सुर्खियां

चुनाव के दौरान जहांगीर खान और उत्तर प्रदेश के चर्चित आईपीएस अधिकारी अजयपाल शर्मा के बीच जुड़ी बयानबाजी ने भी काफी सुर्खियां बटोरी थीं। उस समय अजयपाल शर्मा चुनावी प्रक्रिया की निगरानी से जुड़े दायित्व निभा रहे थे। जहांगीर खान ने सार्वजनिक मंचों से कहा था कि अगर अजयपाल शर्मा ‘सिंघम’ हैं, तो वह ‘पुष्पा’ हैं और किसी दबाव में नहीं आएंगे। उनका यह बयान सोशल मीडिया और समाचार चैनलों पर काफी चर्चा का विषय बना था। राजनीतिक विरोधियों ने इसे प्रशासन को चुनौती देने वाला बयान बताया था, जबकि समर्थकों ने इसे उनके आत्मविश्वास का प्रतीक बताया।

‘डायमंड हार्बर मॉडल’ की राजनीति में भी रहा नाम

पश्चिम बंगाल की राजनीति में चर्चित ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ के संदर्भ में भी जहांगीर खान का नाम कई बार सामने आया। इस मॉडल को टीएमसी के संगठनात्मक विस्तार और क्षेत्रीय विकास से जोड़कर देखा जाता है। अभिषेक बनर्जी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में जहांगीर खान को एक सक्रिय और प्रभावशाली स्थानीय नेता माना जाता था। हालांकि समय के साथ उनके खिलाफ बढ़ती जांच और विवादों ने उनकी राजनीतिक स्थिति को कमजोर किया। फरारी और बाद में नेपाल से गिरफ्तारी ने उनकी राजनीतिक यात्रा को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है।


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