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पुराने केसों के निपटारे में तेजी लाएगी कोलकाता पुलिस, 360 मामलों की निगरानी के लिए बनाएगी ‘ट्रायल मॉनिटरिंग ऐप’

पुराने आपराधिक मामलों की सुनवाई में हो रही देरी को कम करने और मुकदमों की प्रगति पर नजर रखने के लिए कोलकाता पुलिस एक विशेष ‘ट्रायल मॉनिटरिंग ऐप’ तैयार कर रही है

पुराने केसों के निपटारे में तेजी लाएगी कोलकाता पुलिस, 360 मामलों की निगरानी के लिए बनाएगी ‘ट्रायल मॉनिटरिंग ऐप’
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कोलकाता। पुराने आपराधिक मामलों की सुनवाई में हो रही देरी को कम करने और मुकदमों की प्रगति पर नजर रखने के लिए कोलकाता पुलिस एक विशेष ‘ट्रायल मॉनिटरिंग ऐप’ तैयार कर रही है। इस ऐप के जरिए लंबित मामलों की स्थिति, सुनवाई की प्रगति और अदालतों में चल रही प्रक्रिया की डिजिटल निगरानी की जाएगी।

कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि शुरुआती चरण में करीब 360 पुराने विचाराधीन मामलों को इस ऐप के माध्यम से मॉनिटर किया जाएगा। इन मामलों में कई महत्वपूर्ण केस शामिल हैं, जिनका निपटारा लंबे समय से नहीं हो पाया है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, किसी अपराध के बाद आरोपी को गिरफ्तार करना जांच प्रक्रिया का पहला चरण होता है, लेकिन पुलिस की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि दोषियों को अदालत से सजा मिले। इसी उद्देश्य से कोलकाता पुलिस मुख्यालय लालबाजार के इंटेलिजेंस विभाग में ‘ट्रायल मॉनिटरिंग सेल’ का गठन किया गया है।

इस सेल ने ऐसे पुराने मामलों की पहचान की है, जिनमें सुनवाई धीमी गति से चल रही है। इनमें कुछ मामले ऐसे भी हैं, जो पहले पश्चिम बंगाल पुलिस के अधीन थे, लेकिन अदालत के निर्देश के बाद उनकी जिम्मेदारी कोलकाता पुलिस को सौंप दी गई है।

चयनित मामलों में वर्ष 2010 का पार्क स्ट्रीट आग हादसा मामला और वर्ष 2011 में धाकुरिया के एक निजी अस्पताल में आग लगने से 89 मरीजों की मौत का मामला भी शामिल है। इसके अलावा शहर के विभिन्न थानों से जुड़े कई अन्य गंभीर मामले भी इस सूची में हैं।

पुलिस के अनुसार, कई मामलों में सुनवाई में देरी के पीछे कई कारण सामने आए हैं। इनमें जांच अधिकारियों का रिटायर होना या उनका तबादला होना, गवाहों का समय पर अदालत में पेश नहीं होना और आरोपियों की अनुपस्थिति जैसी समस्याएं शामिल हैं।

कई मामलों में मुकदमे की शुरुआत से पहले आरोप तय करने की प्रक्रिया भी लंबित है, क्योंकि सभी आरोपी एक साथ अदालत में उपस्थित नहीं हो पाते। इसके चलते कई पुराने मामले वर्षों तक खिंचते रहते हैं।

लालबाजार पुलिस के सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित ‘ट्रायल मॉनिटरिंग ऐप’ में सभी लंबित मामलों की विस्तृत जानकारी दर्ज होगी। पुलिस अधिकारियों, जांच अधिकारियों, ट्रायल मॉनिटरिंग सेल के सदस्यों, सरकारी वकीलों और संबंधित अधिकारियों को इस ऐप की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

ऐप पर किसी भी केस की स्थिति तुरंत देखी जा सकेगी। इसमें यह जानकारी उपलब्ध होगी कि किसी मामले में कितने गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं, कितने गवाहों की गवाही बाकी है, कितने आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और कितने जमानत पर बाहर हैं। इसके अलावा अब तक हुई सुनवाई और अगली तारीख की जानकारी भी ऐप पर उपलब्ध होगी।

कोलकाता पुलिस का ट्रायल मॉनिटरिंग सेल फिलहाल धीमी गति से चल रहे मामलों की समीक्षा कर रहा है। अधिकारी जांच अधिकारियों और सरकारी वकीलों के साथ बैठक कर देरी के कारणों का पता लगा रहे हैं और उनके समाधान के लिए कदम उठा रहे हैं।

पुलिस का कहना है कि इस डिजिटल पहल का उद्देश्य केवल मामलों की निगरानी करना नहीं, बल्कि न्याय प्रक्रिया को तेज करना और अपराधियों को जल्द से जल्द कानून के दायरे में लाना है। अधिकारियों के मुताबिक, ऐप के लागू होने के बाद पुराने मामलों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पारदर्शी हो सकेगी।


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