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'12 घंटे हिरासत में रखा, फोन छीन लिया, अब विधानसभा नहीं जाऊंगा', गिरफ्तारी के बाद हुमायूं कबीर का फूटा गुस्सा

उपचुनाव के दौरान 12 घंटे तक हिरासत में रखे जाने के बाद विधायक हुमायूं कबीर ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस आम लोगों पर जुल्म कर रही है, झूठे केसों में फंसा रही है और लूटपाट कर रही है, जिसका वह विरोध नहीं कर पाए। इसके विरोध में उन्होंने विधानसभा और उसकी कमेटियों की बैठकों से दूर रहने का ऐलान किया और रेजिनगर की जनता से माफी मांगी। साथ ही पुलिस की ओर से किए गए बर्ताव का भी जिक्र किया।

12 घंटे हिरासत में रखा, फोन छीन लिया, अब विधानसभा नहीं जाऊंगा, गिरफ्तारी के बाद हुमायूं कबीर का फूटा गुस्सा
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मुर्शीदाबाद। उपचुनाव के दौरान 12 घंटे तक हिरासत में रखे जाने के बाद विधायक हुमायूं कबीर ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस आम लोगों पर जुल्म कर रही है, झूठे केसों में फंसा रही है और लूटपाट कर रही है, जिसका वह विरोध नहीं कर पाए। इसके विरोध में उन्होंने विधानसभा और उसकी कमेटियों की बैठकों से दूर रहने का ऐलान किया और रेजिनगर की जनता से माफी मांगी। साथ ही पुलिस की ओर से किए गए बर्ताव का भी जिक्र किया।

विधायक हुमायूं कबीर ने कहा, "पुलिस वाला जो मुझे रात 8 बजे ले गया, वहां से लेकर जाकर मेरा फोन ले लिया और मुझे एक अलग घर में बैठाकर रखा। उस घर में मैं बैठा था, मैंने सहयोग किया। उन्होंने मेरे साथ कोई टिप्पणी नहीं की।

उन्होंने कहा कि आखिर में रिलीज होने के समय फिर उन्होंने कहा कि जुबान संभाल कर चलनी चाहिए। तो कोई पुलिस वाला मुझे बताएगा कि मैं जुबान से क्या बोलूंगा और क्या नहीं बोलूंगा, वह मैं नहीं मानूंगा। पुलिस लोगों पर अत्याचार कर रही है, जुल्म कर रही है, झूठे मामले देकर उन्हें पकड़ रही है, उनके घर में घुसकर उनकी मां-बहन की इज्जत लेने की कोशिश कर रही है। उनकी बात सुनकर मैं कभी नहीं चलूंगा।

विधायक हुमायूं कबीर ने आगे कहा कि इसलिए मैंने उनसे कहा कि ठीक है, कोशिश करूंगा, लेकिन रेजिनगर थाने का ओसी मेरे सामने नहीं आया। वह मुझे छोड़कर फिर चला गया। एक इंस्पेक्टर और एक सब-इंस्पेक्टर गोपाल सरकार भी थे, उन्होंने भी मेरे साथ कोई गलत बात नहीं की, अच्छे तरीके से बात की। बार-बार पूछा कि क्या जरूरत है, क्या खाएंगे, क्या खाना आएगा, सब कुछ किया। कोई बदतमीजी नहीं की। पुलिस वालों ने अंदर जो 12 घंटे रखा, इज्जत से बात की। किसी ने मेरे साथ कोई बदसलूकी नहीं की, कोई गलत बात भी नहीं की।

राजनीति छोड़ने की अटकलों के बीच उन्होंने कहा कि मैंने राजनीति अभी छोड़ी नहीं है, लेकिन निर्णय नहीं लिया है। मुख्यमंत्री और राज्य के मंत्रियों को बताना चाहता हूं कि दो महीने से पुलिस आम आदमी पर जबरदस्ती कर रही है। मंगलवार को उपचुनाव था, उसी समय से पुलिस ने आम आदमी के साथ जो बदतमीजी की, वोटरों के साथ जो किया, वह बर्दाश्त नहीं हो रहा है। लेकिन मैं इसका प्रतिकार नहीं कर पाया, इसके लिए रेजिनगर के जो आम आदमी हैं, वोटर हैं, उनसे माफी मांगता हूं।

उन्होंने कहा कि मैं पुलिस की जबरदस्ती के खिलाफ कुछ नहीं कर पाया। मुझे बंद करके 12 घंटे रखा गया, इसीलिए कल जो पुलिस वालों ने लूटपाट की, लोगों के सर्टिफिकेट छीन लिए, उसके विरोध में मैं विधानसभा से दूर रहूंगा। मैं विधानसभा का सदस्य रहूंगा, लेकिन विधानसभा नहीं जाऊंगा, न ही किसी कमेटी की मीटिंग में शामिल होऊंगा, विधानसभा के किसी प्रोग्राम में नहीं जाऊंगा। जब अगला सत्र होगा, असेंबली शुरू होगी, उस समय देखेंगे, जब विधानसभा में मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे तब जाऊंगा, फिर वापस आ जाऊंगा।


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