Top
Begin typing your search above and press return to search.

ताश के पत्तों की तरह बिखर रही टीएमसी, सांसद सयानी घोष भी हुईं बागी

सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में टीएमसी के करीब 20 सांसद अलग रुख अपनाने की तैयारी में हैं। चर्चाओं में सयानी घोष और वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय का नाम भी सामने आ रहा है।

ताश के पत्तों की तरह बिखर रही टीएमसी, सांसद सयानी घोष भी हुईं बागी
X

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर बढ़ती असंतोष की खबरों ने नया मोड़ ले लिया है। पार्टी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी नेताओं के बीच मतभेद की चर्चाओं के बीच अब जादवपुर से सांसद और टीएमसी की प्रमुख नेता सयानी घोष के भी बागी खेमे से जुड़ने की अटकलें तेज हो गई हैं।

20 सांसदों के अलग रुख की चर्चा

सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में टीएमसी के करीब 20 सांसद अलग रुख अपनाने की तैयारी में हैं। चर्चाओं में सयानी घोष और वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय का नाम भी सामने आ रहा है। लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं, ऐसे में यदि इतनी बड़ी संख्या में सांसद अलग होते हैं तो यह पार्टी के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।

सरकार की कार्रवाई पर उठाए थे सवाल

दो दिन पहले ही सयानी घोष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पश्चिम बंगाल सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए थे। जादवपुर स्टेशन रोड पर कथित बुलडोजर कार्रवाई की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा था कि बिना पूर्व सूचना के फेरीवालों को हटाना अन्यायपूर्ण है और पुनर्वास को लेकर सरकार की चुप्पी गरीबों और हाशिए पर रहने वाले लोगों के प्रति उसके रवैये पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उनके इस बयान को पार्टी के भीतर असहमति के संकेत के तौर पर देखा गया।

वफादारी का दिया था संदेश

सयानी घोष इससे पहले सार्वजनिक रूप से ममता बनर्जी के प्रति अपनी निष्ठा जाहिर कर चुकी हैं। आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता राघव चड्ढा के भाजपा में शामिल होने की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा था, "मेरे नाम में चड्ढा नहीं है। चड्ढा चड्डी बन सकता है, लेकिन घोष हमेशा घोष रहेगा।" उस वक्त उनके बयान को ममता बनर्जी के प्रति समर्थन के रूप में देखा गया था।

निष्कासन के बाद तेज हुई बगावत की चर्चा

टीएमसी में असंतोष की चर्चा ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के निष्कासन के बाद तेज हुई। पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में दोनों नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया गया था। इसके बाद पार्टी के भीतर अलग राय रखने वाले नेताओं की संख्या बढ़ने की बातें सामने आने लगीं।

भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक की चर्चा

सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में वरिष्ठ सांसद काकोली घोष के नेतृत्व में कुछ टीएमसी सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक की। इस बैठक में पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के मौजूद रहने की भी चर्चा है। बताया जा रहा है कि इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को 20 सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र सौंपा गया, जिसमें अलग गुट बनाने का दावा किया गया।

राज्यसभा से दो इस्तीफों ने बढ़ाई चिंता

8 जून को राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 10 जून को सुष्मिता देव ने भी टीएमसी छोड़ने का ऐलान किया। सुष्मिता देव ने इस्तीफे के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा से मुलाकात की। लगातार हो रहे इन घटनाक्रमों ने टीएमसी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि और राजनीतिक अनिश्चितता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it