हुमायूं कबीर का राजनीति से संन्यास का ऐलान, बोले- शुभेंदु अधिकारी CM रहे तो विधानसभा नहीं जाऊंगा
हुमायूं कबीर इससे पहले भी अपने बयानों और राजनीतिक गतिविधियों के कारण सुर्खियों में रहे हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने बंगाल में ‘बाबरी मस्जिद’ बनाने की घोषणा की थी, जिसके बाद राज्य की राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी।

मुर्शिदाबाद। पश्चिम बंगाल की रेजीनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के मतदान के एक दिन बाद आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर ने राजनीति से स्वैच्छिक संन्यास लेने का संकेत देकर राज्य की सियासत में हलचल बढ़ा दी है। मीडिया से बातचीत के दौरान भावुक हुए कबीर ने कहा कि वह अपनी 64 साल की उम्र में राजनीतिक जीवन से विदाई लेने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि अगर भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बने रहते हैं तो वह विधानसभा की दहलीज तक नहीं जाएंगे।
‘राजनीति से मेरा मोहभंग हो गया है’
हुमायूं कबीर ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह नौदा में लोगों की बैठक बुलाएंगे और उनसे माफी मांगेंगे। उन्होंने कहा कि राजनीतिक व्यवस्था और उनके साथ हुए व्यवहार ने उन्हें निराश किया है। कबीर के मुताबिक, वह जनता की राय को अपने फैसले का आधार बनाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उनसे राजनीति छोड़ने के लिए कहते हैं और उन्हें इसकी अनुमति देते हैं, तो वह नौदा के विधायक पद से भी इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। कबीर ने कहा कि वह इस संबंध में जनता के सामने अपना पक्ष रखेंगे।
शुभेंदु अधिकारी को लेकर बड़ा बयान
मीडिया से बातचीत में कबीर ने भावुक होते हुए कहा कि यदि शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद पर बने रहते हैं तो वह विधानसभा नहीं जाएंगे। उन्होंने नौदा की जनता से अपने इस फैसले के लिए माफी मांगने की बात भी कही। कबीर ने रेजीनगर उपचुनाव के नतीजों को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि इस मुस्लिम-बहुल सीट पर भाजपा भारी मतों से जीत सकती है। हालांकि, उन्होंने इस संभावित जीत को जनता का वास्तविक जनादेश मानने से इनकार किया। उनका आरोप है कि पुलिस और प्रशासन के जरिए सत्तारूढ़ दल ने चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया।
Promised to build Babri Masjid in Murshidabad few months back.
Has decided to quit politics now. ☠️ https://t.co/UlRbRCIUJ1
— Upamanyu Bhattacharya (@upamanyu95) October 7, 2026
मतदान के बाद पुलिस से भिड़ गए थे कबीर
हुमायूं कबीर का यह बयान उस घटना के ठीक एक दिन बाद आया है, जब रेजीनगर में मतदान के दौरान उनकी पुलिस से झड़प हो गई थी। पार्टी कार्यालय के बाहर हुए विवाद के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। उन पर पुलिस के साथ अभद्र व्यवहार करने, मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश करने और भड़काऊ बयान देने के आरोप लगाए गए थे। करीब 12 घंटे हिरासत में रहने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। इस घटना ने रेजीनगर उपचुनाव को मतदान के बाद भी राजनीतिक रूप से बेहद चर्चित बना दिया है।
बेटे की किस्मत भी दांव पर
रेजीनगर सीट पर हुमायूं कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद AJUP के उम्मीदवार हैं। ऐसे में उपचुनाव का परिणाम कबीर के राजनीतिक भविष्य के साथ-साथ उनके परिवार की राजनीतिक पकड़ के लिए भी अहम माना जा रहा है। रेजीनगर मुस्लिम-बहुल निर्वाचन क्षेत्र है और कबीर यहां पहले भी मजबूत राजनीतिक उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। उपचुनाव के दौरान उनके लगातार सक्रिय रहने के कारण यह सीट राज्य की सबसे चर्चित सीटों में शामिल रही।
दो सीटों पर जीत के बाद छोड़ी थी रेजीनगर सीट
हुमायूं कबीर पिछले विधानसभा चुनाव में नौदा और रेजीनगर, दोनों सीटों से चुनाव जीते थे। नियमों के तहत उन्हें एक सीट छोड़नी थी, जिसके बाद रेजीनगर विधानसभा सीट खाली हुई और यहां उपचुनाव कराया गया। इस चुनाव में उनके बेटे गुलाम नबी आजाद के मैदान में उतरने से मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया। हालांकि मतदान के दौरान कबीर के विवाद में घिरने के बाद चुनावी चर्चा का केंद्र उम्मीदवारों से हटकर उनकी राजनीतिक भूमिका पर आ गया।
‘बाबरी मस्जिद’ के बयान से भी आए थे चर्चा में
हुमायूं कबीर इससे पहले भी अपने बयानों और राजनीतिक गतिविधियों के कारण सुर्खियों में रहे हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने बंगाल में ‘बाबरी मस्जिद’ बनाने की घोषणा की थी, जिसके बाद राज्य की राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। इसके बाद विधानसभा चुनाव में उनका प्रदर्शन चौंकाने वाला रहा और उन्होंने दो सीटों से जीत दर्ज की। अब रेजीनगर उपचुनाव के बाद उनके राजनीति से संन्यास लेने के संकेत ने बंगाल की राजनीति में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कबीर वास्तव में सक्रिय राजनीति से दूरी बना लेंगे या जनता की राय के आधार पर अपना फैसला बदलेंगे।


