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बंगाल में ‘घाटल मास्टर प्लान’ को मिली रफ्तार, केंद्र के साथ मिलकर लागू करेगी राज्य सरकार

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई भाजपा सरकार ने सोमवार को राज्य की महत्वपूर्ण बाढ़ नियंत्रण और ड्रेनेज परियोजना ‘घाटल मास्टर प्लान’ को केंद्र सरकार के साथ मिलकर लागू करने का सैद्धांतिक फैसला लिया

बंगाल में ‘घाटल मास्टर प्लान’ को मिली रफ्तार, केंद्र के साथ मिलकर लागू करेगी राज्य सरकार
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई भाजपा सरकार ने सोमवार को राज्य की महत्वपूर्ण बाढ़ नियंत्रण और ड्रेनेज परियोजना ‘घाटल मास्टर प्लान’ को केंद्र सरकार के साथ मिलकर लागू करने का सैद्धांतिक फैसला लिया। इस परियोजना का खर्च केंद्र और राज्य सरकार बराबर-बराबर साझा करेंगे।

यह परियोजना लंबे समय से इसलिए अटकी हुई थी क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार इसे केंद्र सरकार के साथ संयुक्त रूप से लागू करने को तैयार नहीं थी।

अब राज्य में “डबल इंजन” सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय ‘नबान्ना’ में हुई अहम बैठक में इस मुद्दे पर सहमति बन गई। बैठक में सभी विभागों के सचिव मौजूद रहे।

बैठक में मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग को निर्देश दिया कि राज्य सरकार को इस परियोजना में कितना खर्च वहन करना होगा, इसका आकलन जल्द किया जाए। साथ ही केंद्र सरकार के साथ समझौते का मसौदा भी जल्द तैयार करने को कहा गया।

माना जा रहा है कि इस परियोजना के लागू होने से दक्षिण बंगाल के बड़े हिस्सों, खासकर पश्चिम मेदिनीपुर और आसपास के इलाकों में हर मानसून के दौरान होने वाली जलभराव की समस्या से राहत मिलेगी।

बैठक में मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को 8 जून तक केंद्र प्रायोजित स्वास्थ्य योजना ‘आयुष्मान भारत’ को राज्य में लागू करने की रूपरेखा अंतिम रूप देने का निर्देश भी दिया।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने साफ संदेश दिया कि राज्य में केंद्रीय स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में अब और देरी नहीं होनी चाहिए।

इसके अलावा मुख्यमंत्री ने राज्य में रोजगार सृजन पर जोर देते हुए अधिकारियों को ‘वीबी-जी राम जी’ (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण) परियोजना के तहत 100 दिन के रोजगार कार्यक्रम को तुरंत शुरू करने का निर्देश दिया। यह योजना पहले महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के नाम से जानी जाती थी।

गौरतलब है कि पिछली सरकार के दौरान योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण पिछले दो वर्षों से इस परियोजना के तहत केंद्र की फंडिंग रुकी हुई थी।


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