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131 करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी के मामले में अमृत ग्रुप पर ईडी का बड़ा शिकंजा, 20 ठिकानों पर छापेमारी में 2.75 करोड़ जब्त

आम जनता से 131 करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के कोलकाता जोनल ऑफिस ने 16 और 17 सितंबर को कोलकाता, इंदौर और जयपुर में 'अमृत ग्रुप' की कंपनियों और उनके प्रमोटर्स से जुड़े 20 आवासीय और दफ्तरों पर पीएमएलए, 2002 की धारा 17 के तहत तलाशी अभियान चलाया।

131 करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी के मामले में अमृत ग्रुप पर ईडी का बड़ा शिकंजा, 20 ठिकानों पर छापेमारी में 2.75 करोड़ जब्त
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कोलकाता। आम जनता से 131 करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के कोलकाता जोनल ऑफिस ने 16 और 17 सितंबर को कोलकाता, इंदौर और जयपुर में 'अमृत ग्रुप' की कंपनियों और उनके प्रमोटर्स से जुड़े 20 आवासीय और दफ्तरों पर पीएमएलए, 2002 की धारा 17 के तहत तलाशी अभियान चलाया।

ईडी की यह जांच सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) द्वारा 1 अगस्त 2025 को दर्ज कराई गई आपराधिक शिकायत के आधार पर शुरू हुई थी। यह शिकायत मेसर्स अमृत प्रोजेक्ट्स लिमिटेड (एपीएल), मेसर्स अमृत बायो-एनर्जी एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड (एबीईआईएल), मेसर्स अमृत प्रोजेक्ट्स लिमिटेड (एपीएनईएल), मेसर्स अमृत बाजार परिसेवा लिमिटेड (एबीपीएल) और उनके निदेशकों के खिलाफ कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 447 समेत अन्य धाराओं के तहत दर्ज की गई थी, जो पीएमएलए के तहत शेड्यूल्ड ऑफेंस है।

ईडी की जांच में सामने आया है कि कैलाश चंद दुजारी, काली किशोर बागची, अमृत दुजारी और अन्य लोगों ने अपनी कंपनियों के जरिए आम जनता से फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट, मासिक/तिमाही आय योजनाओं और क्लब मेंबरशिप के नाम पर लगभग 131.86 करोड़ रुपए जुटाए।

जमाकर्ताओं को बताया गया कि उनके पैसे पर निश्चित रिटर्न मिलेगा, जबकि कागजों पर इसे रिडीमेबल प्रेफरेंस शेयर्स, डीप डिस्काउंट बॉन्ड्स और हर्ब योजनाओं में निवेश के तौर पर दिखाया गया। ज्यादा रिटर्न का लालच देकर पैसा इकट्ठा किया गया और बाद में वापस नहीं लौटाया गया। वित्त वर्ष 2019-20 तक करीब 71.04 करोड़ रुपए जमाकर्ताओं को नहीं लौटाए गए थे।

जांच में यह भी पता चला कि कैलाश चंद दुजारी और अन्य निदेशकों ने जनता से जुटाए गए फंड को शेल कंपनियों में डायवर्ट किया। यह पैसा प्रमोटरों के कंट्रोल वाली फर्जी कंपनियों में भेजा गया और फिर उससे प्रमोटरों और शेल कंपनियों के नाम पर अचल संपत्ति खरीदी गई और कैश निकाला गया।

तलाशी के दौरान 2.75 करोड़ रुपए से ज्यादा की चल संपत्ति जब्त और फ्रीज की गई है। इसमें 1 करोड़ रुपए कैश, 4,800 डॉलर विदेशी मुद्रा, बैंक बैलेंस और अन्य निवेश शामिल हैं। इसके अलावा, होटलों (जयपुर, इंदौर और दिल्ली), स्कूलों, रिहायशी संपत्तियों और जमीनों में किए गए निवेश से जुड़े दस्तावेज भी बरामद हुए हैं, जिनमें 20 करोड़ रुपए से ज्यादा के बेनामी निवेश शामिल हैं।

ईडी ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और हवाला लेन-देन के रिकॉर्ड भी जब्त किए हैं। एजेंसी का कहना है कि ये दस्तावेज अपराध से हुई कमाई के रास्ते और उसे छिपाने के तरीकों को उजागर करेंगे। मामले में आगे की जांच जारी है।



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