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बंगाल में प्रशासनिक फेरबदल पर कांग्रेस का हमला, चुनाव आयोग और भाजपा की ‘मिलीभगत’ का लगाया आरोप

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रेस बयान जारी कर पश्चिम बंगाल सरकार की नई नियुक्तियों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने वाले अधिकारियों को अब नई सरकार में बड़े पद दिए गए हैं, जिससे पूरे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर संदेह पैदा होता है।

बंगाल में प्रशासनिक फेरबदल पर कांग्रेस का हमला, चुनाव आयोग और भाजपा की ‘मिलीभगत’ का लगाया आरोप
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नई दिल्‍ली: पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने राज्य सरकार और केंद्र पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि हालिया नियुक्तियां चुनाव आयोग और भाजपा के बीच कथित सांठगांठ को उजागर करती हैं। पार्टी का दावा है कि विधानसभा चुनाव के दौरान निष्पक्षता से समझौता किया गया और अब उसी प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों को अहम पद देकर उन्हें “पुरस्कृत” किया जा रहा है।

कांग्रेस ने नियुक्तियों पर उठाए सवाल

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोमवार को प्रेस बयान जारी कर पश्चिम बंगाल सरकार की नई नियुक्तियों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने वाले अधिकारियों को अब नई सरकार में बड़े पद दिए गए हैं, जिससे पूरे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर संदेह पैदा होता है। जयराम रमेश ने कहा कि 1990 बैच के आईएएस अधिकारी मनोज अग्रवाल को पश्चिम बंगाल का नया मुख्य सचिव बनाया गया है। चुनाव के दौरान वे राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी की भूमिका में थे। कांग्रेस का आरोप है कि जिन अधिकारियों पर निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी थी, उन्हें अब सत्ता परिवर्तन के बाद महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां देकर संदेश दिया जा रहा है कि उन्होंने सत्ता पक्ष के हित में काम किया।

मुख्यमंत्री के सलाहकार की नियुक्ति पर भी विवाद

कांग्रेस ने सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सुब्रत गुप्ता की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाए हैं। शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ घंटों बाद ही उन्हें मुख्यमंत्री का मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया। चुनाव के दौरान गुप्ता स्पेशल रोल ऑब्जर्वर के तौर पर काम कर रहे थे। कांग्रेस का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों को सीधे राजनीतिक पदों पर बैठाना लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर करता है। पार्टी ने आरोप लगाया कि इससे यह संदेश जाता है कि चुनावी जिम्मेदारियों का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया गया।

वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का लगाया आरोप

कांग्रेस ने सिर्फ नियुक्तियों पर ही नहीं, बल्कि पूरे चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। जयराम रमेश ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे। उनके मुताबिक, करीब 91 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए और लगभग 27 लाख लोग मतदान नहीं कर सके। कांग्रेस का आरोप है कि यह सब सुनियोजित तरीके से किया गया ताकि भाजपा को चुनाव में फायदा मिल सके। हालांकि चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कांग्रेस लगातार इस मुद्दे को लोकतंत्र और चुनावी पारदर्शिता से जोड़कर उठा रही है।

नई सरकार ने किया बड़ा प्रशासनिक बदलाव

शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रशासनिक ढांचे में कई अहम बदलाव किए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय में दो आईएएस अधिकारियों और सात डब्ल्यूबीसीएस अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा शांतनु बाला को मुख्यमंत्री का निजी सचिव बनाया गया है। नई सरकार का कहना है कि प्रशासन को अधिक प्रभावी और तेज बनाने के लिए यह फेरबदल जरूरी था। लेकिन विपक्ष इसे राजनीतिक निष्ठा के आधार पर किया गया फैसला बता रहा है।

कांग्रेस बोली- निष्पक्षता की धज्जियां उड़ाई गईं

कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पार्टी का कहना है कि जिन अधिकारियों को चुनाव के दौरान निष्पक्ष भूमिका निभानी चाहिए थी, वही अब नई सरकार में प्रभावशाली पदों पर दिखाई दे रहे हैं। जयराम रमेश ने कहा कि इससे साफ संकेत मिलता है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान पर्दे के पीछे बड़ा खेल हुआ था। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए खतरनाक बताते हुए कहा कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है।


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