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पश्चिम बंगाल में सीबीआई की कार्रवाई, 2021 में चुनाव बाद हिंसा मामले में घोषित अपराधी गिरफ्तार

सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने मंगलवार को 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़े एक हत्या के मामले में एक घोषित अपराधी को गिरफ्तार किया।

पश्चिम बंगाल में सीबीआई की कार्रवाई, 2021 में चुनाव बाद हिंसा मामले में घोषित अपराधी गिरफ्तार
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कोलकाता। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने मंगलवार को 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़े एक हत्या के मामले में एक घोषित अपराधी को गिरफ्तार किया।

सीबीआई के एक प्रेस बयान के अनुसार, गिरफ्तार की गई महिला का नाम झरना मिस्त्री है। वह संजय मिस्त्री की पत्नी हैं, जो इसी मामले में सह-आरोपी भी हैं। सीबीआई ने उन्हें पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के संतोषपुर इलाके के घोषपारा से गिरफ्तार किया।

बयान में कहा गया, "आरोपी महिला 2021 में एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही फरार थी और उसने चुनाव के बाद हुई हिंसा के इस मामले में जांच या मुकदमे की कार्यवाही में कभी हिस्सा नहीं लिया। सीबीआई ने उसकी गिरफ्तारी पर 50,000 रुपए के नकद इनाम की घोषणा की थी।"

कलकत्ता हाई कोर्ट के 19 अगस्त 2021 के आदेश के पालन में सीबीआई ने पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा के मामलों की जांच शुरू की थी, जिसमें यह मामला भी शामिल था।

इस मामले में सीबीआई ने उत्तर 24 परगना जिले के जगतदल पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करने के बाद जांच शुरू की। यह एफआईआर शोभा रानी मंडल की मां की शिकायत पर दर्ज की गई थी। आरोप है कि हिंसा के दौरान आरोपियों ने उनकी हत्या कर दी थी।

विस्तृत जांच के बाद सीबीआई ने मुख्य आरोपी झरना मिस्त्री समेत 13 आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की।

एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही झरना मिस्त्री फरार हो गई थीं और वह मुकदमे की कार्यवाही से बचती रहीं। बैरकपुर की जिला अदालत द्वारा उन्हें 'घोषित अपराधी' करार दिए जाने के बावजूद, वह पकड़ में नहीं आईं। मंगलवार को उन्हें बैरकपुर की सक्षम अदालत के सामने पेश किया गया।

बता दें कि 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद पूरे राज्य से भीषण हिंसा की खबरें सामने आई थीं, जिसमें तृणमूल कांग्रेस ने भारी बहुमत के साथ लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल की थी।

इनमें से कई मामलों में तृणमूल नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हिंसा करने का आरोप लगा था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई कार्यकर्ता मारे गए या घायल हुए और बहुत से लोगों को लंबे समय के लिए अपना घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।


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