बंगाल उपचुनाव से पहले ममता के गठबंधन प्रस्ताव को कांग्रेस ने ठुकराया, नंदीग्राम-रेजीनगर पर बढ़ी सियासी गर्मी
सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी ने सोमवार शाम अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव केसी वेणुगोपाल से फोन पर बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने दोनों दलों के बीच चुनावी तालमेल का प्रस्ताव रखा।

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में छह अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव से पहले कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच सियासी दूरी एक बार फिर सामने आ गई है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की ओर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ मिलकर चुनाव लड़ने के प्रस्ताव को कांग्रेस ने स्वीकार नहीं किया है। यह प्रस्ताव नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर दिया गया था। सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी ने सोमवार शाम अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव केसी वेणुगोपाल से फोन पर बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने दोनों दलों के बीच चुनावी तालमेल का प्रस्ताव रखा। बताया गया कि तृणमूल कांग्रेस नंदीग्राम सीट कांग्रेस के लिए छोड़ने और अपना उम्मीदवार हटाने को तैयार थी। वहीं, रेजीनगर सीट पर कांग्रेस से तृणमूल उम्मीदवार को समर्थन देने का अनुरोध किया गया था।
कांग्रेस ने रखा दोनों सीटों पर समर्थन का प्रस्ताव
कांग्रेस की ओर से इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के बजाय बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने अपनी शर्त सामने रख दी। उन्होंने कहा कि अगर तृणमूल कांग्रेस वास्तव में गठबंधन चाहती है तो उसे उपचुनाव में नंदीग्राम और रेजीनगर, दोनों सीटों पर कांग्रेस का समर्थन करना चाहिए।शुभंकर सरकार के मुताबिक, अगर तृणमूल कांग्रेस ऐसा करती है तो भविष्य में दोनों दलों के बीच गठबंधन की संभावनाओं पर बातचीत की राह खुल सकती है। इस बयान से साफ है कि फिलहाल दोनों पार्टियों के बीच सीटों को लेकर सहमति नहीं बन पाई है।
दोनों पार्टियां पहले ही घोषित कर चुकी हैं उम्मीदवार
नंदीग्राम और रेजीनगर में छह अक्टूबर को मतदान प्रस्तावित है। दोनों सीटों के लिए कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस अपने-अपने उम्मीदवार घोषित कर चुकी हैं। रेजीनगर में कांग्रेस उम्मीदवार की ओर से नामांकन भी दाखिल किया जा चुका है।इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस के बागी ऋतब्रत बनर्जी गुट ने भी दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। ऐसे में उपचुनाव का मुकाबला कई कोणों वाला हो गया है और गठबंधन की किसी संभावित व्यवस्था का असर चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।
कैसे खाली हुईं नंदीग्राम और रेजीनगर सीटें?
नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पद छोड़ने के कारण रिक्त हुई है, जबकि रेजीनगर सीट आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर के छोड़ने से खाली हुई। दोनों सीटों पर उपचुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। नंदीग्राम विशेष रूप से बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण सीट रही है। इसी सीट से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति को कई बार प्रभावित किया है। ऐसे में आगामी उपचुनाव पर राज्य के राजनीतिक दलों के साथ-साथ पर्यवेक्षकों की भी नजर है।
पुराने रिश्तों की कड़वाहट बनी बड़ी वजह
कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के रिश्तों का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 2011 के विधानसभा चुनाव में वाम मोर्चे को सत्ता से हटाने के लिए दोनों दलों ने साथ चुनाव लड़ा था। चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस ने सरकार बनाई, लेकिन 2012 में दोनों दलों का गठबंधन समाप्त हो गया। इसके बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस लंबे समय तक एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी रहे। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से तृणमूल शासन के दौरान राजनीतिक हिंसा और मामलों में फंसाए जाने जैसे आरोप भी लगाए जाते रहे हैं। इन्हीं पुराने मतभेदों के कारण कांग्रेस के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच ममता के प्रस्ताव को लेकर नाराजगी सामने आने की बात कही जा रही है।
भाजपा ने भी घोषित किए उम्मीदवार
इस बीच भाजपा ने दोनों विधानसभा सीटों के लिए अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। नंदीग्राम से पार्टी ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के दिवंगत निजी सहायक (पीए) चंद्रनाथ रथ की मां हासीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, रेजीनगर से शाखारव सरकार को टिकट दिया गया है। चंद्रनाथ रथ की हत्या शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से दो दिन पहले गोली मारकर किए जाने की बात सामने आई थी। ऐसे में नंदीग्राम से हासीरानी रथ की उम्मीदवारी ने इस उपचुनाव को एक अतिरिक्त राजनीतिक संदर्भ दे दिया है। फिलहाल कांग्रेस और तृणमूल के बीच गठबंधन की संभावना पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। दोनों दल अपने-अपने उम्मीदवारों के साथ मैदान में हैं और छह अक्टूबर के मतदान से पहले बंगाल की राजनीति में सीटों का यह टकराव और तेज होने के आसार हैं।


