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यूसीसी विधेयक को लेकर बंगाल भाजपा ने दी सफाई, कहा- अनुसूचित जनजातियां इसके दायरे से बाहर रहेंगी

पश्चिम बंगाल विधानसभा में 29 जून को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से संबंधित अहम विधेयक पेश किए जाने से पहले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित कानून के दायरे में अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को किसी भी स्थिति में शामिल नहीं किया जाएगा।

यूसीसी विधेयक को लेकर बंगाल भाजपा ने दी सफाई, कहा- अनुसूचित जनजातियां इसके दायरे से बाहर रहेंगी
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा में 29 जून को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से संबंधित अहम विधेयक पेश किए जाने से पहले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने शनिवार को स्पष्ट किया कि प्रस्तावित कानून के दायरे में अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को किसी भी स्थिति में शामिल नहीं किया जाएगा।

सोशल मीडिया पर जारी बयान में सामिक भट्टाचार्य ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 366 के खंड (25) और अनुच्छेद 342 के तहत परिभाषित अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों पर यह संहिता लागू नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता को लेकर भाजपा का रुख लंबे समय से स्पष्ट रहा है। यह हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी के घोषणापत्र और चुनावी वादों का भी हिस्सा था। इसमें कुछ भी छिपाने या भ्रम पैदा करने जैसा नहीं है।

भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा का मानना है कि पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता आवश्यक है, क्योंकि कानून के समक्ष सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान दायित्व सुनिश्चित होने चाहिए।

उन्होंने कहा कि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में धर्म आधारित अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के बजाय एक समान नागरिक व्यवस्था देश की एकता, न्याय और संवैधानिक समानता की भावना को और मजबूत करेगी।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यदि यह कानून लागू होता है तो सभी नागरिकों पर समान नागरिक प्रावधान लागू होंगे। उन्होंने दावा किया कि इससे उन व्यवस्थाओं को समाप्त करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम होगा, जिनमें व्यक्तिगत कानूनों के तहत बहुविवाह जैसी व्यवस्थाओं की अनुमति है।

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवार में बच्चों की संख्या तय करना समान नागरिक संहिता का उद्देश्य या उसका कोई प्रावधान नहीं है।

भट्टाचार्य ने कहा कि यूसीसी को लेकर भ्रम फैलाने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि एक ओर सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून स्थापित करने का उद्देश्य है, वहीं दूसरी ओर संविधान द्वारा अनुसूचित जनजातियों को दिए गए विशेष संरक्षण को भी पूरी तरह बरकरार रखा जाएगा। दोनों पहलुओं को समान प्राथमिकता दी गई है।


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