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वांग यी ने संयुक्त राष्ट्र फिलिस्तीन-इजरायल संघर्ष पर आपातकालीन सम्मेलन की अध्यक्षता की

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने 16 मई को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के फिलिस्तीन-इजरायल संघर्ष पर आपातकालीन सार्वजनिक सम्मेलन की अध्यक्षता की

वांग यी ने संयुक्त राष्ट्र फिलिस्तीन-इजरायल संघर्ष पर आपातकालीन सम्मेलन की अध्यक्षता की
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बीजिंग। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने 16 मई को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के फिलिस्तीन-इजरायल संघर्ष पर आपातकालीन सार्वजनिक सम्मेलन की अध्यक्षता की, जो वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए आयोजित हुआ। सम्मेलन में फिलिस्तीन, जॉर्डन, मिस्र, ट्यूनीशिया, नॉर्वे, आयरलैंड, अल्जीरिया के विदेश मंत्रियों, रूस के उप विदेश मंत्री, अरब लीग के प्रतिनिधि, इजराइल, अमेरिका, एस्टोनिया, वियतनाम, मैक्सिको, केन्या, ब्रिटेन, भारत, नाइजर, सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस, और फ्रांस के संयुक्त राष्ट्र स्थित स्थायी प्रतिनिधियों ने भाग लिया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और संयुक्त राष्ट्र मध्य-पूर्व शांति प्रक्रिया के विशेष समन्वयक ने सम्मेलन में विज्ञप्ति जारी की।

वांग यी ने कहा कि इजरायल और फिलिस्तीन के बीच बढ़ते संघर्ष से महिलाओं और बच्चों सहित बड़ी संख्या में लोगों की हताहती हुई है और स्थिति अत्यंत गंभीर है। युद्ध विराम और हिंसा को रोकना अति-आवश्यक है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को स्थिति को और अधिक बिगड़ने से रोकने और स्थानीय लोगों की जीवन रक्षा के लिए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।

वांग यी ने यह भी कहा कि फिलीस्तीनी मुद्दा हमेशा मध्य-पूर्व के मुद्दों का मूल रहा है। मध्य-पूर्व अस्थिर है और दुनिया असहज है। केवल जब फिलीस्तीनी मुद्दे का चतुर्मुखी, निष्पक्ष और स्थायी तरीके से समाधान किया जाएगा, तब वास्तव में मध्य-पूर्व क्षेत्र में स्थायी शांति और व्यापक सुरक्षा प्राप्त हो सकेगी।

उपस्थित प्रतिनिधियों ने सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए चीन को धन्यवाद दिया। उन्होंने आम तौर पर इजरायल और फिलिस्तीन से तुरंत ही युद्ध विराम कर सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों और अंतर्राष्ट्रीय कानून का पालन करते हुए स्थिति को ठंडा करने को बढ़ावा देने की अपील की। सभी पक्षों का मानना है कि सुरक्षा परिषद के सदस्यों और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को फिलिस्तीनी-इजरायल शांति वार्ता की प्रक्रिया को न्यायोचित रूप से आगे बढ़ाने के लिए सहमति की आवाज उठानी चाहिए और दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए।


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