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अयोध्या पर फैसला करीब, भगवा पार्टियां सुनने को बेताब

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला जल्द ही आने वाला है।

अयोध्या पर फैसला करीब, भगवा पार्टियां सुनने को बेताब
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नई दिल्ली । राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला जल्द ही आने वाला है। ऐसे में सत्तारूढ़ भाजपा ने विवादित मामले पर हर दिन हो रही सुनवाई पर करीब से नजर बनाए रखने के लिए एक विशेष टीम गठित की है।

यह टीम कोर्ट में हुई सुनवाई का सार पार्टी के नेतृत्वकर्ताओं को बताती है, ताकि वे अयोध्या मामले में आगे की रणनीति तय कर सकें। तय की गई रणनीति भाजपा प्रवक्ताओं को टेलीविजन पर बहस के दौरान मामले पर ध्यान आर्कषित करने वाले बिंदुओं को तैयार करने में मदद करती है और यह भी निर्धारित करती है कि भविष्य में उन्हें कब क्या बोलना है।

एक सूत्र ने बताया, "एक शीर्ष कैबिनेट मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव उस टीम का हिस्सा हैं और उन्हें इस काम में लगाया गया है।"

यहां के 6, दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित पार्टी मुख्यालय में हर दिन होने वाली बैठक में भाजपा के प्रवक्ता यह तय करते हैं कि इस विषय पर उन्हें क्या बोलना है।

यहां तक कि विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने भी एक टीम का गठन कर रखा है, जो उनके उपाध्यक्ष चंपत राय की निगरानी में काम कर रही है। हालांकि विहिप की योजना साल 2020 की शुरुआत में राम मंदिर बनवाने की है।

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने आईएएनएस से कहा, "विहिप रामलला के जन्म स्थान की लड़ाई लड़ रही है और अब जब विवादित स्थल पर सुनवाई हो रही है तो उस पर निगरानी बनाए रखना आम बात है।"

उन्होंने आगे कहा, "हमारा अनुमान कहता है कि फैसले के बाद भी औपचारिकताओं को पूरा करने में तीन से चार महीने का समय लग जाएगा। हम साल 2020 की शुरुआत से ही राम मंदिर बनवाना शुरू कर देंगे। हमने उसका आधार तैयार करना शुरू कर दिया है।"

विहिप प्रमुख आलोक कुमार ने हाल ही में खुलासा किया है कि संगठन ने मंदिर निर्माण के लिए अपनी जिला इकाइयों को पूरे देश से ईंट मंगवाने का आदेश दिया है, ताकि हर हिस्से के लोग इससे अपना जुड़ाव महसूस कर सकें।

इसके अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संयुक्त महासचिव दत्तात्रेय होसबोले भी कोर्ट में हो रही हर दिन की सुनवाई पर नजर बनाए हुए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सभी बहसों के लिए 18 अक्टूबर तक की समय-सीमा तय कर रखी है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई भी 17 नवंबर को सेवानिवृत्त हो जाएंगे। वह इससे पहले इस मामले पर फैसला सुनाना चाहते हैं।


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