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यूसीसी पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का स्वागत, स्वामी चिदानंद बोले, 'महिलाओं को अधिकार से वंचित करना अन्याय'

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने 'समान नागरिक संहिता' (यूसीसी) पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी का स्वागत करते हुए कहा है कि महिलाओं को उनके अधिकार से वंचित करने का मतलब उनको उनके जीवन की श्रेष्ठता से वंचित करना है।

यूसीसी पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का स्वागत, स्वामी चिदानंद बोले, महिलाओं को अधिकार से वंचित करना अन्याय
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ऋषिकेश। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने 'समान नागरिक संहिता' (यूसीसी) पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी का स्वागत करते हुए कहा है कि महिलाओं को उनके अधिकार से वंचित करने का मतलब उनको उनके जीवन की श्रेष्ठता से वंचित करना है।

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने एक शानदार फैसला दिया है। मैं जजों का बहुत सम्मान करता हूं। इस फैसले के जरिए, सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम महिलाओं के लिए समान विरासत के अधिकार के बारे में एक ऐतिहासिक संदेश दिया है। यह सिर्फ न्याय के बारे में नहीं है, बल्कि समाज को पुरानी परंपराओं से ऊपर उठने की एक मजबूत अपील भी है।"

उन्होंने आगे कहा, "यह एक नया आगाज है और नई शुरुआत है। यही समय है कि हम अपने भीतर की चेतना को जगाएं और नारी शक्ति को समान हक देने का मार्क अपनाएं। अपनी आवाज को बुलंद करें। जो सिर्फ यूसीसी के अपनाने से ही संभव हो सकता है, उसके बिना नहीं। यूसीसी सिर्फ कानून का विषय नहीं है, बल्कि यह समाज के नैतिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्वास्थ्य की भी पहचान है। यही समय है कि हम पुराने भ्रमों को दूर करें, नारी का सम्मान करें और अपने विचारों की शक्ति को पहचानें। समाज में बराबर, समान और न्याय का आदर्श स्थापित करें।"

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने यह भी कहा कि महिलाओं को उनके अधिकार से वंचित करने का मतलब उनको उनके जीवन की श्रेष्ठता से वंचित करना है। समाज का प्रत्येक नागरिक, परिवार और हर धर्म अनुयायी इस न्यायपूर्ण क्रांति में हिस्सा ले और भागीदार बने।

उन्होंने अपने बयान में कहा, "नारी है तो सच मानिए नवीनता है। यूसीसी सिर्फ कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रखरता का भी प्रतीक है। एक ऐसा संदेश हमें देना चाहिए, जो समाज का झकझोर, भविष्य को न्याय और समानता के मार्ग पर अग्रसर करे। यही काम हमें करना चाहिए। इसके लिए हम सभी को आवाज भी बुलंद करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के भी फैसले का स्वागत होना चाहिए।"


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