उत्तराखंड : अंकिता भंडारी मामले में विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों ने सीएम आवास का किया घेराव, सीबीआई जांच की मांग की
उत्तराखंड में अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर विभिन्न संगठनों और विपक्षी राजनीतिक दलों ने रविवार को मुख्यमंत्री आवास की कूच किया। वहीं इस आंदोलन की गूंज अब दिल्ली के जंतर-मंतर तक भी पहुंच गई है, जहां प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की

अंकिता हत्याकांड: सीबीआई जांच की मांग को लेकर सामाजिक संगठनों का प्रदर्शन
अंकिता भंडारी मामले में न्याय की मांग तेज़
लोगों ने देहरादून में सीएम हाउस का किया कूच
दिल्ली के जंतर मंतर में भी हुआ प्रदर्शन
देहरादून। उत्तराखंड में अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर विभिन्न संगठनों और विपक्षी राजनीतिक दलों ने रविवार को मुख्यमंत्री आवास की कूच किया। वहीं इस आंदोलन की गूंज अब दिल्ली के जंतर-मंतर तक भी पहुंच गई है, जहां प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
इस प्रदर्शन में भारी संख्या में महिलाओं और पुरुषों ने भाग लिया। विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शन करते हुए अंकिता मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की।
सामाजिक संगठनों के साथ कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल (उकद),भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), भाकपा माले,बेरोजगार संघ उत्तराखंड मूल निवास भू कानून संघर्ष समिति, राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी, गढ़वाल सभा,उत्तराखंड महिला मंच सहित विभिन्न जन पक्षधर संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता आज सुबह देहरादून के परेड मैदान के निकट एकत्रित हुए।
इसके बाद विशाल रैली निकालते हुए मुख्यमंत्री आवास कूच किया। इस दौरान आंदोलनकारियों ने अंकिता भंडारी को न्याय दिए जाने की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की । प्रदर्शनकारी जैसी ही न्यू कैंट रोड पहुंचे, तभी पहले से ही मौजूद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हाथीबड़कला के निकट बैरिकेटिंग लगाकर रोक दिया, लेकिन कुछ आंदोलनकारी बेरिकेडिंग पर चढ़कर प्रदर्शन करने लगे, और सरकार जवाब दो, अंकिता को न्याय दो जैसे नारे लगाने लगे।
इस मौके पर प्रदेश महिला कांग्रेस के अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने कहा कि अंकिता मामले मे नए आरोपों के बाद अब इस मामले की नये सिरे से जांच होनी जरूरी है। अंकिता भंडारी की हत्या कोई साधारण अपराध नहीं था, बल्कि संरक्षण में पनपे अपराध तंत्र का परिणाम है।
पूर्व विधायक सुरेश राठौर की पत्नी की ओर से कथित वीआईपी का नाम सामने आने के बावजूद सरकार इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। इस मामले में नए आरोप सामने आने के बाद संलिप्त लोगों को कठोरतम सजा दी जानी चाहिए।
भाकपा की राष्ट्रीय परिषद के सदस्य समर भंडारी ने कहा कि प्रदेश की जनता अब आधे अधूरे न्याय और लीपापोती को किसी भी तरह स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि दिवंगत अंकित भंडारी हत्याकांड में आज भी सबसे बड़ा सवाल खड़ा है कि आखिर वह वीआईपी कौन है जिसे बचाने के लिए एक बेटी को आज तक पूरा न्याय नहीं मिल पाया है। अब यह मामला अंकिता तक ही सीमित नहीं रह गया है। यह उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा, राज्य के मूल उद्देश्य का प्रश्न भी बन गया है।
उत्तराखंड क्रांति दल की केंद्रीय महामंत्री किरन रावत ने कहा कि सरकार शुरुआत से ही वीआईपी को बचाने का प्रयास कर रही है, ऐसे में इस मामले की पूरी तरह से सीबीआई जांच होनी चाहिए। आज अपनी ही भूमि पर उन्हें दिवंगत अंकिता को न्याय दिलाने के लिए सड़कों पर आने के लिए मजबूर होना पड़ा है।


