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उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला- हत्या के प्रयास में दोषी की सजा रद्द

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हत्या के प्रयास के एक मामले में जिला जज रुद्रप्रयाग द्वारा दोषी ठहराए गए हरीलाल की सजा को रद्द कर दिया है

उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला- हत्या के प्रयास में दोषी की सजा रद्द
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मोबाइल पर संगीत विवाद से उपजा झगड़ा, अदालत ने माना ‘पूर्व नियोजित नहीं’

  • धारा 307 की सजा खत्म, धारा 326 के तहत दोषसिद्धि बरकरार
  • गवाहों के मुकरने और FIR में देरी से कमजोर हुआ अभियोजन पक्ष

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हत्या के प्रयास के एक मामले में जिला जज रुद्रप्रयाग द्वारा दोषी ठहराए गए हरीलाल की सजा को रद्द कर दिया है।

न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकल पीठ ने माना कि घटना किसी पूर्व नियोजित या साजिश का परिणाम नहीं थी बल्कि मोबाइल फोन पर संगीत बजाने को लेकर हुए मामूली विवाद के उपजे आक्रोश के चलते हुई थी। मामले के अनुसार, जून 2020 में रुद्रप्रयाग के उखीमठ में संगीत बजाने को लेकर हुए झगड़े के दौरान हरीलाल ने परमेश्वर नामक व्यक्ति के पेट पर चाकू से वार कर दिया था। निचली अदालत ने उसे धारा 307 और 326 (गंभीर चोट पहुँचाना) के तहत दोषी ठहराते हुए आठ साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि, उच्च न्यायालय ने साक्ष्यों का पुनर्मूल्यांकन करते हुए पाया कि आरोपी का इरादा हत्या करना नहीं था क्योंकि उसने केवल एक ही वार किया और उसके बाद वह वहां से भाग गया। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि धारा 307 के तहत सजा के लिए हत्या का इरादा होना अनिवार्य है। इस मामले में, घटना की प्रकृति को देखते हुए हत्या के प्रयास का आरोप न्यायसंगत नहीं पाया गया। साथ ही हथियार की बरामदगी को लेकर गवाहों के मुकरने और प्राथमिकी दर्ज करने में हुई देरी ने भी अभियोजन पक्ष के दावे को कमजोर किया।

अदालत ने धारा 307 के तहत दी गई सजा को रद्द कर दिया, जबकि धारा 326 के तहत दोषसिद्धि को बरकरार रखा। अदालत ने अपीलकर्ता की सजा को उसके द्वारा जेल में पहले ही काटी जा चुकी अवधि में संशोधित कर दिया और आदेश दिया कि यदि वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है, तो उसे तत्काल रिहा किया जाए। जुर्माने की राशि को न्यायालय ने अपरिवर्तित रखा है।


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