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सरकार और प्रशासन चारधाम के तीर्थयात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराएं : हरीश रावत

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र और राज्यों की राजनीति पर टिप्पणी की है।

सरकार और प्रशासन चारधाम के तीर्थयात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराएं : हरीश रावत
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देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शुक्रवार को विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र और राज्यों की राजनीति पर टिप्पणी की है।

हरीश रावत ने चार धाम यात्रा के तीर्थयात्रियों की सुविधाओं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पंजाब की राजनीति से जुड़े सवालों पर खुलकर अपनी बात रखी।

उन्होंने चारधाम यात्रा को उत्तराखंड की पहचान और गौरव बताते हुए कहा, "हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं और उनका अनुभव सकारात्मक होना चाहिए। सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि तीर्थयात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि उनकी यात्रा सुगम, सुरक्षित और आनंददायक बन सके।"

उन्होंने हाल के कुछ घटनाक्रमों पर चिंता जताते हुए कहा, "यात्रा के दौरान उठ रहे कुछ नारे और माहौल यह संकेत देते हैं कि कहीं न कहीं व्यवस्थाओं में कमी आई है, जिसे सुधारने की जरूरत है।"

सुप्रीम कोर्ट द्वारा कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत दिए जाने पर हरीश रावत ने फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा, "यह निर्णय अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो लोकतंत्र की मूल भावना से जुड़ा हुआ है। यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उस पर लगाए गए आरोप निराधार हैं, तो उसके पास कानूनी विकल्प मौजूद हैं, जैसे कि दीवानी मुकदमा या मानहानि का केस दायर करना। लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है।"

पंजाब की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए हरीश रावत ने आम आदमी पार्टी और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर अप्रत्यक्ष कटाक्ष किया। उन्होंने पंजाब के नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा द्वारा उठाए गए डोप टेस्ट के मुद्दे का समर्थन करते हुए कहा, "बाजवा एक अनुभवी और गंभीर नेता हैं। यदि उन्होंने इस तरह की मांग की है, तो इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए और तथ्यों के आधार पर जांच होनी चाहिए।"

रावत ने कहा, "सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है, खासकर तब जब मामला जनप्रतिनिधियों से जुड़ा हो।" उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस तरह के मुद्दों को राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रखने के बजाय संस्थागत तरीके से सुलझाया जाना चाहिए।


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