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ऋषिकेश से हेमकुंड साहिब यात्रा का पहला जत्था रवाना, दिल्ली एलजी टीएस संधू ने दिखाई हरी झंडी

सिखों की पवित्र तीर्थ यात्रा श्री हेमकुंड साहिब धाम की 2026 यात्रा की शुरुआत हो गई है। ऋषिकेश स्थित गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब से पहले जत्थे को श्रद्धा और उत्साह के साथ रवाना किया गया।

ऋषिकेश से हेमकुंड साहिब यात्रा का पहला जत्था रवाना, दिल्ली एलजी टीएस संधू ने दिखाई हरी झंडी
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ऋषिकेश। सिखों की पवित्र तीर्थ यात्रा श्री हेमकुंड साहिब धाम की 2026 यात्रा की शुरुआत हो गई है। ऋषिकेश स्थित गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब से पहले जत्थे को श्रद्धा और उत्साह के साथ रवाना किया गया।

इस अवसर पर दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने श्रद्धालु जत्थे को हरी झंडी दिखाकर यात्रा के लिए रवाना किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और संगत मौजूद रही।

उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें ऋषिकेश स्थित पवित्र गुरुद्वारे में श्री हेमकुंड साहिब यात्रा के पहले 2026 जत्थे को रवाना करने का अवसर मिला, जिसे उन्होंने 'आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षण' बताया।

उन्होंने लिखा कि यह ऐतिहासिक वार्षिक तीर्थ यात्रा दुनिया भर के श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस पवित्र यात्रा की शुरुआत 'पंज प्यारे' के मार्गदर्शन में हुई, जो अत्यंत प्रेरणादायक अनुभव रहा।

तरनजीत सिंह संधू ने यह भी याद किया कि उन्होंने वर्ष 1975 में अपने पिता सरदार बिशन सिंह समुंदरी के साथ हेमकुंड साहिब की यात्रा की थी, जो उनके लिए एक भावनात्मक स्मृति है।

उन्होंने यात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं से बातचीत की और सभी को शुभकामनाएं देते हुए उनकी सुरक्षित, स्वस्थ और सफल यात्रा के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि ऊंचे हिमालयी क्षेत्र में स्थित यह यात्रा कठिन होने के बावजूद अत्यंत फलदायी और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करने वाली है।

कार्यक्रम के दौरान गुरुद्वारे में मौजूद संगत की श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने लायक था। श्रद्धालुओं के जोश और आस्था ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

श्री हेमकुंड साहिब धाम जिला चमोली के हिमालय पर्वतमाला में समुद्र तल से 15,000 फुट से ऊपर की ऊंचाई पर स्थिति है।

श्री हेमकुंड साहिब धाम जिला चमोली के हिमालय पर्वतमाला में समुद्र तल से 15,000 फुट से ऊपर की ऊंचाई पर स्थिति है। गर्मियों में यहां भक्त पहुंचते हैं लेकिन हेमकुंड में अक्टूबर से अप्रैल तक बर्फ की वजह से जाना अत्यधिक दुर्गम है।


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