Top
Begin typing your search above and press return to search.

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अयोध्या की सड़कों पर उतरे वकील, बोले- चंपत राय पर FIR दर्ज करो

बुधवार को अयोध्या में फैजाबाद बार एसोसिएशन के नेतृत्व में 500 से अधिक अधिवक्ता सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए नारेबाजी की।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अयोध्या की सड़कों पर उतरे वकील, बोले- चंपत राय पर FIR दर्ज करो
X

अयोध्या: Ram Mandir Donation Case: राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में अब जांच के साथ-साथ ट्रस्ट के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। पहली बार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेंद्र दास महाराज ने सार्वजनिक रूप से मंदिर के व्यवस्थापन से जुड़े गोपाल राव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पूरे विवाद के लिए गोपाल राव जिम्मेदार हैं और उनके काम करने के तरीके से मंदिर प्रशासन में अनावश्यक विवाद पैदा हुए हैं। उधर, इस मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर अधिवक्ताओं का विरोध प्रदर्शन भी तेज हो गया है। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने ट्रस्ट के तीन वरिष्ठ पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए पुलिस को शिकायत सौंपी है।

500 से अधिक अधिवक्ताओं ने किया प्रदर्शन

बुधवार को अयोध्या में फैजाबाद बार एसोसिएशन के नेतृत्व में 500 से अधिक अधिवक्ता सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए नारेबाजी की। जब अधिवक्ता श्रीराम जन्मभूमि थाने की ओर बढ़ रहे थे, तब पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने संबंधित पुलिस चौकी में शिकायत देकर मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग की।

एफआईआर नहीं हुई तो अदालत का रुख करेंगे अधिवक्ता

बार एसोसिएशन के सचिव शैलेंद्र कुमार जायसवाल ने बताया कि उनकी शिकायत पुलिस ने प्राप्त कर ली है और इसकी पावती भी दे दी गई है। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज नहीं करती है, तो बार एसोसिएशन इस मामले को इलाहाबाद हाई कोर्ट और आवश्यकता पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएगा। फिलहाल पुलिस शिकायत की जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।

प्रदर्शनकारियों ने ट्रस्ट में बदलाव की भी उठाई मांग

प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ता सत्य प्रकाश मौर्य ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल शिकायत देना नहीं, बल्कि दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराना है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकरण से अयोध्या की छवि प्रभावित हुई है। प्रदर्शनकारियों ने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए उसमें व्यापक बदलाव और नए सदस्यों को शामिल करने की मांग की। हालांकि इस संबंध में ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

महंत दिनेंद्र दास ने गोपाल राव पर लगाए आरोप

महंत दिनेंद्र दास ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मंदिर की परंपराओं का पालन करने के बजाय गोपाल राव प्रशासनिक मामलों को उलझाने और राजनीति करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश से जुड़े ट्रस्टी भगवान राम की परंपराओं के अनुरूप कार्य करते हैं, जबकि गोपाल राव का रवैया इससे अलग रहा है।

जांच के साथ अवैध निर्माणों की भी हो रही पड़ताल

इस मामले में गिरफ्तार आरोपितों की संपत्तियां भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अयोध्या विकास प्राधिकरण (एडीए) उन भवनों की जांच कर रहा है, जिनके निर्माण में मानकों के उल्लंघन या नक्शा स्वीकृति से जुड़े सवाल हैं। सूत्रों के मुताबिक, कुछ ऐसे मकानों की पहचान की गई है, जिनका निर्माण कथित तौर पर मंदिर में नौकरी मिलने के बाद कराया गया। इनमें लवकुश मिश्रा का शहादतगंज स्थित निर्माणाधीन मकान तथा अनुकल्प मिश्रा का कौशलपुरी स्थित आवास शामिल बताया जा रहा है।

एडीए की कार्रवाई पर नजर

प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यदि जांच में भवन निर्माण नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित संपत्ति मालिकों को नोटिस जारी किए जा सकते हैं। इसके बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस संबंध में अयोध्या विकास प्राधिकरण की ओर से कोई अंतिम आदेश सार्वजनिक नहीं किया गया है।

जांच के साथ बढ़ रहा राजनीतिक और कानूनी दबाव

राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच पहले से ही विशेष जांच दल (एसआईटी) और पुलिस की निगरानी में चल रही है। अब ट्रस्ट के भीतर उभरे मतभेद, अधिवक्ताओं के विरोध प्रदर्शन और प्रशासनिक स्तर पर संपत्तियों की जांच ने इस मामले को नया आयाम दे दिया है। आने वाले दिनों में पुलिस की जांच, एसआईटी की रिपोर्ट और बार एसोसिएशन की शिकायत पर होने वाली कार्रवाई इस पूरे प्रकरण की दिशा तय कर सकती है। फिलहाल सभी पक्षों की नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे क्या कदम उठाती हैं।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it