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आपके पास बहुत बुलडोजर हैं अब चलाईये उनकोः सुप्रीम कोर्ट

सेंट्रल मार्केट प्रकरण में मंगलवार को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्याय कक्ष संख्या 6 में सुनवाई पर माननीय न्याय मूर्ति श्री जे बी पारदीवाला एवं माननीय न्यायमूर्ति श्री संदीप मेहता द्वारा इस प्रकरण में सुनवाई की गई

आपके पास बहुत बुलडोजर हैं अब चलाईये उनकोः सुप्रीम कोर्ट
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यूपी के जनपद मेरठ में अवैध सेंट्रल मार्किट का मामला

  • सुनवाई में नहीं मिली निर्माणों के विनियमितिकरण की अनुमति
  • आदेश को परिवर्तित करने से सर्वोच्च अदालत ने किया इंकार
  • व्यापारियों को राहत के सभी रास्ते बंद, अब क्या करेंगे व्यापारी

मेरठ। सेंट्रल मार्केट प्रकरण में मंगलवार को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्याय कक्ष संख्या 6 में सुनवाई पर माननीय न्याय मूर्ति श्री जे बी पारदीवाला एवं माननीय न्यायमूर्ति श्री संदीप मेहता द्वारा इस प्रकरण में सुनवाई की गई! जिसमें सेंट्रल मार्केट व्यापार संगठन की ओर से कृष्णऔर निशानी लॉ चैंबर्स के वरिष्ठ अधिवक्ताओं एवं राज्य सरकार की ओर से राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व हेतु भारत के अटॉर्नी जनरल श्री आर वेंकटरमणि एवं वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मलखान सिंह तथा सॉलिसिटर जनरल गवर्मेंट ऑफ इंडिया श्री तुषार मेहता सहित अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने व्यापारियों के हित में बहस करते हुए परिषद का पक्ष रखा तथा यह अनुरोध किया कि अन्य समस्त अवैध निर्माण के विनियमितिकरण हेतु प्राप्त प्रस्तावों के स्वीकृति का आदेश माननीय न्यायालय द्वारा दिया जाए परंतु माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर कटाक्ष एवं कड़ी टिप्पणी करते हुए अपने आदेश को परिवर्तित करने से स्पष्ट मना कर दिया गया तथा राज्य सरकार पर टिप्पणी की कि आपके पास बहुत बुलडोजर है अब चलाइए उनको तथा बार-बार आग्रह पर कोर्ट ने आग्रह स्वीकार करते हुए स्पष्ट दिशा निर्देश दिए की 6 सप्ताह के भीतर अन्य समस्त अवैध निर्माणों को ध्वस्त करके ध्वस्तीकरण की कंप्लायंस रिपोर्ट याचिकाकर्ता के वकील के माध्यम से कोर्ट को उपलब्ध कराने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए!बता दें कि विगत 17 दिसम्बर 2024 को आवास विकास परिषद के निर्माण खंड 1 स्थित सेक्टर 6 में भूखंड संख्या 661 पर बने अवैध व्यावसायिक निर्माण व उस जैसे सभी अवैध निर्माणों को तोड़ने का आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया था। इस कार्यवाही में देरी हुई तो अवमानना याचिका पर सुनवाई शुरू हुई थी। जिस पर उ.प्र. आवास एवं विकास परिषद के प्रमुख सचिव से लेकर जिलाधिकारी, एसएसपी तथा थाना नोचंदी प्रभारी से जवाब मांगा। अधिकारियों पर अवमानना की तलवार लटकी तो आनन फानन में 661/6 को ध्वस्त कर दिया गया। जिसकी बवउचसपंदबम रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी गई, लेकिन आदेश का पूरा पालन नहीं करने पर अन्य सभी अवैध निर्माण को तोड़ने को कहा। जिसके बाद से परिषद के अधिकारियों के हाथ पैर फूले हुए हैं। कोर्ट के आदेश से बचने के लिए नई नई तरकीब ला रहे हैं, लेकिन सर्वोच्च अदालत के आगे उनका हर पैंतरा फैल हो रहा है। वैसे ये सब परिषद के भ्रष्ट अधिकारियों की कारगुजारी ही जो आज व्यापारियों के रोजगार पर भारी पड़ रही है। यदि समय रहते इन अवैध निर्माणों को राक दिया जाता तो आज ये स्थिति बनती ही नहीं। गौर करने वाली बात ये है कि जिन क्षेत्रों पर सुप्रीम कोर्ट का ध्वस्तीकरण का आदेश है वहां आज भी नए नए निर्माण बन रहे हैं। जबकि आदेश में साफ लिखा है कि नए निर्माणों को किसी भी सूरत में न बनने दिया जाए। उसके बावजूद परिषद के लोकल अधिकारी भ्रष्टाचार की चादर में छिपकर आज भी नए नए निर्माणों से अंदेखी कर रहे हैं।


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