उज्जैन शाही मस्जिद विवाद पर वीएचपी का आरोप, बोले- यह माहौल बिगाड़ने की सुनियोजित कोशिश
महाकाल की नगरी उज्जैन में सड़क को चौड़ा करने का एक सरकारी प्रोजेक्ट अब विवादों में घिर गया है। एक तरफ सिंहस्थ कुंभ को देखते हुए शहर को सुंदर बनाने की योजना है

उज्जैन। महाकाल की नगरी उज्जैन में सड़क को चौड़ा करने का एक सरकारी प्रोजेक्ट अब विवादों में घिर गया है। एक तरफ सिंहस्थ कुंभ को देखते हुए शहर को सुंदर बनाने की योजना है, जिसके तहत अब तक 80 धार्मिक स्थल हटाए जा चुके हैं, दूसरी तरफ उसी योजना के एक छोटे से हिस्से को लेकर शहर में तनाव का माहौल है। इस बीच विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल का आरोप है कि यह महज अतिक्रमण हटाने का विरोध नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से भीड़ को भड़काकर धार्मिक नगरी के माहौल को बिगाड़ने का पैटर्न है।
उज्जैन शाही मस्जिद मामले पर विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा, "उज्जैन एक धार्मिक शहर है। वहां सिंहस्थ कुंभ होने वाला है। इसके लिए सरकार और स्थानीय प्रशासन ने सड़क चौड़ी करने और सुंदर बनाने का प्लान बनाया है। उस प्लान के तहत अब तक इलाके की 80 धार्मिक जगहों को हटाया जा चुका है। उनमें से ज्यादातर हिंदू हैं।"
उन्होंने कहा कि जिस मस्जिद को लेकर यह विवाद फैला, उसका सिर्फ 10 फीसदी हिस्सा ही मस्जिद कमेटी को हटाना था। शहर काजी ने खुद कहा कि हमें कोई ऐतराज नहीं है, लेकिन अलगाववादी सोच वाले, कट्टरपंथी सोच वाले जिहादी तत्वों ने लोगों को भड़काया और गुमराह किया और पत्थरबाज़ी का ऐसा सीन बनाया जैसा कश्मीर घाटी में होता था।
रेवंत रेड्डी के बयान पर वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा, "वो कांग्रेस के ऐसे नेता हैं जो लगातार जिहादी तुष्टिकरण की नीति में आकंठ डूबे हुए हैं। हालांकि गलती उनकी नहीं है, क्योंकि उस कुनबे की शुरुआत भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से हुई थी। उन्होंने पहले भारत का बंटवारा करवाया, उसके बाद पाकिस्तान को ही पैसा दिलवा दिया। अब पार्टी की मुखिया इटली से आईं, वो कट्टरपंथी ईसाई महिला हैं, उनके इशारे पर रेवंत रेड्डी और क्या करेंगे?"
उन्होंने कहा कि वो कहते हैं कि कांग्रेस मुसलमानों के लिए है। कांग्रेस के बिना मुसलमानों का कोई वजूद ही नहीं है। वो हिंदू देवी-देवताओं पर कुठाराघात करते हैं। ये वहीं कुनबा है, जो राम मंदिर निर्माण का विरोध कर रहा था। ये सनातन को मिटाना चाहते थे, जो राम को नकारते थे, आज शिव की महिमा गा रहे हैं। उत्तर-दक्षिण में लड़ाई करने के लिए ये ऐसा कर रहे हैं।
वीएचपी प्रवक्ता ने कहा कि भौतिक दिवालियापन के शिकार कांग्रेस पार्टी को मैं कहना चाहता हूं कि कम से कम हमारे देवी-देवताओं को छोड़ दो। आपको जो राजनीति करनी है, वो अपनी पार्टी में कीजिए। भगवान शंकर और राम में कोई अंतर नहीं है। भगवान राम ने स्वयं अपने हाथों से दक्षिण भारत में रामेश्वरम की स्थापना की थी। जो वैभव और ऐश्वर्य भगवान शंकर के पास है, वो उनके भक्त राम के पास कैसे होगा और भगवान शिव कहते हैं कि वो राम के भक्त हैं।


