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संभल एसपी की शादी में सपा नेताओं की मौजूदगी पर बवाल, अखिलेश यादव नाराज, बीजेपी का पलटवार
राजस्थान में 30 मार्च को आयोजित रिसेप्शन में सपा के कई प्रमुख नेता शामिल हुए थे। इनमें जिलाध्यक्ष असगर अली अंसारी, संभल के सदर विधायक इकबाल महमूद, गुन्नौर विधायक राम खिलाड़ी यादव और असमोली विधायक पिंकी यादव शामिल बताए जा रहे हैं।

लखनऊ/संभल। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर नया विवाद खड़ा हो गया है। संभल के एसपी के.के. बिश्नोई और बरेली की एसपी साउथ अंशिका वर्मा की शादी के रिसेप्शन में समाजवादी पार्टी (सपा) के कई नेताओं और विधायकों की मौजूदगी ने सियासी रंग ले लिया है। इस मामले पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने नाराजगी जताई है, जबकि भाजपा ने इसे लेकर सपा पर निशाना साधा है।
सपा नेताओं की मौजूदगी पर उठे सवाल
राजस्थान में 30 मार्च को आयोजित रिसेप्शन में सपा के कई प्रमुख नेता शामिल हुए थे। इनमें जिलाध्यक्ष असगर अली अंसारी, संभल के सदर विधायक इकबाल महमूद, गुन्नौर विधायक राम खिलाड़ी यादव और असमोली विधायक पिंकी यादव शामिल बताए जा रहे हैं। इनकी मौजूदगी को लेकर पार्टी के भीतर असहजता देखने को मिली, खासकर तब जब संबंधित अधिकारी पहले से ही सपा के निशाने पर रहे हैं।
“नहीं जाना चाहिए था”
प्रदेश मुख्यालय में आयोजित बैठक और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर साफ नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि विधायकों को इस तरह के कार्यक्रम में शामिल नहीं होना चाहिए था। उन्होंने कहा, “यह बात हम लोग आपस में बैठकर समझाएंगे।” अखिलेश के इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या पार्टी अनुशासन के तहत संबंधित विधायकों पर कार्रवाई हो सकती है, या फिर 2027 के चुनाव में टिकट वितरण पर इसका असर पड़ेगा।
सपा मीडिया सेल का पोस्ट
इस मामले को और तूल तब मिला जब सपा के मीडिया सेल की ओर से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया गया। इसमें एसपी के.के. बिश्नोई को “भाजपाई माइंडसेट” वाला और “विवादित अफसर” बताया गया। पोस्ट में पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को ऐसे “समाजविरोधी तत्वों” से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई। साथ ही यह भी कहा गया कि बदलते राजनीतिक माहौल को देखते हुए कुछ अधिकारी खुद को बचाने के लिए विपक्षी नेताओं से नजदीकी बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं।
पिंकी यादव की सफाई
इस विवाद पर असमोली विधायक पिंकी यादव ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि वह पहले से ही परिवार के साथ राजस्थान में थीं, इसलिए व्यावहारिक तौर पर रिसेप्शन में शामिल हो गईं। उन्होंने स्पष्ट किया, “हम पार्टी के सिपाही हैं और राष्ट्रीय अध्यक्ष के हर आदेश का पालन करेंगे।” उन्होंने सोशल मीडिया पर फोटो डिलीट करने की खबरों को भी खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसी कोई पोस्ट साझा ही नहीं की थी।
पुराना संभल विवाद बना वजह
अखिलेश यादव की नाराजगी के पीछे संभल का पुराना विवाद भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। नवंबर 2024 में संभल में हुई हिंसा के लिए सपा ने एसपी के.के. बिश्नोई और प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया था। उस दौरान सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क समेत कई पार्टी नेताओं पर भी कार्रवाई हुई थी, जिसका पार्टी ने विरोध किया था। यही कारण है कि जिन अधिकारियों पर पहले आरोप लगाए गए थे, उनकी निजी समारोह में सपा नेताओं की मौजूदगी पार्टी नेतृत्व को रास नहीं आई।
बीजेपी का पलटवार
इस पूरे मामले पर भाजपा ने सपा को घेरने का मौका नहीं छोड़ा। भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि सपा और बसपा ने अपने शासनकाल में प्रशासन का राजनीतिकरण किया था। उन्होंने कहा कि अधिकारी किसी पार्टी या जाति के नहीं होते, उनकी जवाबदेही जनता के प्रति होती है। त्रिपाठी ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि वह खुद अन्य दलों के कार्यक्रमों में शामिल होते हैं, लेकिन अपने विधायकों के निजी कार्यक्रमों में जाने पर आपत्ति जता रहे हैं, जो विरोधाभासी है।
संगठन के भीतर असमंजस
इस पूरे घटनाक्रम ने सपा के भीतर अनुशासन और राजनीतिक रणनीति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ पार्टी नेतृत्व अधिकारियों से दूरी बनाए रखने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ नेता व्यक्तिगत स्तर पर अलग रुख अपनाते नजर आए हैं। जिलाध्यक्ष असगर अली अंसारी ने इस मामले पर बाद में प्रतिक्रिया देने की बात कही, लेकिन उनका पक्ष स्पष्ट नहीं हो सका।
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