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उत्तर प्रदेश असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा निरस्त, जांच में धांधली, प्रश्नपत्र लीकेज और अवैध वसूली का हुआ पर्दाफाश
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज ने विज्ञापन संख्या-51 के तहत एडेड डिग्री कॉलेजों में 910 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर भर्ती के लिए 16 और 17 अप्रैल 2025 को लिखित परीक्षा आयोजित की थी। इस भर्ती के लिए करीब 82 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था।

लखनऊ/प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के एडेड डिग्री कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया एक बड़े घोटाले की भेंट चढ़ गई है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों, नकल माफिया की सक्रियता और अंदरूनी मिलीभगत के पुख्ता सबूत मिलने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरी परीक्षा को निरस्त करने के आदेश दे दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर की गई गोपनीय जांच में यह स्पष्ट हो गया कि परीक्षा की शुचिता पूरी तरह भंग हो चुकी है और निष्पक्ष चयन संभव नहीं है।
910 पदों की भर्ती, 82 हजार अभ्यर्थी
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज ने विज्ञापन संख्या-51 के तहत एडेड डिग्री कॉलेजों में 910 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर भर्ती के लिए 16 और 17 अप्रैल 2025 को लिखित परीक्षा आयोजित की थी। इस भर्ती के लिए करीब 82 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। परीक्षा के आयोजन के तुरंत बाद ही विभिन्न जिलों से नकल, अवैध वसूली और प्रश्नपत्र लीक होने की शिकायतें सामने आने लगी थीं। शुरुआत में आयोग ने इन आरोपों को सामान्य शिकायतें मानकर आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन जैसे-जैसे शिकायतों का दायरा बढ़ा, मामला शासन स्तर तक पहुंच गया।
एसटीएफ जांच में खुला बड़ा नेटवर्क
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को गोपनीय जांच सौंपी गई। जांच के दौरान 20 अप्रैल 2025 को एसटीएफ ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया, जो फर्जी प्रश्नपत्र तैयार कर अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूल रहा था। इस गिरोह के तीन सदस्यों महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल को गिरफ्तार किया गया। इनके खिलाफ लखनऊ के थाना विभूतिखंड में परीक्षा में धांधली, धोखाधड़ी और अवैध धन वसूली के आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया।
आयोग के भीतर से हुआ पेपर लीक
जांच में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि मुख्य आरोपी महबूब अली, तत्कालीन आयोग अध्यक्ष कीर्ति पांडेय का गोपनीय सहायक था। पूछताछ में महबूब अली ने स्वीकार किया कि उसने माडरेशन प्रक्रिया के दौरान विभिन्न विषयों के प्रश्नपत्रों तक पहुंच बनाई और उन्हें पैसे लेकर कई अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराया। एसटीएफ की तकनीकी जांच और डाटा एनालिसिस से महबूब अली के कबूलनामे की पुष्टि हुई। जांच एजेंसियों ने गिरफ्तार अभियुक्तों और उनसे जुड़े अभ्यर्थियों के मोबाइल नंबरों का कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मैसेजिंग डाटा खंगाला, जिसमें संदिग्ध लेन-देन और संपर्कों के स्पष्ट प्रमाण मिले।
संदिग्ध अभ्यर्थियों का डाटा मिलान
मुखबिर तंत्र से मिली जानकारियों के आधार पर एसटीएफ ने कुछ और संदिग्ध नामों की पहचान की। इसके बाद आयोग से परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों का पूरा डाटा मंगाया गया। डाटा मिलान और विश्लेषण के बाद यह निष्कर्ष निकला कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र या उसके उत्तर उपलब्ध कराए गए थे।
जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया कि इस स्तर की गड़बड़ी के बाद परीक्षा परिणामों को विश्वसनीय नहीं माना जा सकता और चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाना न्यायसंगत नहीं होगा।
परिणाम घोषित, लेकिन साक्षात्कार नहीं हो सका
उधर, परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों की शिकायतों को देखते हुए शासन ने एक अलग जांच कमेटी भी गठित की थी। ओएमआर शीटों की जांच के बाद चार सितंबर को लिखित परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया गया और साक्षात्कार की तिथियां भी तय कर दी गई थीं। हालांकि, जैसे-जैसे एसटीएफ जांच के निष्कर्ष सामने आते गए और अभ्यर्थियों का विरोध तेज हुआ, आयोग को साक्षात्कार प्रक्रिया रोकनी पड़ी। परीक्षा निरस्त करने की मांग को लेकर कई अभ्यर्थियों ने आयोग कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन भी किया।
अध्यक्ष से लिया गया त्यागपत्र
जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए शासन ने आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष कीर्ति पांडेय से त्यागपत्र ले लिया था। हालांकि जांच में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका सामने नहीं आई, लेकिन उनके गोपनीय सहायक की संलिप्तता के कारण नैतिक जिम्मेदारी तय की गई।
मुख्यमंत्री का सख्त फैसला
एसटीएफ की विस्तृत रिपोर्ट, डाटा एनालिसिस और अभ्यर्थियों की शिकायतों को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को पूरी तरह निरस्त करने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी तरह की धांधली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देश दिए गए हैं कि असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा का आयोजन दोबारा जल्द किया जाए और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और तकनीकी रूप से सुरक्षित बनाया जाए।
आगे की राह
सरकार ने संकेत दिए हैं कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी और इस घोटाले से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं, दोबारा परीक्षा की तैयारी को लेकर आयोग पर दबाव है कि वह भरोसेमंद व्यवस्था के साथ भर्ती प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करे, ताकि हजारों योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
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