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यूपी राज्यसभा चुनाव: भाजपा के आठों प्रत्याशियों ने भरा पर्चा, निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चल रही चुनावी प्रक्रिया मंगलवार को नए मोड़ पर पहुंच गई। भारतीय जनता पार्टी के सभी आठ प्रत्याशियों ने मंगलवार को नामांकन दाखिल कर दिया, जबकि समाजवादी पार्टी ने तीसरा उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारने का फैसला किया है। इसके साथ ही भाजपा के आठ और सपा के दो प्रत्याशियों के निर्विरोध चुने जाने का रास्ता साफ हो गया है। भाजपा के आठों प्रत्याशी मंगलवार को पार्टी के प्रदेश मुख्यालय पहुंचे, जहां कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया। इसके बाद सभी प्रत्याशी विधानसभा पहुंचे और नामांकन दाखिल किया।

यूपी राज्यसभा चुनाव: भाजपा के आठों प्रत्याशियों ने भरा पर्चा, निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चल रही चुनावी प्रक्रिया मंगलवार को नए मोड़ पर पहुंच गई। भारतीय जनता पार्टी के सभी आठ प्रत्याशियों ने मंगलवार को नामांकन दाखिल कर दिया, जबकि समाजवादी पार्टी ने तीसरा उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारने का फैसला किया है। इसके साथ ही भाजपा के आठ और सपा के दो प्रत्याशियों के निर्विरोध चुने जाने का रास्ता साफ हो गया है। भाजपा के आठों प्रत्याशी मंगलवार को पार्टी के प्रदेश मुख्यालय पहुंचे, जहां कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया। इसके बाद सभी प्रत्याशी विधानसभा पहुंचे और नामांकन दाखिल किया।

इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी तथा उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक मौजूद रहे। नामांकन प्रक्रिया में सबसे पहले धर्मपाल सिंह ने पर्चा दाखिल किया, जबकि सबसे आखिर में झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार ने नामांकन किया। बाराबंकी की पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत और गोपीकृष्ण पांडेय ने नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आशीर्वाद लिया।

भाजपा ने सोमवार को राज्यसभा चुनाव के लिए आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित किए थे। इनमें धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपीकृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं। नामांकन के दौरान भाजपा के राज्यसभा उम्मीदवार राम प्रताप सिंह चौहान ने कहा कि पार्टी ने उन्हें उच्च सदन में भेजने का फैसला किया है और वह पार्टी के एक कार्यकर्ता के रूप में मिली इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व के प्रति आभार जताया।

भाजपा प्रत्याशी प्रकाश पाल ने कहा कि पार्टी ने उनके जैसे सामान्य कार्यकर्ता और ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष को राज्यसभा भेजकर पिछड़े वर्गों में उत्साह पैदा किया है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक निष्ठा के साथ काम करने वाले कार्यकर्ता के लिए भाजपा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों तक पहुंचने का अवसर मौजूद है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि भाजपा जो कहती है, उसे करके भी दिखाती है। उन्होंने कहा कि पार्टी के आठों प्रत्याशी कार्यकर्ता हैं और सभी मिलकर उनके नामांकन की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का प्रयास करने का आरोप भी लगाया।

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के 403 विधानसभा सीटों के लक्ष्य वाले बयान पर तंज कसते हुए कहा कि जब अखिलेश यादव सभी 403 सीटों का लक्ष्य तय करते हैं तो 100 तक पहुंचते-पहुंचते उनकी साइकिल डगमगाने लगती है। उन्होंने दावा किया कि इस बार 50 सीटें पार करते ही सपा की साइकिल की चेन उतर जाएगी और साइकिल पंक्चर हो जाएगी। मौर्य ने कहा कि समाजवादी पार्टी और उसके सहयोगियों को भाजपा की ताकत का अहसास हुआ, जिसके बाद उन्होंने तीसरा राज्यसभा उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया। भाजपा ने अपने कार्यकर्ताओं को अवसर दिया है।

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि समाजवादी पार्टी पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है और जब भी उसे अपनी हार का ठीकरा किसी पर फोड़ना होता है तो वह संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने लगती है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा 2027 में भारी बहुमत के साथ सत्ता में आएगी। उधर, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार सुबह सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा, "अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है।"

सपा की ओर से रामगोपाल यादव और धनंजय परिमल नाथवानी पहले ही नामांकन दाखिल कर चुके हैं। सपा पहले तीसरा उम्मीदवार उतारने की तैयारी में थी, लेकिन अखिलेश यादव के तीसरे प्रत्याशी नहीं उतारने के फैसले के बाद राज्यसभा चुनाव में मुकाबले की स्थिति समाप्त हो गई। दरअसल, उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए भाजपा ने आठ और सपा ने दो उम्मीदवार उतारे हैं।

उम्मीदवारों की संख्या सीटों के बराबर होने के कारण अब किसी अतिरिक्त प्रत्याशी के मैदान में नहीं आने पर सभी 10 सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता खुल गया है। हालांकि इसके लिए नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान निर्धारित है जबकि नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। यदि किसी अन्य प्रत्याशी की ओर से नामांकन नहीं किया जाता है और सभी नामांकन वैध पाए जाते हैं, तो मतदान की आवश्यकता नहीं होगी।



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