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यूपी पंचायत चुनाव: मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की तारीख फिर बढ़ी, चुनाव टलने की पूरी संभावना

तारीख बढ़ने के साथ ही पंचायत चुनाव के संभावित कार्यक्रम पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। राजनीतिक हलकों में इसे चुनाव कार्यक्रम के टलने की ओर संकेत माना जा रहा है, हालांकि आयोग ने अभी तक चुनाव की तारीखों को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है।

यूपी पंचायत चुनाव: मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की तारीख फिर बढ़ी, चुनाव टलने की पूरी संभावना
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लखनऊ। UP Panchayat Elections 2026: उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियां जारी हैं, लेकिन मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन में एक बार फिर देरी हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता पुनरीक्षण अभियान 2025 के तहत अंतिम सूची जारी करने की तारीख आगे बढ़ा दी है। अब संशोधित और अंतिम मतदाता सूची 15 अप्रैल को प्रकाशित की जाएगी। तारीख बढ़ने के साथ ही पंचायत चुनाव के संभावित कार्यक्रम पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। राजनीतिक हलकों में इसे चुनाव कार्यक्रम के टलने की ओर संकेत माना जा रहा है, हालांकि आयोग ने अभी तक चुनाव की तारीखों को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है।

निस्तारण के लिए बढ़ाई गई समयसीमा

राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया अभी जारी है। बड़ी संख्या में प्राप्त दावे और आपत्तियों के निस्तारण के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता महसूस की गई, जिसके चलते समयसीमा बढ़ाई गई है। पहले अंतिम मतदाता सूची 6 फरवरी को प्रकाशित की जानी थी। इसके बाद कार्यक्रम में संशोधन करते हुए 28 मार्च की तिथि तय की गई थी। अब इसे आगे बढ़ाकर 15 अप्रैल कर दिया गया है। आयोग के मुताबिक, दावे और आपत्तियों के निस्तारण समेत अन्य जरूरी प्रक्रियाएं 27 मार्च तक पूरी की जानी हैं। इसके बाद तकनीकी और प्रशासनिक कार्यवाही के बाद अंतिम सूची जारी की जाएगी।

40 लाख से अधिक नए मतदाता जुड़े

राज्य निर्वाचन आयोग ने 18 दिसंबर को प्रारंभिक पुनरीक्षण सूची जारी की थी। इस सूची के अनुसार, पिछले पंचायत चुनाव की तुलना में इस बार 40.19 लाख नए मतदाता जुड़े हैं। मतदाता संख्या में इस उल्लेखनीय वृद्धि के बाद बड़ी संख्या में दावे और आपत्तियां भी सामने आईं। आयोग के अधिकारियों के अनुसार, लाखों की संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनकी जांच और सत्यापन की प्रक्रिया समय ले रही है। कई मामलों में नाम जुड़वाने, संशोधन कराने, स्थानांतरण या डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाने संबंधी आवेदन शामिल हैं।

चरणबद्ध तरीके से होगी प्रक्रिया

राज्य निर्वाचन आयुक्त आर.पी. सिंह ने बताया कि मतदाता सूची को अंतिम रूप देने के लिए विस्तृत और चरणबद्ध प्रक्रिया अपनाई जा रही है। उन्होंने जानकारी दी कि 7 से 20 फरवरी के बीच प्राप्त दावे और आपत्तियों का निस्तारण किया गया। इसके बाद हस्तलिखित पांडुलिपियों की तैयारी, संभावित डुप्लीकेट मतदाताओं का सत्यापन और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है। 21 फरवरी से 16 मार्च के बीच पूरक सूचियों के कंप्यूटरीकरण की तैयारी की गई। इन पूरक सूचियों को मूल मतदाता सूची में समाहित किया जाएगा। इसी अवधि में मतदान केंद्रों और मतदेय स्थलों के निर्धारण की प्रक्रिया भी पूरी की जा रही है। 17 मार्च से 27 मार्च तक मतदान केंद्रों का क्रमांकन, वार्डों की मैपिंग, मतदाताओं का क्रम निर्धारण और स्टेट वोटर नंबर का आवंटन जैसे तकनीकी कार्य किए जाएंगे। इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद अंतिम मतदाता सूची 15 अप्रैल को प्रकाशित की जाएगी।

पंचायत चुनाव पर क्या पड़ेगा असर?

मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन में देरी को पंचायत चुनाव कार्यक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। सामान्यतः अंतिम सूची जारी होने के बाद ही चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि सूची 15 अप्रैल को प्रकाशित होती है, तो चुनाव की अधिसूचना जारी करने और अन्य तैयारियों में समय लगेगा। ऐसे में चुनाव कार्यक्रम में कुछ हफ्तों की देरी संभव है। हालांकि, आयोग की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया की शुद्धता और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता है। अधिकारियों का कहना है कि जल्दबाजी में सूची जारी करने की बजाय त्रुटिरहित सूची प्रकाशित करना अधिक महत्वपूर्ण है।

प्रशासनिक तैयारियां तेज

राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को सभी प्रक्रियाएं समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए हैं। मतदान केंद्रों के पुनर्गठन, वार्ड निर्धारण और मतदाता क्रमांकन जैसे कार्यों में तकनीकी सावधानी बरती जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार डिजिटल प्रोसेसिंग और डेटा इंटीग्रेशन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि डुप्लीकेट नाम, त्रुटियां और विसंगतियां कम से कम रहें। इसके अलावा, मतदान केंद्रों की संख्या और उनके भौगोलिक वितरण का भी पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है ताकि मतदाताओं को सुविधा मिल सके।

राजनीतिक दलों की नजर

पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक दल भी सक्रिय हैं। मतदाता सूची में नए मतदाताओं की बड़ी संख्या जुड़ने से स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ सकता है। दल स्तर पर भी मतदाता सूची का गहन अध्ययन किया जा रहा है और कार्यकर्ताओं को नाम जुड़वाने व त्रुटियों को सुधारने के लिए सक्रिय किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायत चुनाव भले ही स्थानीय स्तर का हो, लेकिन इसके राजनीतिक संकेत व्यापक होते हैं, खासकर आगामी विधानसभा या लोकसभा चुनावों के संदर्भ में।

अंतिम चरण में पहुंची प्रक्रिया

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की तारीख फिर आगे बढ़ना प्रशासनिक प्रक्रिया की जटिलता को दर्शाता है। लाखों दावे-आपत्तियों और तकनीकी सत्यापन के चलते आयोग ने समयसीमा बढ़ाई है। अब सभी की नजर 15 अप्रैल पर टिकी है, जब अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद ही पंचायत चुनाव की अधिसूचना और संभावित मतदान तिथियों को लेकर स्पष्टता आएगी। फिलहाल, राज्य निर्वाचन आयोग शुद्ध और पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करने के उद्देश्य से अपनी प्रक्रिया को अंतिम चरण में पहुंचाने में जुटा हुआ है।


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