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महाराजा सूरजमल प्रतिमा अनावरण पर बवाल: ‘जाट’ शब्द हटाने से विवाद, भगवंत मान बिना अनावरण लौटे
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब जिला प्रशासन ने महापुरुषों की प्रतिमाओं पर जाति विशेष का उल्लेख न करने के शासनादेश का हवाला देते हुए पट्टिका से ‘जाट’ शब्द हटवा दिया।

मेरठ: महाराजा सूरजमल की प्रतिमा के अनावरण का कार्यक्रम रविवार को राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया। प्रतिमा की पट्टिका से ‘जाट’ शब्द हटाए जाने को लेकर जिला प्रशासन, भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान, तथा नागौर (राजस्थान) के सांसद हनुमान बेनीवाल के बीच तीखी नोकझोंक हुई। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान बिना प्रतिमा का अनावरण किए ही वापस लौट गए।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब जिला प्रशासन ने महापुरुषों की प्रतिमाओं पर जाति विशेष का उल्लेख न करने के शासनादेश का हवाला देते हुए पट्टिका से ‘जाट’ शब्द हटवा दिया। आयोजकों ने ‘अंतरराष्ट्रीय जाट संसद’ के नाम से पट्टिका लगवाई थी, जिसे पुलिस ने कार्यक्रम से एक दिन पहले ही हटा दिया। इस कार्रवाई के खिलाफ मंच से ही विरोध शुरू हो गया और मामला तेजी से तूल पकड़ने लगा।
ਮਹਾਰਾਜਾ ਸੂਰਜਮਲ ਜੀ ਦੇ ਬੁੱਤ ਨੂੰ ਲੋਕ ਸਮਰਪਿਤ ਕਰ ਰਹੇ ਹਾਂ, ਉਦਘਾਟਨ ਸਮਾਗਮ ਦੌਰਾਨ ਮੇਰਠ ਤੋਂ LIVE ------- महाराजा सूरजमल जी की प्रतिमा को जनता को समर्पित कर रहे हैं, उद्घाटन समारोह के दौरान मेरठ से LIVE https://t.co/LQekwB0zHv
— Bhagwant Mann (@BhagwantMann) March 29, 2026
मंच से तीखी बयानबाजी
कार्यक्रम के दौरान सांसद हनुमान बेनीवाल ने आक्रामक रुख अपनाते हुए प्रशासन और नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने मंच से कहा कि यदि ‘जाट’ शब्द वापस नहीं जोड़ा गया, तो इसका राजनीतिक परिणाम होगा। उनके इस बयान के बाद माहौल और गरमा गया, जिससे कार्यक्रम का स्वरूप पूरी तरह बदल गया।
अधिकारियों और नेताओं में टकराव
शाम होते-होते विवाद और गहरा गया, जब डॉ. संजीव बालियान, हनुमान बेनीवाल और अंतरराष्ट्रीय जाट संसद के अध्यक्ष मनु चौधरी प्रतिमा स्थल पर पहुंचे। यहां इन नेताओं की एसडीएम उदित नारायण सेंगर और सीओ प्रकाश चंद अग्रवाल के साथ तीखी बहस हुई। स्थिति धक्का-मुक्की तक पहुंच गई, जिसमें सीओ प्रकाश चंद अग्रवाल को चोट भी लग गई। घटना के बाद प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव और बढ़ गया।
धरना और भीड़ जुटाने की अपील
प्रशासन के रुख के विरोध में मनु चौधरी और रामअवतार पलसानिया अपने समर्थकों के साथ प्रतिमा स्थल पर धरने पर बैठ गए। सोशल मीडिया के जरिए युवाओं से मौके पर पहुंचने की अपील की गई, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई और क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया।
भगवंत मान का हमला और कार्यक्रम से वापसी
इससे पहले, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार पर तीखे हमले किए। उन्होंने कहा कि देश को ‘विश्व गुरु’ बनाने का दावा करने वाली सरकार ने इसे ‘विश्व चेला’ बना दिया है। मान ने महंगाई, किसानों की स्थिति और एमएसपी जैसे मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने पंजाब की तरह किसानों को मुफ्त बिजली और फसलों का तत्काल भुगतान सुनिश्चित करने की वकालत की। हालांकि, पट्टिका विवाद का समाधान न निकलने के कारण वे बिना प्रतिमा का अनावरण किए ही कार्यक्रम स्थल से लौट गए।
अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के नेता दिग्विजय चौटाला ने समाज में एकता बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज को संगठित रहना चाहिए और अनुशासन बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज के सेवानिवृत्त अधिकारियों को सक्रिय होकर सामाजिक कार्यों में योगदान देना चाहिए।
आखिरकार कैसे सुलझा विवाद?
देर शाम करीब साढ़े सात बजे प्रशासन और नेताओं के बीच बातचीत के बाद सहमति बनी। विवादित पट्टिका को पुलिस लाइन से डॉ. संजीव बालियान के आवास पर पहुंचाया गया, जिसके बाद धरना समाप्त कर दिया गया। संजीव बालियान का कहना था कि पट्टिका किसी जाति विशेष का प्रचार नहीं करती, बल्कि यह एक संगठन ‘अंतरराष्ट्रीय जाट संसद’ का नाम है। उन्होंने कहा कि आवश्यक अनुमति लेकर इसे दोबारा स्थापित कराया जाएगा।
अनावरण को लेकर अलग-अलग दावे
कार्यक्रम के अंत में भी भ्रम की स्थिति बनी रही। आयोजकों का दावा है कि प्रतिमा का अनावरण हो चुका है, जबकि प्रशासन का कहना है कि कार्यक्रम के लिए केवल सम्मान समारोह की अनुमति दी गई थी, अनावरण की नहीं।
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