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UP News: कौशांबी के जिलाधिकारी पर लगाया गया 25 हजार का जुर्माना, वेतन भी रोका, जानें क्‍या है कारण

यह मामला लंबे समय से लंबित एक भूमि विवाद और उससे जुड़ी आरटीआई अपील से संबंधित है। आयोग ने कई बार जवाब देने का मौका दिया, लेकिन संतोषजनक सूचना उपलब्ध न कराए जाने पर यह कार्रवाई की गई।

UP News: कौशांबी के जिलाधिकारी पर लगाया गया 25 हजार का जुर्माना, वेतन भी रोका, जानें क्‍या है कारण
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कौशांबी : उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध न कराने के मामले में राज्य सूचना आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य सूचना आयुक्त ने जिलाधिकारी कौशांबी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही आदेश दिया गया है कि जब तक यह राशि वेतन से काटकर जमा नहीं की जाती, तब तक जिलाधिकारी का वेतन जारी न किया जाए। यह मामला लंबे समय से लंबित एक भूमि विवाद और उससे जुड़ी आरटीआई अपील से संबंधित है। आयोग ने कई बार जवाब देने का मौका दिया, लेकिन संतोषजनक सूचना उपलब्ध न कराए जाने पर यह कार्रवाई की गई।

भूमि विवाद से जुड़ा है पूरा मामला

प्रयागराज में रहकर आढ़त का काम करने वाले मंगली प्रसाद कुशवाहा की जमीन कौशांबी जिले के करारी थाना क्षेत्र के सनई गांव में स्थित है। मंगली प्रसाद के अनुसार, उनके सहखातेदार चांदबाबू ने 25 जनवरी 2020 को प्रयागराज मंडलायुक्त के पास एक शिकायत पत्र दिया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जमीन और बाग से जुड़े मामले में लेखपाल ने गलत रिपोर्ट लगाई है। मंगली प्रसाद का कहना है कि वह अनपढ़ हैं और उनका अंगूठा लगवाकर गलत तरीके से दस्तावेज तैयार किए गए।

आरटीआई के जरिए मांगी गई थी जानकारी

मामले की जानकारी हासिल करने के लिए मंगली प्रसाद ने 14 फरवरी 2022 को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन किया। उन्होंने पूछा कि चांदबाबू की शिकायत पर प्रशासन ने क्या कार्रवाई की और उस मामले में क्या रिपोर्ट तैयार की गई। इस आरटीआई आवेदन को लेकर मंडलायुक्त कार्यालय ने जिलाधिकारी कौशांबी से जवाब मांगा। लेकिन आरोप है कि समय बीतने के बावजूद आवेदक को पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

कई तारीखों पर नहीं पहुंचा प्रशासनिक पक्ष

मामले की सुनवाई के लिए 21 अप्रैल 2025 और 12 जून 2025 की तारीख तय की गई थी। इन सुनवाइयों में अपीलकर्ता मंगली प्रसाद तो उपस्थित हुए, लेकिन जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा। इसके बाद 25 अगस्त 2025 को प्रशासन को एक और अवसर दिया गया, लेकिन तब भी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ। लगातार देरी और जवाब न मिलने से परेशान होकर मंगली प्रसाद ने राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया।

राज्य सूचना आयोग पहुंचा मामला

राज्य सूचना आयोग में यह मामला “मंगली प्रसाद बनाम अपीलीय अधिकारी/जिलाधिकारी कौशांबी” के नाम से दर्ज हुआ। आयोग ने 11 नवंबर 2025 को जिलाधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। इसके बावजूद आवेदक को मांगी गई सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। आयोग ने प्रशासन को चेतावनी भी दी कि यदि सूचना नहीं दी गई तो आर्थिक दंड लगाया जाएगा। इसके बाद भी आयोग ने जिलाधिकारी डॉ. अमित पाल को 19 जनवरी 2026 और 8 अप्रैल 2026 को अतिरिक्त अवसर दिए, लेकिन आयोग के अनुसार संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया।

सूचना आयुक्त ने दिया सख्त आदेश

लगातार लापरवाही और आदेशों की अनदेखी के बाद राज्य सूचना आयुक्त राकेश कुमार ने 11 मई 2026 को सख्त आदेश जारी किया। उन्होंने जिलाधिकारी कौशांबी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। आयुक्त ने वरिष्ठ कोषाधिकारी को पत्र भेजकर निर्देश दिया कि जब तक जुर्माने की राशि जिलाधिकारी के वेतन से काटकर जमा नहीं की जाती, तब तक उनका वेतन रोका जाए। सूचना आयोग का यह कदम प्रशासनिक जवाबदेही और आरटीआई कानून के पालन को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

डीएम ने आदेश पालन की बात कही

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए जिलाधिकारी डॉ. अमित पाल ने कहा कि संबंधित आवेदक को आवश्यक सूचना उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सूचना आयोग के आदेश का पूरी तरह पालन किया जाएगा। हालांकि, इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सूचना का अधिकार कानून के तहत आम नागरिकों को समय पर जानकारी क्यों नहीं मिल पाती। विशेषज्ञों का मानना है कि आरटीआई कानून पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया था, लेकिन कई मामलों में अधिकारियों की लापरवाही के कारण लोगों को वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है।

आरटीआई कानून की अहमियत फिर हुई उजागर

यह मामला दिखाता है कि सूचना का अधिकार अधिनियम आम नागरिकों के लिए कितना महत्वपूर्ण है। साथ ही यह भी स्पष्ट करता है कि यदि अधिकारी कानून के तहत अपनी जिम्मेदारियां नहीं निभाते, तो सूचना आयोग कार्रवाई करने के लिए अधिकृत है। राज्य सूचना आयोग का यह आदेश प्रशासनिक तंत्र के लिए एक संदेश माना जा रहा है कि आरटीआई आवेदनों को नजरअंदाज करना अब आसान नहीं होगा।


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