धरने पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अन्न-जल छोड़ा, अखिलेश ने फोन पर बात की: बोले- जल्द मिलने आऊंगा
शोभायात्रा निकालकर स्नान करने पर लगी रोक और उसके बाद पुलिस से हुई झड़प के विरोध में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पिछले 36 घंटे से अधिक समय से अपने शिविर के सामने धरने पर बैठे हैं।

प्रयागराज। मौनी अमावस्या पर संगम स्नान को लेकर प्रयागराज में संत-प्रशासन टकराव गहरा गया है। शोभायात्रा निकालकर स्नान करने पर लगी रोक और उसके बाद पुलिस से हुई झड़प के विरोध में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पिछले 36 घंटे से अधिक समय से अपने शिविर के सामने धरने पर बैठे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक प्रशासन सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगता, तब तक वह अन्न-जल ग्रहण नहीं करेंगे। दूसरी ओर, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि स्नान पर रोक नहीं थी, आपत्ति केवल पहिया लगी पालकी को लेकर थी, जिससे भीड़ में भगदड़ का खतरा बताया गया।
धरना, आरोप और ‘हत्या की साजिश’ का दावा
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद रविवार शाम करीब चार बजे से धरने पर बैठे हैं। सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार श्रद्धालुओं की भीड़ में उनकी हत्या कराना चाहती थी, इसलिए पुलिस अधिकारी पालकी से उतरने का दबाव बना रहे थे। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार को हिंदू और सनातन संस्कृति के लिए खतरा बताया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर टिप्पणी करते हुए कहा कि संतों का चोला ओढ़े चापलूसों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिनके काफिलों के लिए मेले में रास्ते खाली कराए जाते हैं।
शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनका अपमान किया और बाल ब्रह्मचारियों की शिखा पकड़कर बंद कमरे में बर्बरतापूर्वक पिटाई की गई। उन्होंने कहा, “मैं धरने पर नहीं हूं, पुलिस ने जहां छोड़ा था, वहीं बैठा हूं। रविवार शाम से बिना अन्न-जल के बैठा हूं। जब तक संबंधित अधिकारी या स्वयं मुख्यमंत्री आकर क्षमा याचना नहीं करेंगे, मैं नहीं उठूंगा।” उन्होंने मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, गृह सचिव मोहित गुप्ता, पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार, जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा और डिप्टी एसपी विनीत सिंह की तस्वीरें लहराते हुए सभी को घटना के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया।
‘स्नान नहीं रोका, पालकी पर आपत्ति थी’
इस पूरे प्रकरण पर सोमवार को मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने पत्रकारवार्ता में प्रशासन का पक्ष रखा। उन्होंने कहा, “स्नान करने से नहीं रोका गया, बल्कि आग्रह किया गया। आपत्ति केवल पहिया लगी पालकी पर थी, जिस पर सवार होकर संगम नोज जाने की योजना थी। इससे भगदड़ या किसी अनहोनी की आशंका थी।” मंडलायुक्त के अनुसार, शनिवार को दो वाहनों, अतिरिक्त सुरक्षा और विशेष प्रोटोकॉल की मांग रखी गई थी, जिसे प्रशासन ने भीड़ और सुरक्षा कारणों से स्वीकार नहीं किया। पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार ने बताया कि बैरियर तोड़ने और संगम मार्ग को करीब तीन घंटे बाधित रखने से जुड़े सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और प्रकरण की जांच कराई जा रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज
इस विवाद पर राजनीति भी गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से फोन पर बात कर अभद्रता की निंदा की। उन्होंने कहा, “वाराणसी में मंदिर तोड़े जा रहे हैं, प्रयाग में संत अपमानित हो रहे हैं।” अखिलेश ने शंकराचार्य से कहा कि “मैं आपके साथ हूं, जल्द ही मिलने आऊंगा।” स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस संदर्भ में कहा, “हिंदू धर्म में जन्म लेते ही गंगा-यमुना में स्नान का अधिकार मिल जाता है, लेकिन मुझसे यह अधिकार भी छीन लिया गया।”
समर्थन में उतरीं हर्षा रिछारिया
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हर्षा रिछारिया ने भी एक वीडियो जारी कर शंकराचार्य का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “ये बेटी आपके साथ है।” उन्होंने दावा किया कि पालकी (रथ) यात्रा रोके जाने के विरोध में शंकराचार्य वहीं धरने पर बैठे हैं, जहां पुलिस उन्हें छोड़ गई थी। उनके अनुसार, रविवार की पूरी रात ठंड में वे पंडाल में बैठे रहे और 24 घंटे से अधिक समय में उन्होंने पानी तक नहीं पिया।
रुख पर अडिग
फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। शंकराचार्य अपने रुख पर अडिग हैं और प्रशासन जांच की बात कह रहा है। यदि बातचीत या मध्यस्थता से समाधान नहीं निकला, तो यह विवाद मेले की व्यवस्था, संतों के प्रोटोकॉल और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों पर व्यापक बहस को जन्म दे सकता है। सबकी निगाहें अब इस पर टिकी हैं कि प्रशासन माफी या संवाद का रास्ता अपनाता है या नहीं, और क्या यह गतिरोध टूट पाता है।


