स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने वसंत पंचमी पर भी नहीं किया गंगा स्नान, 5 दिन से धरने पर बैठे शंकराचार्य को तेज बुखार, जानें क्या हुआ
तेज बुखार से पीड़ित होने के कारण वह दोपहर तक अपने वाहन के अंदर ही रहे। हालांकि उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने व्यक्तिगत रूप से उनसे मुलाकात कर क्षमायाचना की और स्नान के लिए आग्रह किया, लेकिन शंकराचार्य ने इसे स्वीकार नहीं किया।

प्रयागराज। मौनी अमावस्या के दिन स्नान से रोके जाने और शिष्यों के साथ कथित पुलिस मारपीट को लेकर नाराज चल रहे जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने वसंत पंचमी के पावन पर्व पर भी गंगा स्नान नहीं किया। अधिकारियों की ओर से सार्वजनिक माफी न मांगे जाने से आहत शंकराचार्य त्रिवेणी मार्ग स्थित अपने शिविर के बाहर पूरे दिन बैठे रहे। तेज बुखार से पीड़ित होने के कारण वह दोपहर तक अपने वाहन के अंदर ही रहे। हालांकि उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने व्यक्तिगत रूप से उनसे मुलाकात कर क्षमायाचना की और स्नान के लिए आग्रह किया, लेकिन शंकराचार्य ने इसे स्वीकार नहीं किया। उनका कहना था कि जब तक मुख्यमंत्री स्तर से संवेदना और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक वह गंगा स्नान नहीं करेंगे।
मुख्यमंत्री पर सवाल
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उप मुख्यमंत्री के रवैये की सराहना करते हुए कहा कि भाजपा में “कम से कम ऐसे नेता भी हैं, जिन्हें गलती होने पर ग्लानि हुई।” उन्होंने कहा कि केशव प्रसाद मौर्य ने कम से कम संवेदना तो व्यक्त की, जबकि पार्टी के अन्य नेता मौन साधे हुए हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उप मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री नहीं हैं और निर्णय लेने की वास्तविक जिम्मेदारी मुख्यमंत्री की है। उन्होंने कहा, “डिप्टी सीएम समझते हैं कि उनके अधिकारियों से गलती हुई है और इसका नुकसान उनकी पार्टी को हो रहा है। ऐसे समझदार व्यक्ति को मुख्यमंत्री होना चाहिए। जो व्यक्ति अकड़ में बैठा हो और जिसके भीतर बदले की भावना हो, उसे मुख्यमंत्री नहीं होना चाहिए।”
‘मुख्यमंत्री के इशारे पर हुआ मेरा अपमान’
शंकराचार्य ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि मौनी अमावस्या के दिन उन्हें जानबूझकर गंगा स्नान से रोका गया और यह सब मुख्यमंत्री के इशारे पर हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई गलती नहीं हुई थी तो अब तक दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने कहा, “मौनी अमावस्या पर मुझे स्नान नहीं करने दिया गया। अब उप मुख्यमंत्री के आग्रह पर मैं कैसे स्नान कर लूं? मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले में अब तक कुछ नहीं कहा है।”
भाजपा पर तीखे सवाल
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सबसे पहले भाजपा से अपेक्षा की जाती है कि वह हिंदुओं और संत समाज के साथ खड़ी होगी। उन्होंने सवाल किया कि क्या भाजपा यह मानती है कि संतों और बटुकों के साथ जो हुआ, वह सही था? उन्होंने कहा, “भाजपा क्यों चुप है, यह प्रश्न कोई क्यों नहीं बना रहा? क्या भाजपा मानती है कि जो कर दिया वही सही है? अब जनता को तय करना है कि ऐसी सोच रखने वालों को आगे मौका देना है या नहीं।”
‘कालनेमि’ बयान पर पलटवार
मुख्यमंत्री द्वारा सनातन धर्म को ‘कालनेमियों’ से खतरा बताए जाने वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि कालनेमि कौन है, यह मुख्यमंत्री बेहतर जानते होंगे। उन्होंने कहा, “जिस तरह इस्लाम में खलीफा राजा भी होता है और धार्मिक भी, उसी रास्ते पर भाजपा चल रही है। धर्मगुरुओं का अस्तित्व समाप्त करने के लिए उन्हें सत्ता पर बैठाया जा रहा है, जो गलत है। धर्मगुरु और राजनीतिक नेताओं का काम अलग-अलग होता है।”
संजय सिंह की मुलाकात, समर्थन में बयान
इस पूरे घटनाक्रम के बीच आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात की और उनके साथ हुई घटना की निंदा की। संजय सिंह ने कहा, “जो लोग अपनी डिग्री नहीं दिखा पाए, वही आज शंकराचार्य होने का प्रमाण मांग रहे हैं। संतों को अपमानित करना और उन्हें गंगा स्नान से रोकना घोर अपराध है।” उन्होंने इसे आस्था और धर्मगुरुओं के सम्मान से जुड़ा गंभीर मामला बताया।
विधिक सलाह में जुटीं कमेटियां
माघ मेला प्रशासन की ओर से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को दिए गए दो नोटिसों पर उनके जवाब के बाद अब प्रशासन विधिक सलाह लेने में जुट गया है। वसंत पंचमी स्नान पर्व के समापन के बाद शुक्रवार देर शाम मेला प्रशासन की गठित कमेटियों ने प्रयागराज मेला प्राधिकरण के अधिवक्ताओं के पैनल से बातचीत की। मेलाधिकारी ऋषि राज ने बताया कि दो दिन पहले गठित दोनों कमेटियां सभी तथ्यों और कानूनी पहलुओं का अध्ययन कर रही हैं। कई बिंदुओं पर शनिवार को भी विधिक सलाह ली जाएगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई को लेकर रिपोर्ट मेला प्रशासन को सौंपी जाएगी।
संत समाज में नाराजगी, माहौल तनावपूर्ण
इस पूरे मामले ने संत समाज में नाराजगी और असंतोष का माहौल बना दिया है। कई संत संगठनों ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता और सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया है। वहीं प्रशासन इसे नियमों और व्यवस्थाओं से जोड़कर देख रहा है। फिलहाल सभी की निगाहें मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि सरकार इस विवाद को शांत करने के लिए क्या कदम उठाती है या यह मामला और तूल पकड़ता है।


