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SIT के सामने पेश हुए आप सांसद संजय सिंह: बोले- आठ करोड़ में खरीदी गई चार करोड़ की जमीन, सबूत सौंपे

संजय सिंह ने कहा कि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेजी साक्ष्य एसआईटी के समक्ष प्रस्तुत किए हैं। उनके अनुसार जांच दल ने उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों का अध्ययन कर आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

SIT के सामने पेश हुए आप सांसद संजय सिंह: बोले- आठ करोड़ में खरीदी गई चार करोड़ की जमीन, सबूत सौंपे
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लखनऊ: अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े भूमि सौदों और वित्तीय प्रबंधन को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने बृहस्पतिवार को विशेष जांच दल (एसआईटी) के प्रमुख विजय विश्वास पंत से मुलाकात कर कथित भूमि खरीद घोटाले से जुड़े दस्तावेज सौंपे। उन्होंने दावा किया कि अयोध्या में भगवान श्रीराम के नाम पर जमीनों की खरीद-फरोख्त में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं और संबंधित प्रमाण जांच एजेंसी को उपलब्ध करा दिए गए हैं। मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में संजय सिंह ने कहा कि जिन जमीनों का मूल्य कुछ समय पहले करोड़ों रुपये था, उन्हें बेहद कम अंतराल में कई गुना अधिक कीमत पर खरीदा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ भूमि सौदों में ऐसे लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनका संबंध राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े व्यक्तियों से बताया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग समय पर स्पष्टीकरण भी दिए जाते रहे हैं।

जांच एजेंसी को सौंपे गए दस्तावेज

संजय सिंह ने कहा कि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेजी साक्ष्य एसआईटी के समक्ष प्रस्तुत किए हैं। उनके अनुसार जांच दल ने उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों का अध्ययन कर आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ेगी और यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि अयोध्या में हुए कथित भूमि लेन-देन की पूरी प्रक्रिया की गहन जांच आवश्यक है ताकि सच्चाई सामने आ सके और जनविश्वास बना रहे।

एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट ने बढ़ाई चर्चा

इसी बीच एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को लेकर भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में ट्रस्ट की वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े कुछ गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। विशेष रूप से दान प्रबंधन, रिकॉर्ड संधारण और वित्तीय निगरानी प्रणाली को लेकर जांच टीम ने कई पहलुओं की समीक्षा की है। जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट में जिन बिंदुओं पर सवाल उठाए गए हैं, वे कई वर्ष पहले एक निजी ऑडिट फर्म द्वारा की गई टिप्पणियों से भी मेल खाते हैं। इससे यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या पहले दी गई चेतावनियों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया था।

ऑडिट रिपोर्ट में पहले ही जताई गई थीं आशंकाएं

सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2020 में ट्रस्ट के गठन के कुछ समय बाद एक निजी ऑडिट फर्म ने अपनी समीक्षा रिपोर्ट में कई प्रशासनिक और वित्तीय कमियों की ओर संकेत किया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि वित्तीय रिपोर्टिंग के लिए आवश्यक अभिलेखों और दस्तावेजों की व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है। फर्म ने यह भी सुझाव दिया था कि प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के लिए स्पष्ट और व्यवस्थित ढांचा तैयार किया जाए। उसके अनुसार यदि समय रहते आवश्यक सुधार नहीं किए गए तो पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

मानक संचालन प्रक्रिया लागू करने की सिफारिश

ऑडिट फर्म ने अपनी रिपोर्ट में ट्रस्ट को वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू करने की सलाह दी थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि बिना स्पष्ट प्रक्रियाओं के बड़े स्तर पर होने वाले लेन-देन और रिकॉर्ड प्रबंधन को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना कठिन हो सकता है। फर्म ने लेन-देन की निगरानी, डेटा प्रबंधन, मानव संसाधन संचालन और रिकॉर्ड संधारण के लिए अलग-अलग दिशानिर्देश तैयार करने की सिफारिश भी की थी। उद्देश्य यह था कि भविष्य में किसी प्रकार की गड़बड़ी या भ्रम की स्थिति न बने।

दान और आभूषणों के रिकॉर्ड पर विशेष चिंता

ऑडिट रिपोर्ट में सबसे गंभीर चिंता दान और आभूषणों के रिकॉर्ड को लेकर व्यक्त की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार केवल नकद दान ही नहीं, बल्कि सोना, चांदी, आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुओं के लिए भी व्यवस्थित रिकॉर्ड प्रणाली विकसित की जानी चाहिए थी। फर्म ने सुझाव दिया था कि सभी प्रकार के दान का अद्यतन स्टॉक रजिस्टर रखा जाए और उसकी नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही बैंक समन्वय और वित्तीय नियंत्रण के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की नियुक्ति पर भी जोर दिया गया था।

डेटा सुरक्षा और डिजिटल रिकॉर्ड पर भी सवाल

रिपोर्ट में सूचना प्रौद्योगिकी और डेटा सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को भी महत्वपूर्ण बताया गया था। ऑडिट फर्म ने कहा था कि संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा, डिजिटल रिकॉर्ड के सत्यापन और डेटा एंट्री की निगरानी के लिए मजबूत नियंत्रण तंत्र आवश्यक है। सूत्रों के अनुसार उस समय यह भी कहा गया था कि यदि डिजिटल प्रबंधन प्रणाली को मजबूत नहीं किया गया तो भविष्य में रिकॉर्ड की सटीकता और पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है।

अंतिम रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

फिलहाल एसआईटी अपनी जांच को आगे बढ़ा रही है और विभिन्न पक्षों से जानकारी एकत्र कर रही है। भूमि खरीद के आरोपों से लेकर चढ़ावे और दान प्रबंधन से जुड़े मुद्दों तक कई पहलुओं की समीक्षा की जा रही है। जांच के बीच सामने आए दस्तावेज और पुरानी ऑडिट रिपोर्ट अब इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सभी की निगाहें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि आरोपों और आशंकाओं में कितनी सच्चाई है तथा आगे किस प्रकार की कार्रवाई की जाएगी।


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