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राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक से पहले संतों का कड़ा रुख; बोले- "साधु के भेष में छिपे 'कालनेमि' को न मिले मंदिर व्यवस्था में जगह!"

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आगामी बैठक को लेकर संतों, धर्माचार्यों और राम मंदिर से जुड़े लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। यह बैठक 22 जुलाई को प्रस्तावित है। राम मंदिर में चढ़ावे और वित्तीय मामलों को लेकर उठे सवालों के बीच इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। संत समाज और अन्य पक्षों ने उम्मीद जताई है कि बैठक में व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं।

राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक से पहले संतों का कड़ा रुख; बोले- साधु के भेष में छिपे कालनेमि को न मिले मंदिर व्यवस्था में जगह!
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अयोध्या। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आगामी बैठक को लेकर संतों, धर्माचार्यों और राम मंदिर से जुड़े लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। यह बैठक 22 जुलाई को प्रस्तावित है। राम मंदिर में चढ़ावे और वित्तीय मामलों को लेकर उठे सवालों के बीच इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। संत समाज और अन्य पक्षों ने उम्मीद जताई है कि बैठक में व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं।

तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक बेहद महत्वपूर्ण है और इसमें कुछ विशेष निर्णय लिए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो भी लोग किसी मामले में दोषी पाए गए हैं, उन्हें हटाया जाना चाहिए, लेकिन केवल अफवाहों के आधार पर किसी निर्दोष व्यक्ति का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

परमहंस आचार्य ने ट्रस्ट में होने वाली नई नियुक्तियों को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, जो भी नई नियुक्तियां हों, उसमें जरूर ध्यान देना चाहिए कि सपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी से जुड़ा हुआ कोई घुस न पाए, नहीं तो आगे चलकर बहुत बड़ा कांड करेगा। क्योंकि इंडिया ब्लॉक का यही प्रयास है कि किसी तरह से उसका आदमी घुस जाए और इसके बाद वह कुछ इतना बड़ा कांड करेगा कि जिसको झेलना मुश्किल हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि ट्रस्ट में ऐसे लोगों को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए जो पूरी तरह राम भक्त, धार्मिक भावना रखने वाले और मंदिर की मर्यादा को समझने वाले हों। उन्होंने कहा कि किसी ऐसे व्यक्ति को स्थान नहीं मिलना चाहिए जो बाहर से साधु का रूप रखता हो, लेकिन असल में कालनेमि हो।

वहीं, रामदल ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित कल्कि राम ने कहा कि ट्रस्ट में किसे शामिल किया जाए और किसे नहीं, यह बैठक का विषय है, लेकिन स्थानीय लोगों और संत परंपरा से जुड़े लोगों को भी उचित स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिर व्यवस्था का संचालन धार्मिक परंपराओं के अनुसार होना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी तरह के विवाद की स्थिति न बने।

उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट बनने के बाद समाज में जो भी सवाल उठे हैं, उनका समाधान जरूरी है। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में अपनी सहभागिता की इच्छा भी जाहिर की।

बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व वादी इकबाल अंसारी ने भी ट्रस्ट की बैठक को अयोध्या के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट में नए लोगों के शामिल होने से व्यवस्था बेहतर हो सकती है। उन्होंने कहा कि अगर ज्यादा लोग जिम्मेदारी संभालेंगे तो काम का बंटवारा बेहतर तरीके से हो सकेगा और भविष्य में चढ़ावा चोरी जैसी घटनाओं की संभावना कम होगी।

इकबाल अंसारी ने कहा कि भगवान से जुड़ी वस्तुओं और मंदिर के धन की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। श्रद्धालु बड़ी आस्था के साथ मंदिर में दान देते हैं और इस धन का उपयोग धार्मिक कार्यों, भंडारे और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं, खासकर गरीब और दूर-दराज से आने वाले लोगों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है। धर्मशालाएं, भंडारे और अन्य व्यवस्थाएं इसी उद्देश्य से संचालित होनी चाहिए।



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