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राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO का फैसला जल्द, 5585 आवेदनों से चुने गए तीन नाम; आज होगा अंतिम निर्णय

CEO पद के लिए चयन प्रक्रिया की शुरुआत बड़ी संख्या में आवेदनों के साथ हुई थी। समिति के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली के अनुसार, कुल 5585 आवेदन प्राप्त हुए थे। तकनीकी स्क्रीनिंग और मैनुअल मूल्यांकन के बाद आवेदनों की छंटनी की गई।

राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO का फैसला जल्द, 5585 आवेदनों से चुने गए तीन नाम; आज होगा अंतिम निर्णय
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अयोध्या: Ram Mandir Trust CEO Selection: श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। करीब दो महीने तक चली चयन प्रक्रिया के बाद चयन समिति ने तीन योग्य उम्मीदवारों का पैनल ट्रस्ट को सौंप दिया है। अब ट्रस्ट की बैठक में इन तीन नामों में से एक पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। इसके साथ ही यह तय हो जाएगा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े इस महत्वपूर्ण संस्थान की प्रशासनिक जिम्मेदारी किस अधिकारी को दी जाएगी।

चयन समिति ने सौंपी तीन नामों की सूची

चयन समिति ने मंगलवार को ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि को तीन नामों का पैनल सौंपा। इस दौरान ट्रस्टी महंत दिनेंद्रदास, अंतरिम महासचिव कृष्णमोहन, जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी, विशेष आमंत्रित सदस्य दिनेश, सचिव जगदीश आफले, जगन्नाथ गुलवे और बजरंग बागड़ा समेत अन्य सदस्य मौजूद रहे। ट्रस्ट की बुधवार को होने वाली बैठक में तीनों नामों पर विचार किया जाएगा। इसके बाद एक उम्मीदवार का चयन कर CEO पद की जिम्मेदारी सौंपे जाने की उम्मीद है।

5585 आवेदनों से तीन नाम तक पहुंची प्रक्रिया

CEO पद के लिए चयन प्रक्रिया की शुरुआत बड़ी संख्या में आवेदनों के साथ हुई थी। समिति के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली के अनुसार, कुल 5585 आवेदन प्राप्त हुए थे। तकनीकी स्क्रीनिंग और मैनुअल मूल्यांकन के बाद आवेदनों की छंटनी की गई। कई स्तरों पर जांच और मूल्यांकन के बाद 17 उम्मीदवारों को अंतिम दौर के लिए चुना गया। इनमें से 16 उम्मीदवारों का 11 और 12 अगस्त को रामजन्मभूमि परिसर में साक्षात्कार हुआ। एक उम्मीदवार स्वास्थ्य कारणों से साक्षात्कार में शामिल नहीं हो सका। इससे पहले 3 से 6 अगस्त के बीच उम्मीदवारों के साथ ऑनलाइन संवाद भी किया गया था। साक्षात्कार और विभिन्न चरणों में हुए मूल्यांकन के आधार पर अब तीन नामों का पैनल तैयार किया गया है।

जुलाई में शुरू हुई थी चयन प्रक्रिया

CEO चयन के लिए समिति का गठन 6 जुलाई को किया गया था। 11 जुलाई को हुई पहली बैठक में चयन प्रक्रिया और पात्रता के मानदंड तय किए गए। इसके बाद 14 जुलाई को समीर पंडा को समिति का सचिव नियुक्त किया गया और 18 जुलाई को आवेदन प्रक्रिया बंद कर दी गई। जुलाई के बाकी दिनों में आवेदनों की तकनीकी जांच और मूल्यांकन किया गया। अगस्त में ऑनलाइन संवाद और प्रत्यक्ष साक्षात्कार के चरण पूरे किए गए। समिति ने उम्मीदवारों की नेतृत्व क्षमता, प्रबंधन कौशल, सत्यनिष्ठा और संस्थागत दृष्टिकोण को भी मूल्यांकन का हिस्सा बनाया।

प्रशासनिक अनुभव वाले अधिकारियों के नाम चर्चा में

CEO पद को लेकर पहले से कई अधिकारियों के नाम चर्चा में रहे हैं। इनमें पूर्व IAS अधिकारी योगेश्वर राम मिश्र, पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय, पूर्व बिहार कैडर के IPS अधिकारी डॉ. परेश सक्सेना और IAS अधिकारी दिनेश सिंह के नाम प्रमुख हैं। राजेश पांडेय के पास पुलिस, सुरक्षा और बड़े आयोजनों के प्रबंधन का अनुभव बताया जाता है। वहीं योगेश्वर राम मिश्र प्रशासनिक और शासन से जुड़ी विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। डॉ. परेश सक्सेना की पृष्ठभूमि पुलिस प्रशासन के साथ चिकित्सा क्षेत्र से भी जुड़ी रही है। दिनेश सिंह कई जिलों में जिलाधिकारी की जिम्मेदारी निभा चुके हैं और जनसंवाद आधारित कार्यशैली के लिए भी चर्चा में रहे हैं।

योगेश्वर राम मिश्र की दावेदारी मजबूत मानी जा रही

ट्रस्ट से जुड़े एक पदाधिकारी के अनुसार, पूर्व IAS अधिकारी योगेश्वर राम मिश्र की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। उन्होंने जिलाधिकारी से लेकर मंडलायुक्त तक की जिम्मेदारियां संभाली हैं। प्रशासनिक तंत्र की समझ और अलग-अलग सरकारी विभागों के बीच समन्वय का अनुभव उनके पक्ष में जा सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला ट्रस्ट की बैठक में ही होगा। चयन समिति ने तीन नामों का पैनल सौंप दिया है और अब ट्रस्ट को इनमें से एक नाम चुनना है।

पारदर्शी और योग्यता आधारित प्रक्रिया का दावा

समिति के सचिव समीर पंडा के अनुसार पूरी चयन प्रक्रिया योग्यता, संस्थागत उत्कृष्टता, पारदर्शिता और पेशेवर आचरण के मानकों को ध्यान में रखकर पूरी की गई। समिति का दावा है कि अंतिम तीनों उम्मीदवार नेतृत्व क्षमता, प्रबंधन विशेषज्ञता और सत्यनिष्ठा के निर्धारित मानकों पर खरे उतरते हैं। अब बुधवार की बैठक पर सभी की नजरें हैं। ट्रस्ट के फैसले के साथ श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के प्रशासनिक ढांचे में एक नए अध्याय की शुरुआत होगी।


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