श्रीराम जन्मभूमि चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर नई SIT गठित, आईपीएस अधिकारियों को सौंपी गई जांच
सूत्रों के अनुसार वर्ष 2008 बैच के आईपीएस अधिकारी किरण एस. को नई एसआईटी का प्रमुख बनाया गया है। किरण एस. इससे पहले इंटरपोल और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जैसी संस्थाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।

लखनऊ: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया है। यह नई एसआईटी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की अगुवाई में मामले की जांच करेगी। हालांकि सरकार ने अभी तक आधिकारिक रूप से एसआईटी के सदस्यों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार जांच की जिम्मेदारी लखनऊ के आईजी किरण एस. को सौंपी गई है। सूत्रों का यह भी कहना है कि अयोध्या रेंज के डीआईजी सोमेन बर्मा और अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डॉ. गौरव ग्रोवर को एसआईटी का सदस्य बनाया गया है। सरकार की ओर से इन नामों की औपचारिक पुष्टि फिलहाल नहीं की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने आईपीएस अधिकारियों से जांच कराने को कहा था
20 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीर आपराधिक प्रकृति का बताते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि जांच वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की एसआईटी से कराई जाए। अदालत ने निष्पक्ष और प्रभावी जांच सुनिश्चित करने के लिए उच्च स्तर की टीम गठित करने पर जोर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गृह विभाग को तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से अदालत के आदेश का अध्ययन कर उसके अनुरूप नई एसआईटी गठित करने और जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाने को कहा।
किरण एस. को जांच की कमान मिलने की चर्चा
सूत्रों के अनुसार वर्ष 2008 बैच के आईपीएस अधिकारी किरण एस. को नई एसआईटी का प्रमुख बनाया गया है। किरण एस. इससे पहले इंटरपोल और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जैसी संस्थाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। उनके अनुभव को देखते हुए सरकार ने उन्हें इस संवेदनशील मामले की जांच की जिम्मेदारी देने का निर्णय लिया है। बताया जा रहा है कि वह 13 जून को मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में गठित पहली एसआईटी के भी सदस्य थे। हालांकि नई एसआईटी का गठन सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बाद किया गया है, जिसमें आईपीएस अधिकारियों की भूमिका सुनिश्चित की गई है।
27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में दी जाएगी जानकारी
सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार 27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करेगी। इसी रिपोर्ट के साथ नई एसआईटी के गठन और उसके सदस्यों की जानकारी भी अदालत को उपलब्ध कराई जाएगी। संभावना है कि अदालत में जानकारी प्रस्तुत किए जाने के बाद ही सरकार आधिकारिक रूप से एसआईटी के सदस्यों के नाम सार्वजनिक करेगी। फिलहाल गृह विभाग ने इस संबंध में कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया है।
पहली एसआईटी पहले से कर रही थी जांच
इस मामले की प्रारंभिक जांच के लिए राज्य सरकार ने पहले 13 जून को मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। इस टीम ने 15 जून से अयोध्या में जांच शुरू की और विभिन्न संबंधित पक्षों से पूछताछ तथा दस्तावेजों का परीक्षण किया। 22 जून को एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप दी थी। रिपोर्ट के साथ टीम ने यह भी कहा था कि मामले का दायरा अपेक्षा से अधिक व्यापक है, इसलिए अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता होगी।
30 जुलाई तक अंतिम रिपोर्ट सौंपने की समयसीमा
पहली एसआईटी के अनुरोध पर राज्य सरकार ने अंतिम जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समयसीमा बढ़ाते हुए 30 जुलाई तक का समय दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद गठित नई एसआईटी इस मामले की जांच को आगे बढ़ाएगी। यह स्पष्ट नहीं है कि नई टीम पहले की जांच रिपोर्ट का किस प्रकार उपयोग करेगी या जांच को किस स्तर से आगे बढ़ाया जाएगा।
मामले पर बनी हुई है सभी की नजर
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े इस संवेदनशील मामले पर न्यायपालिका, राज्य सरकार और आम जनता की नजर बनी हुई है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में आगे बढ़ रही जांच से यह उम्मीद की जा रही है कि पूरे मामले के तथ्यों का निष्पक्ष परीक्षण होगा और यदि किसी स्तर पर अनियमितता या आपराधिक कृत्य सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। सरकार की ओर से अब सभी की निगाहें 27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में पेश की जाने वाली स्टेटस रिपोर्ट और नई एसआईटी के आधिकारिक विवरण पर टिकी हुई हैं। इससे जांच की आगामी दिशा और प्रक्रिया को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट होने की संभावना है।


