Uttar Pardesh: मतदाता सूची में गड़बड़ी का मामला: तीन अधिकारियों पर FIR, 16,504 प्रविष्टियों में हेरफेर का आरोप
शिकायतों के मुताबिक, भिकारीपुर गांव की साजदा बी का नाम बदलकर उजैरा हुसैन कर दिया गया, जबकि जैबुननिशा का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया। आरोप है कि इस तरह की गड़बड़ी कई अन्य मतदाताओं के साथ भी हुई।

पीलीभीत: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची में कथित हेरफेर का गंभीर मामला सामने आया है। शहर विधानसभा क्षेत्र में फार्म-8 के दुरुपयोग के जरिए मतदाताओं के नाम, पते और अन्य विवरणों में बदलाव किए जाने की शुरुआती जांच में पुष्टि होने के बाद तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। इनमें अमरिया के तत्कालीन निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) और एसडीएम हेमंत चौधरी, पूर्व एसडीएम मयंक गोस्वामी तथा कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार शामिल हैं। जिला प्रशासन ने मामले की जांच तेज कर दी है। जिलाधिकारी आलोक कुमार ने कहा कि जिन मतदाताओं के विवरण में बदलाव किया गया है, उन्हें जल्द दुरुस्त कराया जाएगा।
नाम बदलने से लेकर वोट काटने तक के आरोप
शिकायतों के मुताबिक, भिकारीपुर गांव की साजदा बी का नाम बदलकर उजैरा हुसैन कर दिया गया, जबकि जैबुननिशा का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया। आरोप है कि इस तरह की गड़बड़ी कई अन्य मतदाताओं के साथ भी हुई। कांग्रेस ने दावा किया है कि शहर विधानसभा क्षेत्र के 419 बूथों पर मतदाता सूची की कुल 16,504 प्रविष्टियों में गड़बड़ी की गई। पार्टी नेता कुमुद गंगवार के अनुसार, 13,150 मतदाताओं या उनके पिता के नाम में बदलाव किया गया, 804 मतदाताओं के नाम हटाए गए और करीब 2,600 नए नाम कथित तौर पर गलत तरीके से जोड़े गए। हालांकि, ये आंकड़े कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप हैं। इन सभी प्रविष्टियों की गड़बड़ी की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
फार्म-8 के जरिए कैसे हुआ कथित फर्जीवाड़ा?
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के समाप्त होने के बाद भी निरंतर पुनरीक्षण की प्रक्रिया जारी रहती है। इसके तहत फार्म-8 के माध्यम से मतदाता अपने नाम, पते और अन्य विवरणों में संशोधन का अनुरोध कर सकते हैं। नियमों के अनुसार, आवेदन निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के पास पहुंचता है। जांच और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही विवरण में बदलाव किया जाता है। पीलीभीत में आरोप है कि इसी प्रक्रिया का दुरुपयोग करके मतदाताओं की जानकारी बदली गई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मतदाता पहचान पत्र (ईपीआईसी) नंबर ऑनलाइन खोजने पर गलत विवरण दिखाई दे रहे थे।
शिकायतों के बाद अधिकारियों पर कार्रवाई
इस मामले में राजनीतिक दलों की ओर से निर्वाचन आयोग से शिकायतें की गई थीं। बताया गया है कि लगातार शिकायतें मिलने के बाद 10 जुलाई को तत्कालीन एसडीएम मयंक गोस्वामी का पूरनपुर तहसील में तबादला कर दिया गया था और बाद में अमरिया में हेमंत चौधरी की तैनाती हुई। हालांकि, शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, इसके बाद भी कथित गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आती रहीं। निर्वाचन आयोग के निर्देश पर जिलाधिकारी ने बुधवार को हेमंत चौधरी, मयंक गोस्वामी और अनिल कुमार को उनके पदों से हटाकर जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया। इसके बाद शुरुआती जांच में मतदाताओं के विवरण में बदलाव की पुष्टि होने पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई। डीएम आलोक कुमार ने बताया कि शिकायतों की जांच कराई जा रही थी और तथ्य सामने आने के बाद कार्रवाई की गई। प्रशासन अब सभी विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की दोबारा जांच कराने की तैयारी कर रहा है, ताकि फार्म-8 के दुरुपयोग की आशंका को रोका जा सके।
कांग्रेस और सपा ने लगाए राजनीतिक आरोप
कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बदलाव तत्कालीन जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार सिंह और शहर विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं गन्ना राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार के इशारे पर किए गए। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष धर्मेश गंगवार ने भी आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारियों ने मंत्री के निर्देश पर कथित गड़बड़ी की और मुस्लिम मतदाताओं के नामों को विशेष रूप से प्रभावित किया। हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्राथमिकी दर्ज होने का अर्थ भी आरोपों का साबित होना नहीं है। मामले में जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
अब सभी विधानसभा क्षेत्रों की सूचियों की जांच
पीलीभीत का यह मामला मतदाता सूची की शुद्धता और पुनरीक्षण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। प्रशासन के सामने अब दो प्रमुख चुनौतियां हैं—कथित गड़बड़ी के लिए जिम्मेदारी तय करना और प्रभावित मतदाताओं के सही विवरण बहाल करना। साथ ही, सभी विधानसभा क्षेत्रों की सूचियों की जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि मामला केवल शहर विधानसभा क्षेत्र तक सीमित है या कहीं और भी ऐसी अनियमितताएं हुई हैं।


