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राम मंदिर से हटे अधिकारी: 17 साल बाद अर्जुन देव का ट्रांसफर

राम मंदिर मामले में चल रही जांच के बीच 17 सालों से मंदिर परिसर में सेवाएं दे रहे एक अधिकारी का ट्रांसफर किया गया है। कहा जा रहा है कि एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला लिया गया है।

राम मंदिर से हटे अधिकारी: 17 साल बाद अर्जुन देव का ट्रांसफर
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एसआईटी रिपोर्ट का असर: गोरखपुर भेजे गए आरएमओ अधिकारी

  • सीसीटीवी निगरानी पर सवाल: जांच में फंसे अर्जुन देव सिंह
  • राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: आठ आरोपी जेल में, 14 दिन की न्यायिक हिरासत
  • बैंकों को नोटिस: ट्रस्ट और आरोपियों के खातों की पड़ताल

अयोध्या। राम मंदिर मामले में चल रही जांच के बीच 17 सालों से मंदिर परिसर में सेवाएं दे रहे एक अधिकारी का ट्रांसफर किया गया है। कहा जा रहा है कि एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला लिया गया है।

वायरलेस डिपार्टमेंट के अधिकारी अर्जुन देव सिंह राम मंदिर परिसर में रेडियो मेंटेनेंस ऑफिसर के पद पर तैनात थे। बताया जा रहा है कि वह पिछले 17 सालों से यहां सेवाएं दे रहे थे। उनका कई बार ट्रांसफर भी किया गया, लेकिन अंत में किसी न किसी वजह से ट्रांसफर टलता रहा और वह अयोध्या में ही जमे रहे।

कहा जा रहा है कि एसआईटी की रिपोर्ट में उनकी भूमिका पर सवाल उठाए गए, क्योंकि मंदिर परिसर में लगे सभी सीसीटीवी की निगरानी और वायरलेस की जिम्मेदारी अर्जुन देव की थी।

साल 2024 में जब राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम हुआ था, तब अर्जुन देव सिंह का ट्रांसफर कर दिया गया था, लेकिन ट्रस्ट और अधिकारियों के निवेदन पर उनका ट्रांसफर रोक दिया गया था। हालांकि, अब उनका ट्रांसफर गोरखपुर कर दिया गया है, और वह रवाना भी हो गए हैं।

इस बीच, राम मंदिर चढ़ावा मामले में गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों को सोमवार को अयोध्या की एक अदालत ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। इस मामले में सभी आरोपियों को अब 13 जुलाई को कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा।

इसके साथ ही, पुलिस ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई), बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक सहित लगभग छह बैंकों को नोटिस जारी किया है और गिरफ्तार आरोपियों, ट्रस्ट और अन्य लोगों के बैंक खातों और लॉकरों की जानकारी मांगी है। बताया जा रहा है कि इस मामले की जांच में करीब 70 से 80 लोग हैं, जिन्हें बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया जाएगा।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अयोध्या में राम मंदिर से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा प्राप्त दान और चढ़ावे के प्रबंधन की अदालत की निगरानी में जांच और फोरेंसिक ऑडिट की मांग करने वाली जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया।


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