नोएडा प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में कई बड़े फैसले, किसानों के मुआवजे में 53 प्रतिशत तक बढ़ोतरी
नोएडा प्राधिकरण की 223वीं बोर्ड बैठक में शहर के विकास, नागरिक सुविधाओं, औद्योगिक गतिविधियों, रुकी हुई रियल एस्टेट परियोजनाओं और किसानों से जुड़ी भूमि खरीद को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक 5 सितंबर 2026 को सेक्टर-96 स्थित प्राधिकरण के मुख्य प्रशासनिक भवन के सभागार में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त तथा नोएडा प्राधिकरण के अध्यक्ष दीपक कुमार की अध्यक्षता में आयोजित हुई।

नोएडा। नोएडा प्राधिकरण की 223वीं बोर्ड बैठक में शहर के विकास, नागरिक सुविधाओं, औद्योगिक गतिविधियों, रुकी हुई रियल एस्टेट परियोजनाओं और किसानों से जुड़ी भूमि खरीद को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक 5 सितंबर 2026 को सेक्टर-96 स्थित प्राधिकरण के मुख्य प्रशासनिक भवन के सभागार में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त तथा नोएडा प्राधिकरण के अध्यक्ष दीपक कुमार की अध्यक्षता में आयोजित हुई।
बैठक में नोएडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्ण करुणेश, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एनजी रवि कुमार, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी शैलेन्द्र भाटिया समेत बोर्ड के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 में 31 अगस्त तक प्राधिकरण की वित्तीय और भौतिक प्रगति की समीक्षा की गई। विभागवार आय, भुगतान और प्रमुख विकास कार्यों की स्थिति पर चर्चा करते हुए निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए गए।
बोर्ड ने शहर की दीर्घकालीन नागरिक सेवाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए वन-टाइम लीज रेंट कॉरपस फंड (ओटीएलआर-सीएफ) की स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स को मंजूरी दी। इस फंड के माध्यम से एकमुश्त भूभाटक से प्राप्त गैर-आवर्ती आय का व्यवस्थित लेखांकन, निवेश, उपयोग और निगरानी की जाएगी। इसका उद्देश्य जलापूर्ति, सफाई, सार्वजनिक स्वास्थ्य और नागरिक अवस्थापना के रखरखाव के लिए लंबे समय तक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना है।
पुरानी और रुकी हुई रियल एस्टेट परियोजनाओं को गति देने के लिए लागू नीति की भी समीक्षा की गई। 25 प्रतिशत देय धनराशि जमा करने वाले 23 आवंटियों को शेष 75 प्रतिशत राशि जमा कराने के नोटिस जारी किए गए हैं।
भुगतान के अनुपात में रजिस्ट्रियों की अनुमति भी दी गई है। अब तक 36 परियोजनाओं से 540.75 करोड़ रुपये तथा अन्य आंशिक भुगतानों को मिलाकर कुल 561.35 करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं। बोर्ड ने लंबित परियोजनाओं में बकाया वसूली बढ़ाने और फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री तेजी से कराने के निर्देश दिए।
यूनिफाइड रेगुलेशंस, 2025 के तहत औद्योगिक इकाइयों से जुड़े प्रावधानों की समीक्षा की गई। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में औद्योगिक इकाइयों के लिए अंतरण शुल्क, इकाई को क्रियाशील करने की समय सीमा तथा अन्य शुल्क और प्रक्रियाओं को तर्कसंगत एवं एकरूप बनाने पर विचार किया गया। इसके लिए दोनों प्राधिकरणों के अधिकारियों की समिति गठित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
गौतमबुद्धनगर पुलिस आयुक्त कार्यालय के उपयोग के लिए सेक्टर-153 में लगभग 13,347.18 वर्गमीटर भूमि आवंटित करने का निर्णय लिया गया। इससे पुलिस प्रशासन के लिए आवश्यक कार्यालयीन एवं संस्थागत ढांचे के विकास का रास्ता साफ होगा। नोएडा में सूखे और आरडीएफ कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए सेक्टर-145 में 100 टन प्रतिदिन क्षमता वाली थर्मोलिसिस आधारित इंटीग्रेटेड वेस्ट टू एनर्जी एंड रिसोर्स रिकवरी फैसिलिटी स्थापित करने का फैसला लिया गया।
संस्था का चयन बीओआई/आरएफपी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। इस परियोजना से कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के साथ संसाधनों की रिकवरी और ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के कारण बिटुमिन की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि को देखते हुए सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली बिटुमिन आधारित मदों की दरों के पुनर्निर्धारण और शासनादेश के अनुसार मूल्य समायोजन का निर्णय लिया गया।
प्राधिकरण के मुताबिक इससे निर्माण कार्यों की निविदाओं में भागीदारी बढ़ाने, मानसून के बाद सड़क कार्य समय पर शुरू करने और निर्माण गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलेगी। उद्यान खंड-प्रथम की सेक्टर-8 स्थित लगभग 8 एकड़ की नर्सरी को बिल्ड अप, ऑपरेशन एंड मेंटिनेंस आधार पर विकसित करने का निर्णय लिया गया है। आरएफपी के जरिए एजेंसी का चयन किया जाएगा।
योजना के तहत नर्सरी को आधुनिक और आत्मनिर्भर सुविधा के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां नागरिकों को विभिन्न प्रकार के पौधों की एकीकृत सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। सहकारी आवासीय समितियों को आवंटित ग्रुप हाउसिंग भूखंडों पर बने फ्लैटों में वर्तमान कब्जेदार सब्सेक्वेंट मेंबर्स की समस्या के समाधान के लिए त्रिपक्षीय उप-पट्टा प्रलेख पंजीकृत करने की नीति को भी मंजूरी दी गई। इसके लिए समिति की एनओसी, निर्धारित अंतरण शुल्क और आवश्यक प्रमाण-पत्रों की व्यवस्था रखी गई है। इससे वैध कब्जेदारों को संपत्ति से संबंधित दस्तावेज प्राप्त करने में सुविधा होगी और लंबे समय से लंबित मामलों का निपटारा हो सकेगा। बैठक का सबसे महत्वपूर्ण फैसला किसानों से जुड़ी भूमि खरीद को लेकर रहा।
नोएडा के समग्र विकास में किसानों की सहभागिता को ध्यान में रखते हुए आपसी समझौते के आधार पर खरीदी जाने वाली भूमि के लिए 6,459 रुपये प्रति वर्गमीटर मुआवजा और 5 प्रतिशत विकसित आबादी भूखंड का लाभ देने पर सहमति बनी।
इससे पहले दो व्यवस्थाएं लागू थीं। 5 प्रतिशत आबादी भूखंड के बिना 5,324 रुपये प्रति वर्गमीटर, जबकि 5 प्रतिशत आबादी भूखंड के साथ 4,224 रुपये प्रति वर्गमीटर का लाभ दिया जाता था। अब प्रचलित दर में एकमुश्त लगभग 53 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए 6,459 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर निर्धारित की गई है। डीएनजीआईआर यानी न्यू नोएडा के विकास के लिए भी किसानों की भूमि खरीद को लेकर महत्वपूर्ण व्यवस्था की गई है।
फेस-1 और फेस-2 में आपसी समझौते के आधार पर भूमि खरीद के लिए प्रतिकर दर और 4 प्रतिशत आबादी भूखंड का लाभ ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के अनुरूप दिया जाएगा। वहीं फेस-3 और फेस-4 में भूमि खरीद के लिए प्रतिकर दर और 7 प्रतिशत आबादी भूखंड का लाभ यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण के अनुरूप दिए जाने का निर्णय लिया गया है।


