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उत्तर प्रदेश में नए मंत्रियों को मिला विभाग, योगी सरकार ने किया जिम्मेदारियों का बंटवारा

उत्तर प्रदेश में करीब एक सप्ताह पहले हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद आखिरकार नए मंत्रियों के विभागों का रविवार रात आवंटन कर दिया गया।

उत्तर प्रदेश में नए मंत्रियों को मिला विभाग, योगी सरकार ने किया जिम्मेदारियों का बंटवारा
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में करीब एक सप्ताह पहले हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद आखिरकार नए मंत्रियों के विभागों का रविवार रात आवंटन कर दिया गया। विभागों के बंटवारे में हुई देरी को लेकर राजनीतिक गलियारों में लगातार चर्चाएं चल रही थीं।

सरकार की ओर से जारी सूची में सभी नए मंत्रियों को जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं। विभाग मिलने के बाद अब नए मंत्री अपने-अपने मंत्रालयों का कार्यभार संभालेंगे। सरकार की ओर से जारी आवंटन सूची के अनुसार भूपेंद्र चौधरी को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।

मनोज पाण्डेय को खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति विभाग सौंपा गया है। अजीत सिंह पाल को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग का प्रभार मिला है। सोमेन्द्र तोमर को राजनीतिक पेंशन, सैनिक कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। कृष्णा पासवान को पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग का दायित्व सौंपा गया है, जबकि कैलाश सिंह राजपूत को ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग की जिम्मेदारी मिली है।

वहीं, राज्य मंत्रियों में सुरेन्द्र दिलेर को राजस्व विभाग से संबद्ध किया गया है। हंसराज विश्वकर्मा को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग में जिम्मेदारी दी गई है। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद से ही सबसे ज्यादा नजरें विभागों के बंटवारे पर टिकी थीं, लेकिन करीब एक सप्ताह तक विभागों की घोषणा नहीं होने से अटकलों का दौर जारी रहा।

ज्ञात हो कि बीते दिनों राजभवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कुल आठ नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई। इनमें छह नए चेहरे शामिल रहे। मंत्रिमंडल विस्तार में दो नेताओं को कैबिनेट मंत्री, दो को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा चार नेताओं को राज्य मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई।

राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में अजीत सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर ने शपथ ली। वहीं अन्य नेताओं को भी सरकार और संगठन के समीकरणों को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदारी सौंपी गई। मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के आवंटन को आगामी चुनावी रणनीति तथा सामाजिक समीकरणों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार ने क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने के साथ संगठन और सरकार के बीच तालमेल मजबूत करने की कोशिश की है।


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