अमेरिका में लापता भारतीय मर्चेंट नेवी अफसर मामले में नया दावा, परिवार ने उठाए सवाल
अमेरिका के पेंसिलवेनिया स्थित मार्कस हूक बंदरगाह से सात मई के बाद से उनका कोई संपर्क नहीं हो पाया था। अब जिस शिपिंग कंपनी के जरिए वह ड्यूटी पर गए थे, उसने परिवार को पत्र भेजकर दावा किया है कि मनीष को अमेरिका के डेलावेयर राज्य में गिरफ्तार किया गया है।

मीरजापुर : Missing Indian Merchant Navy Officer Manish Dwivedi in US: उत्तर प्रदेश के मीरजापुर निवासी और मर्चेंट नेवी में सेकेंड अफसर के पद पर कार्यरत मनीष द्विवेदी के लापता होने के मामले में अब नया मोड़ सामने आया है। अमेरिका के पेंसिलवेनिया स्थित मार्कस हूक बंदरगाह से सात मई के बाद से उनका कोई संपर्क नहीं हो पाया था। अब जिस शिपिंग कंपनी के जरिए वह ड्यूटी पर गए थे, उसने परिवार को पत्र भेजकर दावा किया है कि मनीष को अमेरिका के डेलावेयर राज्य में गिरफ्तार किया गया है। हालांकि परिवार ने कंपनी के इस दावे पर गंभीर सवाल उठाए हैं और कहा है कि अब तक कोई आधिकारिक प्रमाण उपलब्ध नहीं कराया गया है।
कंपनी का दावा
परिवार को भेजे गए पत्र में कंपनी के वकील जोस का हवाला देते हुए कहा गया है कि अमेरिकी एजेंसी यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन ने जानकारी दी है कि मनीष द्विवेदी को एक युवती से कथित छेड़छाड़ के आरोप में हिरासत में लिया गया है। पत्र में यह भी बताया गया कि मामले की सुनवाई 25 जून को होनी है। हालांकि कंपनी की ओर से इस संबंध में कोई कानूनी दस्तावेज या गिरफ्तारी से जुड़ा आधिकारिक रिकॉर्ड परिवार को नहीं सौंपा गया है।
परिवार ने जताया संदेह
मनीष द्विवेदी के परिवार ने कंपनी के दावों को लेकर गहरा संदेह व्यक्त किया है। परिवार का कहना है कि अब तक न तो अमेरिकी प्रशासन की ओर से गिरफ्तारी की पुष्टि की गई है और न ही भारतीय दूतावास ने कोई आधिकारिक जानकारी दी है। परिजनों का आरोप है कि कंपनी लगातार अलग-अलग बातें बताकर उन्हें भ्रमित कर रही है। उनका कहना है कि कहीं वास्तविक घटनाक्रम को छिपाने के लिए कोई कहानी तो नहीं बनाई जा रही।
पहले दी गई थी दूसरी जानकारी
परिवार के अनुसार, शुरुआत में कंपनी ने बताया था कि मनीष अपने जहाज ‘वेसल सिफ्नोस लेडी’ के कैप्टन, चीफ अफसर और एक कैडेट के साथ बाहर घूमने गए थे। बाद में केवल तीन लोग ही वापस लौटे और मनीष का कोई पता नहीं चला। इसके बाद कंपनी ने कहा कि किसी धक्का-मुक्की के मामले में मनीष को हिरासत में लिया गया है। लेकिन परिवार का कहना है कि उन्हें अब तक मनीष से सीधे बात नहीं कराई गई और न ही उनकी वर्तमान स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी दी गई।
मुंबई बुलाकर भी नहीं मिला संतोषजनक जवाब
मनीष के दादा रविशंकर दुबे और पिता संतोष द्विवेदी ने आरोप लगाया कि कंपनी ने उन्हें मुंबई बुलाया, लेकिन वहां भी उन्हें ठोस जानकारी नहीं दी गई। परिवार का कहना है कि कंपनी के अधिकारी लगातार टालमटोल कर रहे हैं और लिखित रूप में कोई स्पष्ट जवाब देने से बच रहे हैं। उनका आरोप है कि कंपनी के पास मनीष की मौजूदा स्थिति से जुड़ा कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है।
भारतीय एजेंसियों से हस्तक्षेप की मांग
मामले को लेकर परिवार ने भारत सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावास और जहाजरानी मंत्रालय से अनुरोध किया है कि मनीष द्विवेदी की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाए। परिवार का कहना है कि अगर मनीष सचमुच अमेरिकी हिरासत में हैं, तो भारतीय अधिकारियों को उनसे संपर्क कराना चाहिए और आधिकारिक जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए।
स्थानीय स्तर पर भी बढ़ी चिंता
मीरजापुर में मनीष द्विवेदी के परिवार और परिचितों के बीच इस घटना को लेकर चिंता का माहौल है। परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि मनीष लंबे समय से मर्चेंट नेवी में कार्यरत हैं और उनका रिकॉर्ड साफ-सुथरा रहा है। ऐसे में अचानक उन पर गंभीर आरोप लगने और आधिकारिक जानकारी न मिलने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
कंपनी की भूमिका पर उठ रहे सवाल
पूरे मामले में शिपिंग कंपनी की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। परिवार का कहना है कि कंपनी ने शुरुआत से पारदर्शिता नहीं बरती और हर बार नई जानकारी देकर भ्रम की स्थिति पैदा की। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशों में काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों के मामलों में कंपनियों और संबंधित एजेंसियों को अधिक जवाबदेही और पारदर्शिता दिखानी चाहिए।
जांच और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
फिलहाल मनीष द्विवेदी की वास्तविक स्थिति को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है। परिवार अब अमेरिकी प्रशासन और भारतीय दूतावास से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार कर रहा है। यह मामला विदेशों में काम करने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और आपात स्थिति में सूचना तंत्र की पारदर्शिता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।


