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नाबालिग बच्चों से आपत्तिजनक सोशल मीडिया वीडियो बनवाने के मामले में एनएचआरसी सख्त, एटा पुलिस और मेटा को नोटिस

उत्तर प्रदेश के एटा जिले में एक तथाकथित कोचिंग संस्थान द्वारा नाबालिग बच्चों से कथित तौर पर स्क्रिप्टेड, आपत्तिजनक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील सोशल मीडिया वीडियो बनवाने के मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने कड़ा संज्ञान लिया है।

नाबालिग बच्चों से आपत्तिजनक सोशल मीडिया वीडियो बनवाने के मामले में एनएचआरसी सख्त, एटा पुलिस और मेटा को नोटिस
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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के एटा जिले में एक तथाकथित कोचिंग संस्थान द्वारा नाबालिग बच्चों से कथित तौर पर स्क्रिप्टेड, आपत्तिजनक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील सोशल मीडिया वीडियो बनवाने के मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने कड़ा संज्ञान लिया है।

आयोग को मिली शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कोचिंग संस्थान की आड़ में छोटे बच्चों को बार-बार सोशल मीडिया वीडियो में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे उनकी गरिमा, निजता और मनोवैज्ञानिक सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। शिकायत में अभिभावकीय सहमति के बिना बच्चों के संभावित शोषण को लेकर भी चिंता जताई गई थी।

इस गंभीर मामले पर एनएचआरसी के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई की। आयोग ने मामले को बच्चों के अधिकारों का घोर उल्लंघन मानते हुए एटा के एसएसपी, जिलाधिकारी, मेटा इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर एंड कंट्री हेड और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी किया है। सभी से दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट (एटीआर) मांगी गई है।

आयोग ने एटा पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संबंधित बच्चों की पहचान कर आवश्यकतानुसार उन्हें बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। साथ ही उनकी सुरक्षा और काउंसलिंग सुनिश्चित की जाए।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अनुसार, जांच का मुख्य केंद्र बिंदु उन वयस्कों और तत्वों की भूमिका की पहचान करना होना चाहिए, जो बच्चों के माध्यम से कंटेंट की स्क्रिप्टिंग, रिकॉर्डिंग और अपलोडिंग करा रहे हैं या इस प्रक्रिया को बढ़ावा दे रहे हैं। इसके साथ ही, मामले में संज्ञेय अपराध पाए जाने पर प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

आयोग ने इस मामले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। मेटा इंडिया से पूछा गया है कि आखिर नाबालिग बच्चों से संबंधित ऐसी सामग्री को बार-बार अपलोड और प्रसारित होने की अनुमति कैसे मिली। क्या इस तरह के कंटेंट से कोई मोनेटाइजेशन या कमर्शियल लाभ लिया गया और संबंधित डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए कंपनी ने क्या कदम उठाए हैं।

एनएचआरसी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि इस पूरे मामले में बच्चों को मुख्यतः संरक्षण और सहायता की आवश्यकता वाले बच्चों के रूप में देखा जाए। जांच एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि बच्चों की पहचान, गरिमा और निजता की पूरी तरह से रक्षा की जाए और उन्हें किसी भी तरह से प्रताड़ित न किया जाए। कार्रवाई का मुख्य लक्ष्य वे लोग होंगे, जो बच्चों से स्क्रिप्ट लिखवाने, रिकॉर्डिंग, अपलोडिंग, कंट्रोल करने या व्यावसायिक शोषण में शामिल हैं।



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