मुरादाबाद अदालत से अमीषा पटेल के खिलाफ जारी किया गैर-जमानती वारंट, जानें क्या है मामला
ड्रीम विजन इवेंट कंपनी के मालिक पवन कुमार वर्मा ने 19 दिसंबर 2017 को अदालत में परिवाद दायर किया था। उन्होंने अमीषा पटेल, उनके सहयोगी अहमद शरीफ, पर्सनल असिस्टेंट (पीए) सुरेश परमार और पीआर कंपनी के मालिक राजकुमार गोस्वामी पर 11 लाख रुपये लेने के बावजूद कार्यक्रम में शामिल न होने का आरोप लगाया था।

मुरादाबाद। बॉलीवुड अभिनेत्री अमीषा पटेल के खिलाफ मुरादाबाद की एसीजेएम-5 (अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट) अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी किया है। यह आदेश अदालत में निर्धारित तारीख पर उनकी अनुपस्थिति के कारण पारित किया गया। कोर्ट ने अभिनेत्री को 27 मार्च को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। मामला एक शादी समारोह में परफॉर्मेंस के लिए ली गई 11 लाख रुपये की अग्रिम राशि से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला
ड्रीम विजन इवेंट कंपनी के मालिक पवन कुमार वर्मा ने 19 दिसंबर 2017 को अदालत में परिवाद दायर किया था। उन्होंने अमीषा पटेल, उनके सहयोगी अहमद शरीफ, पर्सनल असिस्टेंट (पीए) सुरेश परमार और पीआर कंपनी के मालिक राजकुमार गोस्वामी पर 11 लाख रुपये लेने के बावजूद कार्यक्रम में शामिल न होने का आरोप लगाया था। शिकायत के अनुसार, 16 नवंबर 2017 को दिल्ली रोड स्थित होलीडे रीजेंसी होटल में आयोजित एक शादी समारोह में अमीषा पटेल को चार गानों पर प्रस्तुति देनी थी। यह समारोह आयुष अग्रवाल की शादी का था। कार्यक्रम के लिए तय शर्तों के अनुसार, 11 लाख रुपये अग्रिम के रूप में दिए गए थे।
आरोप: रकम ली, लेकिन कार्यक्रम में नहीं पहुंचीं
शिकायतकर्ता का आरोप है कि रकम देने के बावजूद अभिनेत्री तय तिथि पर शादी समारोह में नहीं पहुंचीं। इसके चलते आयोजनकर्ता को आर्थिक और प्रतिष्ठात्मक नुकसान उठाना पड़ा। पवन कुमार वर्मा का कहना है कि उन्होंने राजकुमार गोस्वामी के माध्यम से अमीषा पटेल के पीए सुरेश परमार और अहमद शरीफ को 11 लाख रुपये की राशि अग्रिम में दी थी। कार्यक्रम के दिन अभिनेत्री के न आने पर आयोजकों को काफी असुविधा हुई।
समझौता और फिर विवाद
मामले में आगे चलकर दिसंबर 2024 में एक समझौता हुआ। शिकायतकर्ता के अनुसार, अमीषा पटेल ने ब्याज सहित कुल 14 लाख रुपये वापस करने पर सहमति जताई थी। इस समझौते के तहत छह लाख रुपये नकद दिए गए और 31 दिसंबर 2024 को दो लाख रुपये का चेक सौंपा गया। शेष राशि बाद में देने का आश्वासन दिया गया था। हालांकि, आरोप है कि बैंक में प्रस्तुत किए जाने पर यह चेक बाउंस हो गया। इसके बाद चेक बाउंस से संबंधित एक अलग मुकदमा भी दर्ज कराया गया। इस प्रकार, अभिनेत्री के खिलाफ दो समानांतर कानूनी प्रक्रियाएं चल रही हैं—एक मूल परिवाद और दूसरा चेक अनादरण (बाउंस) का मामला।
अदालत में अनुपस्थिति पर सख्ती
मूल परिवाद की सुनवाई के दौरान अमीषा पटेल अदालत में उपस्थित नहीं हुईं। अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी कर दिया। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, गैर-जमानती वारंट तब जारी किया जाता है जब आरोपी बार-बार अदालत में उपस्थित नहीं होता या समन/जमानती वारंट के बावजूद पेश नहीं होता। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि आरोपी अदालत के समक्ष पेश हो।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि अभिनेत्री को 27 मार्च को न्यायालय में उपस्थित होना होगा। यदि वे निर्धारित तिथि पर पेश नहीं होतीं, तो आगे की कानूनी कार्रवाई और कड़ी हो सकती है।
कानूनी पहलू
यह मामला भारतीय दंड संहिता की धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं और परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) के प्रावधानों से जुड़ा माना जा रहा है। चेक बाउंस के मामलों में आरोपी को बकाया राशि चुकाने और न्यायालय में उपस्थित रहने की बाध्यता होती है। यदि समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया जाता, तो अदालत सख्त रुख अपना सकती है।
पक्षकारों की स्थिति
फिलहाल अभिनेत्री या उनके प्रतिनिधियों की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। दूसरी ओर, शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें न्यायालय से न्याय की उम्मीद है और वे मामले को अंत तक लड़ेंगे। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि समझौते के बावजूद भुगतान पूरा नहीं किया गया और चेक बाउंस होने से उन्हें दोबारा कानूनी कार्रवाई करनी पड़ी।
उद्योग जगत में चर्चा
अमीषा पटेल का नाम फिल्म इंडस्ट्री में लंबे समय से जाना जाता है। ऐसे में उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट की खबर ने मनोरंजन जगत में भी चर्चा पैदा कर दी है। हालांकि, कानून की नजर में सभी समान हैं और अदालत का आदेश सभी पर समान रूप से लागू होता है। अब सबकी निगाहें 27 मार्च की तारीख पर टिकी हैं, जब अभिनेत्री को अदालत में पेश होना है।
कानूनी कदम
मुरादाबाद की अदालत द्वारा अमीषा पटेल के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया जाना इस मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी कदम है। 11 लाख रुपये के अग्रिम भुगतान, समझौते की शर्तों और चेक बाउंस विवाद ने इसे जटिल बना दिया है। अब 27 मार्च की सुनवाई इस मामले में अगला निर्णायक पड़ाव होगी। अदालत में उपस्थिति और आगे की कानूनी कार्यवाही के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि मामला किस दिशा में आगे बढ़ेगा।


