मेरठ: नीले ड्रम कांड के बाद सांप कांड में भी फांसी की सजा, पत्नी रविता और प्रेमी अमरदीप को मृत्युदंड
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक के बाद एक दो सनसनीखेज हत्याकांडों में अदालत ने फांसी की सजा सुनाकर सख्त संदेश दिया है

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक के बाद एक दो सनसनीखेज हत्याकांडों में अदालत ने फांसी की सजा सुनाकर सख्त संदेश दिया है। नीले ड्रम हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को 14 अक्टूबर 2026 को मृत्युदंड दिए जाने के ठीक दो दिन बाद शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को सांप कांड में भी पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को फांसी की सजा सुनाई गई। दोनों मामलों में पत्नी और प्रेमी ने मिलकर पति की हत्या की और सबूत छिपाने की कोशिश की। अदालत ने सांप कांड को ‘रेयर ऑफ द रेयरेस्ट’ (दुर्लभतम से दुर्लभतम) अपराध करार दिया।
घटना का पूरा ब्यौरा
अप्रैल 2025 में मेरठ के बहुसुमा क्षेत्र के अकबरपुर सादत गांव में अमित कश्यप उर्फ मिकी की मौत हुई। 13 अप्रैल 2025 की सुबह परिवार को अमित का शव बिस्तर पर मिला। शव के नीचे एक सांप फंसा हुआ था और शरीर पर करीब 10 सांप के डसने के निशान दिख रहे थे। परिवार ने पहले सोचा कि सर्पदंश से मौत हुई है। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि अमित की मौत गला घोंटने (एस्फिक्सिया) से हुई थी। गर्दन की हड्डियां टूटी हुई थीं और मुंह-नाक दबाने के निशान थे। सांप के जहर से मौत का कोई सबूत नहीं मिला।
पुलिस जांच में सामने आया कि अमित की पत्नी रविता और पड़ोसी अमरदीप के बीच अवैध संबंध थे। दोनों ने मिलकर साजिश रची। रात में जब अमित सो रहा था, तो रविता ने अमरदीप को बुलाया। दोनों ने मिलकर अमित का गला घोंट दिया। इसके बाद सबूत छिपाने के लिए बिस्तर पर एक सांप छोड़ दिया गया, ताकि मौत सर्पदंश जैसी लगे। सांप सपेरे से करीब एक हजार रुपये में खरीदा गया था। जांच में पता चला कि सांप जहरीला नहीं था और उसके जहर की थैली या दांत नहीं थे। सपेरों ने भी पुष्टि की कि इस सांप के डसने से मौत नहीं हो सकती।
पुलिस ने रविता से पूछताछ शुरू की तो उसने अमरदीप का नाम बताया। दोनों ने बाद में जुर्म कबूल किया। आरोपपत्र 60 दिनों के अंदर दाखिल कर दिया गया। अदालत में 12 से ज्यादा गवाह पेश हुए। 7 अक्टूबर 2026 को अदालत ने दोनों को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी ठहराया। 16 अक्टूबर को सजा सुनाई गई।
अदालत के फेसले पर प्रतिक्रिया
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-12) जयवीर सिंह नागर की अदालत ने दोनों को मृत्युदंड सुनाया। जज ने इस अपराध को रिश्तों की हत्या और बेहद क्रूर बताया। फैसला सुनते ही रविता और अमरदीप फूट-फूटकर रो पड़े। रविता ने बच्चों का ख्याल रखने की अपील की, जिस पर अदालत ने कहा कि जिलाधिकारी बच्चों की देखभाल करेंगे।
यह फैसला नीले ड्रम कांड के ठीक बाद आया है। नीले ड्रम मामले में मुस्कान और साहिल ने 3 मार्च 2025 को मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत की नशीली दवा देकर हत्या की थी। शव के टुकड़े कर नीले प्लास्टिक ड्रम में सीमेंट और बालू भरकर छिपा दिया था। 14 अक्टूबर को उन्हें भी फांसी हुई थी। जज ने उस समय महाभारत का हवाला देते हुए कहा था कि “दंड भी धर्म है”।
दोनों मामलों में दिखी समानता
दोनों कांडों में पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या की और सबूत मिटाने की कोशिश की। नीले ड्रम में शव को टुकड़ों में काटकर ड्रम में सील किया गया, जबकि सांप कांड में गला घोंटकर सांप छोड़ दिया गया। दोनों मामलों में जांच तेज रही और अदालत ने सख्त सजा दी। मेरठ पुलिस की वैज्ञानिक जांच, फोरेंसिक सबूतों और गवाहों के बयानों ने दोनों मामलों को मजबूत बनाया।
ये फैसले समाज में अपराध के खिलाफ सख्त संदेश देते हैं। अदालत ने साफ कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों में नरमी नहीं बरती जा सकती। मृतक अमित के परिवार ने फैसले का स्वागत किया और न्याय मिलने पर राहत जताई। रविता और अमरदीप की सजा अब उच्च न्यायालय की पुष्टि के बाद ही लागू होगी।
मेरठ में लगातार दो ऐसे मामलों में फांसी की सजा ने पूरे प्रदेश में चर्चा छेड़ दी है। कानून व्यवस्था और न्याय व्यवस्था की मजबूती का यह उदाहरण है।


