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BSP के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह के निधन पर कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि, मायावती ने कही यह भावुक बात

मायावती ने उमाशंकर सिंह की राजनीतिक निष्ठा को याद करते हुए कहा कि बदलते राजनीतिक हालात और सत्ता परिवर्तन के बावजूद उन्होंने कभी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा।

BSP के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह के निधन पर कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि,  मायावती ने कही यह भावुक  बात
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लखनऊ: Umashankar Singh Passes Away : उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) प्रमुख मायावती ने पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं रसड़ा से विधायक उमाशंकर सिंह के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने उन्हें पार्टी का कर्मठ, ईमानदार और समर्पित नेता बताते हुए कहा कि उन्होंने जीवनभर संगठन के प्रति निष्ठा बनाए रखी और कभी विश्वासघात नहीं किया। मायावती ने भावुक शब्दों में कहा कि उमाशंकर सिंह उन्हें अपनी सगी बहन की तरह मानते थे और उनका पूरा परिवार भी उन्हें उसी सम्मान से देखता था। उमाशंकर सिंह का लंबी बीमारी के बाद दिल्ली के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वह 55 वर्ष के थे और उत्तर प्रदेश विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी के एकमात्र विधायक थे।

मायावती ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

बीएसपी प्रमुख मायावती ने अपने शोक संदेश में कहा कि पार्टी में शामिल होने के बाद से उमाशंकर सिंह ने पूरी ईमानदारी, समर्पण और निष्ठा के साथ संगठन की सेवा की। उन्होंने हर जिम्मेदारी को पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ निभाया। मायावती ने कहा कि उमाशंकर सिंह केवल अपने विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं थे, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच भी उनकी मजबूत पहचान थी। उन्होंने कहा कि उनके निधन की खबर से उन्हें गहरा आघात पहुंचा है और इस दुख की घड़ी में उनकी संवेदनाएं दिवंगत विधायक के परिवार और सभी शुभचिंतकों के साथ हैं।

‘उन्होंने कभी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा’

मायावती ने उमाशंकर सिंह की राजनीतिक निष्ठा को याद करते हुए कहा कि बदलते राजनीतिक हालात और सत्ता परिवर्तन के बावजूद उन्होंने कभी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा, "उमाशंकर सिंह ने पूरी ईमानदारी से राजनीति की। कई अवसर आए, लेकिन उन्होंने कभी संगठन के साथ विश्वासघात नहीं किया। वह मुझे अपनी सगी बहन मानते थे और उनका पूरा परिवार मुझे बड़े सम्मान के साथ देखता था।" मायावती ने यह भी कहा कि पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा और समर्पण हमेशा कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।

राजनीतिक दलों ने भी जताया शोक

उमाशंकर सिंह के निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देते हुए ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति और परिजनों को इस कठिन समय में धैर्य प्रदान करने की प्रार्थना की।

उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने भी उनके निधन को प्रदेश की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि उमाशंकर सिंह ने अपने सार्वजनिक जीवन में जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और अपने क्षेत्र के विकास के लिए निरंतर कार्य किया। उनकी सादगी और जनसरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता हमेशा याद रखी जाएगी।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत विधायक के परिजनों के प्रति संवेदनाएं प्रकट कीं और उनकी आत्मा की शांति की कामना की।

छात्र राजनीति से शुरू हुआ था सफर

उमाशंकर सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी। वर्ष 1990-91 में वह बलिया के सतीश चंद्र कॉलेज छात्रसंघ के महामंत्री चुने गए थे। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और बहुजन समाज पार्टी से जुड़कर संगठन में अपनी अलग पहचान बनाई। वर्ष 2012 में उन्होंने पहली बार बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने लगातार जीत दर्ज की। लगातार तीन बार विधायक चुने जाने से क्षेत्र में उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ का अंदाजा लगाया जाता है।

बीएसपी के लिए बड़ा राजनीतिक नुकसान

उत्तर प्रदेश विधानसभा में उमाशंकर सिंह बीएसपी के इकलौते विधायक थे। ऐसे में उनका निधन केवल पार्टी के लिए ही नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति के लिए भी एक महत्वपूर्ण क्षति माना जा रहा है। उनके समर्थकों का कहना है कि वह जनता के बीच सरल, सहज और उपलब्ध रहने वाले जनप्रतिनिधि थे। लंबे समय से अस्वस्थ होने के बावजूद वह क्षेत्र की समस्याओं और लोगों के संपर्क में बने रहे।

परिवार में छोड़ गए गहरा शोक

उमाशंकर सिंह अपने पीछे परिवार में एक बेटा और एक बेटी छोड़ गए हैं। उनके निधन से परिवार, समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं में शोक की लहर है।

राजनीतिक जीवन में अपनी सादगी, संगठन के प्रति निष्ठा और जनता से जुड़े रहने की शैली के कारण उमाशंकर सिंह को बीएसपी के प्रमुख नेताओं में गिना जाता था। उनके निधन के साथ उत्तर प्रदेश की राजनीति ने एक ऐसे जनप्रतिनिधि को खो दिया, जिसे विभिन्न दलों के नेता भी सम्मान की दृष्टि से देखते थे।


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