मायावती भतीजे आकाश आनंद पर भड़कीं, फिर पार्टी से निकाला: कहा- आकाश को पार्टी से ज्यादा ससुर प्रिय
आकाश आनंद को मायावती ने पिछले तीन वर्षों में दूसरी बार पार्टी से बाहर किया है। इससे ठीक एक सप्ताह पहले उन्हें बसपा के राष्ट्रीय संयोजक जैसे अहम पद से हटा दिया गया था। उस समय मायावती ने कहा था कि आकाश को राजनीतिक तौर पर अभी और परिपक्व होने की जरूरत है।

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) में आकाश आनंद की वापसी की उम्मीदों पर मायावती के एक फैसले ने पानी फेर दिया है। माना जा रहा था कि आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास के ऐलान के बाद बसपा प्रमुख आकाश को दोबारा पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दे सकती हैं। लेकिन मायावती ने इसके उलट आकाश आनंद को पार्टी से ही अलग कर दिया। उन्होंने साफ किया कि आकाश अब बसपा में स्वतंत्र हैं और पार्टी की जिम्मेदारियों से पूरी तरह मुक्त कर दिए गए हैं।
तीन साल में दूसरी बार पार्टी से बाहर हुए आकाश
आकाश आनंद को मायावती ने पिछले तीन वर्षों में दूसरी बार पार्टी से बाहर किया है। इससे ठीक एक सप्ताह पहले उन्हें बसपा के राष्ट्रीय संयोजक जैसे अहम पद से हटा दिया गया था। उस समय मायावती ने कहा था कि आकाश को राजनीतिक तौर पर अभी और परिपक्व होने की जरूरत है। इसके बाद पार्टी के भीतर यह चर्चा शुरू हुई थी कि आने वाले समय में उन्हें फिर कोई जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि, अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से हटने के ऐलान के बाद भी मायावती का रुख नहीं बदला। उन्होंने आकाश को पार्टी में वापस लेने के बजाय संगठन से पूरी तरह अलग करने का फैसला किया।
मायावती ने अशोक सिद्धार्थ के इरादों पर उठाए सवाल
मायावती ने अपने फैसले के पीछे आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ की भूमिका और उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को वजह बताया। बसपा प्रमुख के मुताबिक, अगर अशोक सिद्धार्थ को अपने दामाद आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य के साथ-साथ बसपा और अंबेडकरवादी बहुजन आंदोलन के हितों की चिंता होती, तो उन्हें बिना देरी राजनीति से संन्यास का ऐलान कर देना चाहिए था। मायावती का कहना है कि ऐसा नहीं होने से उन्हें अशोक सिद्धार्थ के इरादों को लेकर सवाल उठे। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी के हितों और व्यक्तिगत या पारिवारिक हितों के बीच प्राथमिकता को लेकर उनके मन में गंभीर आपत्तियां हैं।
आकाश के सोशल मीडिया व्यवहार पर भी मायावती नाराज
बसपा प्रमुख ने आकाश आनंद के सोशल मीडिया व्यवहार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आकाश ने उनके सोशल मीडिया अकाउंट ‘X’ पर किए गए संबंधित पोस्ट को रीपोस्ट तक नहीं किया, जबकि उनके मुताबिक वह पोस्ट आकाश के राजनीतिक हित में ही था। मायावती ने इसे आकाश के पार्टी के बजाय अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रति अधिक जुड़ाव के संकेत के तौर पर देखा। उन्होंने कहा कि पहले आकाश सोशल मीडिया पोस्ट रीपोस्ट करके अपनी निष्ठा दिखाने की कोशिश करते थे, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में उनका रवैया अलग नजर आया।
‘बसपा ने आकाश और अशोक को आगे बढ़ाया’
मायावती ने अपने बयान में यह भी कहा कि बसपा ने आकाश आनंद और अशोक सिद्धार्थ समेत कई नेताओं को राजनीतिक पहचान और जिम्मेदारियां दीं। उनके मुताबिक, पार्टी और उसके नेतृत्व के प्रति इन नेताओं को आभार व्यक्त करना चाहिए। बसपा प्रमुख ने कहा कि अगर आकाश पार्टी और बहुजन आंदोलन के हितों की तुलना में पारिवारिक रिश्तों को अधिक महत्व देते हैं, तो उनके लिए संगठन के हित में प्रभावी ढंग से काम करना मुश्किल होगा। इसी आधार पर उन्होंने आकाश को पार्टी से पूरी तरह स्वतंत्र करने का फैसला उचित बताया।
अब आकाश के सामने क्या विकल्प?
आकाश आनंद को पार्टी से बाहर किए जाने के बाद बसपा में उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। कुछ समय पहले तक उन्हें मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाता रहा है और संगठन में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी दी गई थीं। लेकिन हालिया घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर उनकी स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है। पहले राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाए जाने और अब पार्टी से अलग किए जाने के बाद आकाश के लिए बसपा में सक्रिय भूमिका फिलहाल खत्म हो गई है। वहीं, मायावती के ताजा बयान से साफ है कि अशोक सिद्धार्थ के राजनीतिक संन्यास के बावजूद पार्टी नेतृत्व ने आकाश को लेकर अपना फैसला नहीं बदला।
बसपा में यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब पार्टी आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए अपने संगठन और नेतृत्व की दिशा तय कर रही है। अब नजर इस बात पर होगी कि आकाश आनंद इस फैसले के बाद क्या राजनीतिक कदम उठाते हैं और मायावती के नेतृत्व में बसपा का संगठन किस दिशा में आगे बढ़ता है।


