उत्तर प्रदेश में भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क नियमों में बड़े बदलाव
उत्तर प्रदेश सरकार ने नगर योजना और विकास संबंधी नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए “उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास (भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क का निर्धारण, उद्ग्रहण एवं संग्रहण) (तृतीय संशोधन) नियमावली, 2026” अधिसूचित कर दी है

मेरठ/लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने नगर योजना और विकास संबंधी नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए “उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास (भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क का निर्धारण, उद्ग्रहण एवं संग्रहण) (तृतीय संशोधन) नियमावली, 2026” अधिसूचित कर दी है। आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-8 द्वारा जारी अधिसूचना संख्या एलयूसी-179-आठ-8-2026/8-8099/804/2025 के अनुसार यह नियमावली 22 सितंबर 2026 को लखनऊ से जारी की गई है और सरकारी गजट में प्रकाशन की तिथि से पूरे राज्य के विकास क्षेत्रों में लागू होगी।
मुख्य संशोधन
शुल्क कब नहीं लगेगा
नए प्रावधानों के अनुसार निम्नलिखित परिस्थितियों में भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क नहीं वसूला जाएगा—
- जब भूमि केंद्रीय सरकार, राज्य सरकार या किसी स्थानीय निकाय के स्वामित्व में हो।
- जब पूर्ण या आंशिक रूप से शुल्क का भुगतान राज्य सरकार द्वारा छूट के रूप में प्रदान किया गया हो।
- जब भूमि किसी महायोजना या परिक्षेत्रीय विकास योजना में संशोधन के फलस्वरूप बदली गई हो और निर्धारित प्रक्रिया पूरी की गई हो।
शुल्क की गणना का तरीका
प्राधिकरण की स्कीम में भूखंड के संपूर्ण क्षेत्रफल को सेक्टर रेट या सर्किल रेट से गुणा कर शुल्क तय किया जाएगा। यदि सेक्टर रेट उपलब्ध न हो तो निकटतम स्कीम के रेट और अनुसूची-‘क’ में दिए गए गुणांक के आधार पर गणना होगी। भूखंड के आकार के अनुसार गुणांक इस प्रकार हैं—
| भूमि खंड का क्षेत्रफल (हेक्टेयर) | गुणांक |
| 0.25 तक | 1.0 |
| 0.25 से अधिक और 1.0 तक | 0.9 |
| 1.0 से अधिक और 5.0 तक | 0.8 |
| 5.0 से अधिक और 10.0 तक | 0.7 |
| 10.0 से अधिक | 0.6 |
गणना टेलिस्कोपिक आधार पर की जाएगी। उदाहरण के लिए 15 हेक्टेयर भूमि पर शुल्क की गणना विभिन्न स्लैबों में बांटकर की जाएगी। भूमि के क्षेत्रफल के आधार पर सर्किल/सेक्टर रेट में कोई अतिरिक्त छूट नहीं दी जाएगी।
जहां एक से अधिक सर्किल रेट लागू हों, वहां मौजूदा भू-उपयोग के आधार पर शुल्क तय होगा। कृषि, आवासीय, वाणिज्यिक आदि उपयोगों के लिए अलग-अलग सूत्र भी निर्धारित किए गए हैं।
आवेदन और प्रक्रिया
आवेदक को प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के समक्ष निर्धारित प्रपत्र में आवेदन देना होगा। आवेदन के साथ स्वामित्व/विक्रय विलेख, वर्तमान एवं प्रस्तावित भू-उपयोग का विवरण, स्थल नक्शा तथा आवेदन शुल्क (न्यूनतम ₹1000 प्रति हेक्टेयर) लगाना अनिवार्य होगा।
- छोटे भूखंडों (6000 वर्ग मीटर तक) और कुछ विशेष मामलों में सरलीकृत प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
- आवेदन की समीक्षा विकास प्राधिकरण तथा नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग द्वारा 22 दिनों के भीतर की जाएगी।
- अनुमोदन के बाद आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। आपत्तियों का निपटारा विशेष समिति द्वारा किया जाएगा, जिसमें जिला मजिस्ट्रेट, नगर आयुक्त, नियोजन अधिकारी आदि शामिल होंगे।
- राज्य सरकार की स्वीकृति वाले मामलों में अलग समय-सीमाएं निर्धारित की गई हैं।
प्राधिकरण को अंतिम निर्णय के 15 दिनों के भीतर मांग नोटिस जारी करना होगा और शुल्क जमा होने के बाद भू-उपयोग परिवर्तन की अधिसूचना जारी की जाएगी।
यह संशोधन भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से किया गया है। विकास प्राधिकरणों और आवेदकों दोनों के लिए नई समय-सीमाएं और गणना पद्धति लागू होंगी (आधिकारिक अधिसूचना के आधार पर)!


